तृतीय दिवस महामण्डलेश्वर श्री हरिओमदासजी महाराज सरस्वती विद्या मंदिर स्कूल उदाजी का गड़ा में प्रवचन देते हुए ।
उदाजी का गड़ा में चल रही राम कथा में महामण्डलेश्वर हरिओमदासजी महाराज ने कहा कि हम जानते है कि हमारे साथ गाड़ी बंगला पैसा कुछ भी साथ नहीं जाएगा । साथ जायेगे तो सिर्फ हमारे अच्छे बुरे कर्म । हम जानते है कि हमें आत्मा कल्याण के लिए क्या करना चाहिए । हम अगर अब भी नही सुधरे तो जिंदगी हम पर हंसेगी । जब किसी जीव पर परमात्मा की विशेष कृपा होती है । तब ये मानव शरीर प्राप्त होता है । अब ये हमारा कर्तव्य है कि हम इसका सदुपयोग करें दुरुपयोग नहीं । अगर हमने इसका दुरुपयोग किया तो हमे यह मौका दोबारा नहीं मिलेगा । हर व्यक्ति को प्रभु को पाने की चाह अवश्य रखनी चाहिए जब हम प्रभु को पाने की चाह रखेगे तो वो आपको अवश्य मिलेंगे ।
यह संसार बहुत अजीब है । यहां पर अच्छा करने जाओ, लोग बुराई करने लगेंगे । यदि लोगों की बुराई की चिंता करोगे तो जीवन में कुछ नहीं कर पाओगे । जब अच्छा काम करोगे तो प्रभु के नजदीक आओगे । इसके विपरीत यदि बुरा काम या बुराई करोगे तो प्रभु से दूर जाओगे । ईश्वर को पाने के लिए त्याग और भक्ति अपनानी चाहिए । ये विचार रविवार को राम कथा के दौरान कथा वाचक महामण्डलेश्वर हरिओमदासजी महाराज ने व्यक्त किए ।
राम अनंत अनंत गुनानी, जन्म कर्म अनंत नामानी। जल सीकर महि रज गनि जाहीं, रघुपति चरित न बरनि सिराहीं ।। भगवान श्री राम अनंत हैं, उनके गुण अनंत हैं, जन्म, कर्म और नाम भी अनंत हैं। जल की बूँदें और पृथ्वी के रजकण चाहे गिने जा सकते हों, पर श्री रघुनाथजी के चरित्र वर्णन करने से नहीं चूकते ।
साथ ही प्रार्वती प्रश्न, नारद मोह आदि प्रसंग सुनाए गए । आज की कथा में गौभक्त संत श्री रघुवीरदासजी महाराज का आशीर्वचन एवं सानिध्य प्राप्त हुआ । इसके साथ ही सायं 5 बजे भगवानजी को भोग एवं उसके बाद व्यासपीठ की आरती उतारी गई एवं प्रसाद वितरण किया गया ।