हर साल 31 मई को पूरी दुनिया में "विश्व तम्बाकू निषेध दिवस" मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य तंबाकू के सेवन से स्वास्थ्य पर होने वाले जानलेवा प्रभावों और बीमारियों के बारे में एवं स्वास्थ्य, पर्यावरण और अर्थव्यवस्था पर तम्बाकू के हानिकारक प्रभावों के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। विश्व तंबाकू निषेध दिवस 2026 के लिए डब्ल्यू .एच.ओ. का आधिकारिक विषय है__ "आकर्षण का पर्दाफाश_ निकोटीन और तंबाकू की लत का मुकाबला "। पारंपरिक तंबाकू के उपयोग को कम करने में दशकों की प्रगति के बावजूद, तंबाकू और निकोटीन उद्योगों ने एक नया रूप धारण कर लिया है । विश्व स्वास्थ्य संगठन के सदस्य देशों ने 1987 में इस दिवस की स्थापना की थी जिसका वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों को तंबाकू के हानिकारक प्रभावों जैसे कैंसर, हृदय रोग और फेफड़ों की गंभीर बीमारियों से बचाना है। दुनिया भर में हर साल लगभग 80 लाख लोग तंबाकू से जुड़ी बीमारियों के कारण अपनी जान गंवाते हैं। इस विषय पर हर साल तंबाकू नियंत्रण की चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए एक विशेष थीम चुनी जाती है __
1. 2026 की थीम__ "आकर्षण का पर्दाफाश करना __ निकोटीन और तंबाकू की लत का मुकाबला करना"।
2. 2025 की थीम__"ब्राइट प्रोडक्ट्स, डार्क इंटेंशंस - अनमास्किंग दी अपील"।
3. 2024 की थीम__ "बच्चों को तंबाकू उद्योग के हस्तक्षेप से बचाना"। WHO ने 7 अप्रैल 1988 को 'विश्व धूम्रपान निषेध दिवस' घोषित किया था। बाद में 1988 में एक संकल्प के माध्यम से 31 मई को आधिकारिक तौर पर 'विश्व तंबाकू निषेध दिवस' के रूप में नामित किया गया। भारत में भी इस दिवस पर विभिन्न जागरूकता रैलियां, नारे , शपथ ग्रहण समारोह और स्कूलों में प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है, ताकि "तंबाकू मुक्त पीढ़ी" के निर्माण को बढ़ावा दिया जा सके। कई नारों का उपयोग किया गया ताकि लोग तम्बाकू को छोड़े जैसे __"कैलोरी जलाएं, तंबाकू नहीं" , "जीवन को हां कहें और तंबाकू को ना कहें" ।
तंबाकू के सेवन से कम से कम 15 तरह के कैंसर, दिल की बीमारियों और फेफड़ों से जुड़ी कई बीमारियों का ज़्यादा खतरा हो सकता है। तंबाकू का सेवन कई तरीकों से किया जा सकता है जैसे __सिगरेट पीना, तंबाकू चबाना या 'डिपिंग' करना, हुक्का और सिगार। सिगरेट पीना तंबाकू के सेवन का सबसे आम तरीका है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनिया के 12% धूम्रपान करने वाले लोग भारत में रहते हैं। भारत में हर साल तंबाकू से जुड़ी बीमारियों के कारण 10 लाख से ज़्यादा लोगों की मौत हो जाती है।
तंबाकू के सेवन से निम्न पाँच गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है__
1. फेफड़ों का कैंसर__दुनिया भर में फेफड़ों के कैंसर से होने वाली 87% मौतों का कारण तंबाकू का धूम्रपान है ये सबसे आम कारण हैं । अगर अभी भी किसी को यह लत है, तो आज से पाँच साल बाद उसके जीवित रहने की संभावना पाँच में से एक से भी कम है।
2. मुँह का कैंसर__मुँह के कैंसर के 90% मरीज़ तंबाकू का सेवन करने वाले होते हैं। ये लोग 'डिपिंग' करते हैं, यानी तंबाकू को दाँतों के बीच दबाकर चबाते हैं। मुँह के कैंसर के मुख्य कारणों में से यह एक है। इससे गले के कैंसर का खतरा भी बढ़ जाता है।
3. दिल की बीमारियाँ__धूम्रपान करने वालों को दिल का दौरा पड़ने की संभावना उन लोगों की तुलना में लगभग दोगुनी होती है, जिन्होंने कभी धूम्रपान नहीं किया। धूम्रपान से दिल और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी बीमारियों (कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों) का खतरा बढ़ जाता है, जिसमें कोरोनरी हृदय रोग और स्ट्रोक शामिल हैं। सिगरेट में 'निकोटीन' नाम का एक पदार्थ होता है। निकोटीन शरीर को 'एड्रेनालिन' बनाने के लिए उत्तेजित करता है, जिससे रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) बढ़ जाता है और दिल की धड़कन तेज़ हो जाती है। दिल से जुड़ी बीमारियों से होने वाली हर पाँच में से एक मौत का कारण तंबाकू का धूम्रपान होता है।
4. स्ट्रोक__तंबाकू का धूम्रपान करने से धमनियाँ सिकुड़ जाती हैं, जिससे रक्त का प्रवाह और मस्तिष्क तक ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित हो जाती हैं जिसकी वजह से स्ट्रोक हो सकता है। स्ट्रोक तब होता है जब दिमाग में खून की सप्लाई कुछ समय के लिए रुक जाती है। इसकी वजह से, दिमाग की कोशिकाओं को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और वे मरने लगती हैं। स्ट्रोक के कारण लकवा, बोलने में दिक्कत, दिमाग के काम करने में रुकावट और मौत भी हो सकती है।
5. क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिज़ीज़ __COPD या क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिज़ीज़ सांस से जुड़ी एक पुरानी बीमारी है, जिससे मरीज़ को सांस लेने में मुश्किल होती है। इन मरीज़ों को सीढ़ियां चढ़ने, दौड़ने, जॉगिंग करने या कोई भी शारीरिक काम करने में दिक्कत होती है। इससे कोई शारीरिक कमी हो सकती है या समय से पहले मौत भी हो सकती है। इस बीमारी का एक सबसे बड़ा कारण तंबाकू पीना है। COPD के 80% मामले तंबाकू पीने की वजह से ही होते हैं।