जल संरक्षण पर वाटर हीरो के 7 सुझाव, मुख्यमंत्री को डॉ. जैन का खुला पत्र

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Published on : 02 Jun, 26 11:06

वर्षा जल संरक्षण, भूजल रिचार्ज और जनभागीदारी पर विशेष जोर

जल संरक्षण पर वाटर हीरो के 7 सुझाव, मुख्यमंत्री को डॉ. जैन का खुला पत्र

उदयपुर। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय द्वारा वर्ष 2020 में “वाटर हीरो” सम्मान से सम्मानित जल संरक्षण विशेषज्ञ डॉ. पी.सी. जैन ने राजस्थान के मुख्यमंत्री Bhajan Lal Sharma को एक खुला पत्र लिखकर प्रदेश में चल रहे “वंदे गंगा, जल संरक्षण-जन अभियान 2026” को अधिक प्रभावी बनाने हेतु सात महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं।

डॉ. जैन ने कहा कि वे पिछले 25 वर्षों से विशेष रूप से वर्षा जल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि बिना रिचार्ज वाले हैंडपंपों और ट्यूबवेलों की पहचान कर उन्हें आसपास के भवनों से जोड़कर सरल एवं कम लागत वाले रिचार्ज सिस्टम विकसित किए जाएं। उन्होंने बताया कि उदयपुर और डूंगरपुर में ऐसे कई बंद पड़े हैंडपंप रिचार्ज के बाद पुनः जल उपलब्ध करा रहे हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि नगर निगम, नगर पालिका एवं नगर विकास प्राधिकरणों में भवन निर्माण के दौरान वर्षा जल संचयन के लिए जमा कराई गई अमानत राशि का उपयोग सुनिश्चित किया जाए। जिन भवन मालिकों ने अब तक रूफटॉप रेनवॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित नहीं किए हैं, उन्हें इसके लिए बाध्य किया जाना चाहिए ताकि जल दोहन के साथ-साथ जल संवर्धन भी हो सके।

डॉ. जैन ने जनप्रतिनिधियों से अपने घरों में वर्षा जल संरक्षण संयंत्र स्थापित कर जनता के लिए उदाहरण प्रस्तुत करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इससे जल संरक्षण का अभियान वास्तविक जनआंदोलन बन सकेगा।

उन्होंने स्वयंसेवी संस्थाओं को भी इस अभियान से जोड़ने का सुझाव दिया। उनका कहना है कि गर्मी के दौरान अस्थायी प्याऊ लगाने वाली संस्थाओं को हैंडपंपों और ट्यूबवेलों के रिचार्ज कार्य से जोड़कर स्थायी जल स्रोत विकसित किए जा सकते हैं। साथ ही उन्हें किसी जल स्रोत को गोद लेने के लिए भी प्रेरित किया जाना चाहिए।

डॉ. जैन ने सभी सरकारी भवनों पर रूफटॉप रेनवॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अनिवार्य रूप से स्थापित करने तथा मानसून से पूर्व उनकी कार्यशीलता की जांच सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने रूफटॉप सोलर सिस्टम की तर्ज पर वर्षा जल संचयन प्रणालियों के लिए भी सरकारी सब्सिडी देने का सुझाव रखा।

अपने अंतिम सुझाव में उन्होंने कहा कि वर्तमान में सड़कों का निर्माण वॉल-टू-वॉल किए जाने से प्राकृतिक भूजल रिचार्ज प्रभावित हो रहा है। इसलिए जहां संभव हो, सड़कों के दोनों ओर खुली भूमि छोड़ी जानी चाहिए ताकि वर्षा का जल धरती में समाकर भूजल स्तर को बढ़ा सके।

डॉ. जैन ने आशा व्यक्त की कि जल संरक्षण पखवाड़े के दौरान इन सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा ताकि वर्षा जल का अधिकतम संरक्षण हो सके और प्रदेश में जल संकट के समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकें।


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