विश्व पर्यावरण दिवस केवल चिंतन का अवसर नहीं, बल्कि संकल्प का पर्व

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Published on : 05 Jun, 26 16:06

-वासुदेव देवनानी

विश्व पर्यावरण दिवस केवल चिंतन का अवसर नहीं, बल्कि संकल्प का पर्व

भारत की सनातन संस्कृति में पर्यावरण संरक्षण का भाव प्राचीन काल से ही जीवन का अभिन्न अंग रहा है। यहाँ प्रकृति को केवल संसाधन नहीं, बल्कि पूजनीय और जीवनदायिनी शक्ति के रूप में देखा गया है। सदियों से जल को जीवन का आधार मानकर नदियों, सरोवरों और कुओं का पूजन किया जाता रहा है तथा वरुण देवता की आराधना की परंपरा रही है। साथ ही पीपल, वटवृक्ष, नीम और तुलसी जैसे वृक्षों एवं पौधों की पूजा के माध्यम से उनके संरक्षण का संदेश दिया जाता रहा है। हमने पृथ्वी को माता, आकाश को पिता और समस्त सृष्टि को अपना परिवार माना है और इस भावना ने ही भारत में पर्यावरण के प्रति श्रद्धा, संतुलन और संरक्षण की संस्कृति को सदियों तक जीवित रखा है।

इस पृष्ठभूमि में विश्व पर्यावरण दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति मानव की जिम्मेदारी का स्मरण कराने वाला वैश्विक अभियान है। प्रत्येक वर्ष 5 जून को मनाया जाने वाला यह दिवस हमें यह संदेश देता है कि यदि धरती का पर्यावरण सुरक्षित रहेगा, तभी मानव सभ्यता का भविष्य भी सुरक्षित रहेगा। वर्तमान समय में ग्लोबल वार्मिंग यानी जलवायु परिवर्तन, जल संकट, बढ़ता प्रदूषण, वन क्षेत्र में कमी और जैव विविधता के क्षरण जैसी चुनौतियाँ पूरी दुनिया के सामने गंभीर प्रश्न बनकर खड़ी हैं। ऐसे समय में पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारों का विषय नहीं, बल्कि जनभागीदारी का व्यापक आंदोलन बन चुका है। राजस्थान जैसे विशाल और जल संकट से जूझते राज्य में पर्यावरण और जल संरक्षण का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। इस संदर्भ में राजस्थान सरकार द्वारा संचालित “वन्दे गंगा जल संरक्षण जन अभियान” एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया है।

राजस्थान भौगोलिक दृष्टि से देश का सबसे बड़ा राज्य है, लेकिन जल संसाधनों की उपलब्धता यहाँ सीमित है। प्रदेश में भूमिगत और सतही जल की भारी कमी है । कई ब्लॉक डार्क जोन में है।साथ ही पानी की गुणवत्ता भी सन्तोष जनक नहीं है । ऐसे में राजस्थान में मरुस्थलीय क्षेत्र की बहुलता, कम वर्षा, भूजल का अत्यधिक दोहन और लगातार बढ़ते तापमान ने जल संकट को और भी गंभीर बना दिया है। राज्य के कई जिलों में गर्मियों के दौरान पेयजल की स्थिति चुनौतीपूर्ण हो जाती है। ऐसे समय में जल संरक्षण को जनआंदोलन का रूप देना अत्यंत आवश्यक है। आज पूरी दुनिया यह स्वीकार कर रही है कि भविष्य का सबसे बड़ा संकट पानी को लेकर होगा। संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न रिपोर्टें भी संकेत देती हैं कि यदि समय रहते जल संरक्षण के प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। राजस्थान जैसे राज्य, जहाँ वर्षा का औसत कम है, वहाँ प्रत्येक बूंद का महत्व और अधिक है। यही कारण है कि “कैच द रेन”, “जल स्वावलंबन” और “वन्दे गंगा” जैसे अभियान केवल सरकारी योजनाएँ नहीं, बल्कि भविष्य की आवश्यकता बन चुके हैं।

इन परिस्थितियों में मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के नेतृत्व में शुरू किया गया “वन्दे गंगा जल संरक्षण जन अभियान” इसी सोच का परिणाम है। यह अभियान केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज, प्रशासन और जनसहभागिता के समन्वय का गंभीर प्रयास है।इस अभियान का मूल उद्देश्य वर्षा जल संरक्षण, पारंपरिक जल स्रोतों का पुनर्जीवन, नदियों और तालाबों की सफाई, जल संचयन संरचनाओं का निर्माण तथा लोगों में जल बचाने के प्रति जागरूकता पैदा करना है। राजस्थान की संस्कृति में जल को सदैव जीवन और आस्था का प्रतीक माना गया है। यहाँ के प्राचीन बावड़ी, कुएँ, तालाब और जोहड़ केवल जल संग्रहण के साधन ही नहीं थे, बल्कि सामाजिक जीवन में श्रद्धा के केन्द्र भी रहें हैं। राजस्थान की परंपरा सदैव प्रकृति के सम्मान की रही है। यहाँ के लोकगीतों, लोकदेवताओं और सामाजिक जीवन में जल और वृक्षों का विशेष महत्व दिखाई देता है। आधुनिकता की दौड़ में जब ये परंपरागत स्रोत उपेक्षित होने लगे, तब से ही जल संकट ने विकराल रूप लेना शुरू कर दिया। “वन्दे गंगा” अभियान इसी पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक जल प्रबंधन के समन्वय का सराहनीय प्रयास है। आज आवश्यकता इस बात की है कि आधुनिक विकास के साथ-साथ प्रकृति के संरक्षण को भी समान महत्व दिया जाए। यदि आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित भविष्य देना है तो जल और पर्यावरण की रक्षा अनिवार्य होगी।

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर यह अभियान और अधिक प्रासंगिक हो जाता है क्योंकि पर्यावरण और जल संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं। यदि जल स्रोत सुरक्षित रहेंगे तो हरियाली बढ़ेगी, भूजल स्तर सुधरेगा और पर्यावरण संतुलित रहेगा। इसी सोच के साथ राजस्थान में हरियालीं राजस्थान अभियान के अलावा जलाशयों की सफाई,जल संरक्षण शपथ, श्रमदान और पौधारोपण आदि जन जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। गाँवों में भी पंचायत स्तर तक लोगों को जोड़ा जा रहा है ताकि प्रत्येक नागरिक इस अभियान का सहभागी बन सके। राजस्थान में अनेक स्थानों पर सूख चुके तालाबों और नालों के पुनर्जीवन का कार्य प्रारम्भ हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को वर्षा जल संचयन संरचनाएँ बनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। स्कूलों और कॉलेजों में विद्यार्थियों को जल संरक्षण का संदेश दिया जा रहा है ताकि नई पीढ़ी पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बन सके। महिलाओं, स्वयंसेवी संगठनों और युवाओं की भागीदारी इस अभियान को जनआंदोलन का स्वरूप दे रही है। प्रशासनिक स्तर पर भी जल संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित किया गया है। पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से भी यह अभियान अत्यंत महत्वपूर्ण है। जल संरक्षण से वृक्षों और वनस्पतियों को जीवन मिलता है। हरियाली बढ़ने से तापमान नियंत्रित रहता है और जैव विविधता सुरक्षित रहती है। राजस्थान में लगातार बढ़ती गर्मी और लू की घटनाएँ इस बात का संकेत हैं कि प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखना कितना आवश्यक है। यदि तालाब, नदी और जल स्रोत पुनर्जीवित होंगे तो पर्यावरणीय संतुलन भी मजबूत होगा। इस प्रकार “वन्दे गंगा” अभियान केवल पानी बचाने का प्रयास नहीं, बल्कि संपूर्ण पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उठाया गया व्यापक कदम है।

विश्व पर्यावरण दिवस हमें यह भी सिखाता है कि प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी केवल एक दिन की नहीं हो सकती। पर्यावरण संरक्षण को जीवन शैली का हिस्सा बनाना होगा। प्लास्टिक का कम उपयोग, जल की बचत, अधिकाधिक पौधारोपण, ऊर्जा संरक्षण और स्वच्छता जैसे छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े परिवर्तन का आधार बन सकते हैं। जब समाज और सरकार मिलकर काम करते हैं, तब सकारात्मक परिणाम सामने आते हैं। राजस्थान में चल रहा “वन्दे गंगा जल संरक्षण जन अभियान” इसी सामूहिक शक्ति का उदाहरण है। मैंने राजस्थान विधानसभा में २७ ग्रहों और उनसे सम्बंधित वृक्षों से जुड़ी नक्षत्र वाटिका और आयुर्वेद महत्व के पौधों की हर्बल वाटिका तथा कारगिल शौर्य वाटिका विकसित करने जैसे महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत कराई है । साथ ही वन्दे गंगा जल संरक्षण जन अभियान के अन्तर्गत भी गंगा दशमी से पर्यावरण दिवस तक दो पौधे लगाने लगाने का कार्य शुरू किया है । मैंने स्वयं कल्प वृक्ष लगा इस अभियान की शुरुआत की है।

अंततः कहा जा सकता है कि विश्व पर्यावरण दिवस केवल चिंतन का अवसर नहीं, बल्कि संकल्प का पर्व है। “वन्दे गंगा जल संरक्षण जन अभियान” राजस्थान की उस दूरदर्शी सोच का प्रतीक है, जिसमें विकास और पर्यावरण संरक्षण को साथ लेकर चलने का प्रयास किया जा रहा है। यह अभियान तभी पूर्ण सफल होगा जब प्रत्येक नागरिक जल की प्रत्येक बूंद का महत्व समझे और पर्यावरण संरक्षण को अपना नैतिक दायित्व माने। प्रकृति की रक्षा ही मानवता की सबसे बड़ी सुरक्षा है, और यही संदेश हमें विश्व पर्यावरण दिवस तथा वन्दे गंगा जैसा अभियान दे रहा है।जरूरत है इसे अपनाने और आत्मसात करने की है।


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