जल सिर्फ आवश्यक वस्तु नहीं, संस्कृति व संस्कारों का केंद्र

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Published on : 01 Jun, 26 18:06

कृषि विभाग का जिला स्तरीय कार्यक्रम

जल सिर्फ आवश्यक वस्तु नहीं, संस्कृति व संस्कारों का केंद्र

उदयपुर। आमजन को जल एवं पर्यावरण का महत्व समझाते हुए उनके संरक्षण के लिए संकल्पित करने मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा की पहल पर आयोजित वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान - 2026 अपने परवान पर है। अभियान के तहत सोमवार को कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के साझे में जिला स्तरीय कार्यक्रम बड़गांव स्थित कृषि विज्ञान केंद्र परिसर में हुआ। कार्यक्रम में जल संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया।

कार्यक्रम समाजसेवी प्रमोद सामर, दीपक शर्मा, अशोक शर्मा एवं झील संरक्षण समिति के अध्यक्ष अनिल मेहता के आतिथ्य में आयोजित हुआ। इस अवसर पर अतिथियों एवं किसानों ने जल संरक्षण के महत्व को समझते हुए जनभागीदारी के माध्यम से अभियान को सफल बनाने का संकल्प लिया। संयुक्त निदेशक कृषि विस्तार सुधीर वर्मा ने स्वागत उद्बोधन देते हुए वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान की विस्तृत जानकारी दी तथा अभियान के उद्देश्यों एवं गतिविधियों से अवगत कराया।

जल, गौ एवं पीपल पूजन
कार्यक्रम की शुरुआत भारतीय संस्कृति एवं प्रकृति संरक्षण की भावना के साथ जल पूजन, गौ पूजन एवं पीपल पूजन से हुई। अतिथियों ने जल एवं पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला। साथ ही अतिथियों एवं विभागीय अधिकारियों ने परिसर में पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण एवं वृक्षारोपण को जन आंदोलन बनाने का आह्वान किया।

जागरूकता कार्यशाला में दी तकनीकी जानकारी
इस अवसर पर जागरूकता कार्यशाला भी हुई। इसमें अतिथियों ने जल का महत्व बताते हुए उसके संरक्षण पर जोर दिया। अतिथियों ने कहा कि जल केवल आवश्यक वस्तु नहीं है, संस्कृति और संस्कारों का केंद्र है। जल को सर्वाधिक पवित्र और निर्मल माना जाता है। जल हमारी भावनाओं से भी जुड़ा हुआ है, इसलिए जब कभी जलस्त्रोतों के पास जाएं तो अपने भाव सात्विक और निर्मल रखने चाहिए। कार्यशाला में कृषि विभाग, उद्यानिकी विभाग एवं कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञों ने किसानों को विभिन्न कृषि योजनाओं, उन्नत सिंचाई तकनीकों, जल संरक्षण उपायों तथा आधुनिक कृषि पद्धतियों की जानकारी प्रदान की। कार्यक्रम में उपस्थित किसानों, अधिकारियों एवं आमजन को जल संरक्षण की शपथ दिलाई गई तथा जल के विवेकपूर्ण उपयोग का संकल्प कराया गया।

प्रगतिशील किसानों ने साझा किए अनुभव
कार्यशाला में प्रगतिशील किसान नानालाल शर्मा, प्रेमचंद, राजेश शर्मा, रमेशचंद्र डांगी व अंबालाल जाट आदि ने अपने अनुभव साझा करते हुए आधुनिक कृषि तकनीकों, सूक्ष्म सिंचाई एवं नवाचारों से प्राप्त सफलताओं की जानकारी दी, जिससे अन्य किसानों को भी प्रेरणा मिली। संयुक्त निदेशक कृषि विस्तार सुधीर वर्मा, विशेषज्ञ मनजीतसिंह, केवीके प्रभारी प्रफुल्ल भटनागर, टीएडी के संयुक्त निदेशक श्यामलाल सालवी, उद्यानिकी उपनिदेशक कैलाशचंद्र शर्मा, सहायक निदेशक कृषि मिताली राठौड़, रामकिशोर मीणा, लीड बैंक आफिसर संजय गुप्ता, नाबार्ड जिला प्रबंधक नीरज यादव, भूजल वैज्ञानिक मोनिका राठौड़ आदि ने किसानों को विभागीय योजनाओं, वित्तीय सहायता एवं जल संरक्षण संबंधी कार्यक्रमों की जानकारी दी।

किसानों का सम्मान एवं मिनी किट वितरण
कार्यक्रम के दौरान सोलर पंप स्थापित करने वाले किसानों का सम्मान किया गया। साथ ही 5 किसानों को मक्का मिनी किट वितरित कर उन्नत कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
 


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