यूनानी चिकित्सा में "इलाज-बिल-मा" से अनेक प्रकार की बीमारियों का उपचार : डॉ लियाक़त अली मंसूरी 

( 853 बार पढ़ी गयी)
Published on : 07 Jun, 26 15:06

यूनानी चिकित्सा में "इलाज-बिल-मा" से अनेक प्रकार की बीमारियों का उपचार : डॉ लियाक़त अली मंसूरी 

  हाइड्रोथेरेपी एक ऐसा तरीका है जिसमें पूरे शरीर में कई तरह के लक्षणों का इलाज करने के लिए पानी का इस्तेमाल किया जाता है इस थैरेपी को यूनानी चिकित्सा में  "इलाज-बिल-मा" कहते हैं , इसे हाइड्रोथेरेपी , जल थैरेपी, चिकित्सावॉटर थेरेपी, एक्वेटिक थेरेपी, पूल थेरेपी या बालनियोथेरेपी भी कहते हैं। यूनानी चिकित्सा में जल चिकित्सा पानी के विभिन्न रूपों (जैसे- भाप, ठंडा या गर्म पानी) के आंतरिक और बाहरी उपयोग से रोगों के उपचार की एक प्राचीन प्राकृतिक चिकित्सा विधि है जिसमें कई कंडीशन को मैनेज करने के लिए पानी का इस्तेमाल किया जाता है। यह फिजियोथेरेपी और प्राकृतिक चिकित्सा का हिस्सा है, जिसमें गर्म पानी के टब, बाथ, या पानी के भीतर व्यायाम शामिल हैं। यह शरीर को निरोगी बनाने और प्राकृतिक संतुलन बहाल करने की एक प्रमुख यूनानी पद्धति है। इसका उद्देश्य शरीर के 'मिज़ाज' को संतुलित करना, टॉक्सिन्स बाहर निकालना और रक्त संचार में सुधार करना है। 

<br /><img src="http://www.pressnote.in/upload/537196A.jpg" style="max-width:400px; padding:5px;" align="left"><br />

जल थैरेपी में यूनानी सिद्धांत और जल का महत्व  __
                          यह थैरेपी अग्नि, जल, पृथ्वी और वायु—इन चार तत्वों (अखलात) के संतुलन पर आधारित है | शरीर में मौजूद तरलता का स्वास्थ्य से सीधा संबंध है। यह थैरेपी इन्हीं तरल पदार्थों को संतुलित करके वात, पित्त और कफ जैसे दोषों को शांत करने का कार्य करता है। यूनानी पद्धति के अनुसार इस जल चिकित्सा का प्राकृतिक उपचार का पूरा लाभ उठाने के लिए आहार, विहार (जीवनशैली) और संयम का पालन करना बेहद आवश्यक है।

 यह मुख्य रूप से दो रूपों में काम करती है__
A.पान-ए-आब (आंतरिक रूप से जल का सेवन करके )
B. हम्माम ( बाह्य स्नान , भाप स्नान, टब बाथ और ठंडी-गर्म पट्टियां करके )

A .पान-ए-आब (आंतरिक जल चिकित्सा /पेयजल _यूनानी चिकित्सा में उचित समय और सही मात्रा में पानी पीना बहुत महत्वपूर्ण माना गया है, इससे शरीर हाइड्रेटेड रहता है, यूनानी पद्धति में पानी को केवल प्यास बुझाने का साधन ही नहीं बल्कि बीमारियों के इलाज का एक महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है इसके निम्न लाभ हैं_
1. पाचन और विषहरण _ सुबह खाली पेट पानी पीना पाचन तंत्र को सक्रिय करता है। सही समय पर और सही मात्रा में पानी पीने से पाचन क्रिया बेहतर होती है और कब्ज की समस्या दूर होती हैं।
2. वजन नियंत्रण__ भोजन करने से पहले पानी पीने से पेट भरा हुआ महसूस होता है, जिससे अतिरिक्त कैलोरी लेने से बचा जा सकता हैं।

B. हम्माम (बाह्य जल चिकित्सा)_ इसमें उपचार और पारंपरिक भाप स्नान (हम्माम) आता हैं । यह यूनानी चिकित्सा का सबसे प्रसिद्ध हिस्सा एवं सबसे प्रसिद्ध जल चिकित्सा उपचार है । इसमें एक विशेष प्रकार का भापयुक्त कक्ष होता है जो शरीर से पसीने के माध्यम से हानिकारक विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है, इसके निम्न लाभ है _
1. दर्द और सूजन में राहत__गर्म पानी मांसपेशियों के दर्द , लालिमा , अकड़न और गठिया को  कम करता है । 2.  पानी के भीतर व्यायाम ( टुखोर ) __ दर्द या सूजन को कम करने के लिए गर्म पानी की सिंकाई का प्रयोग किया जाता है। यूनानी पद्धति में जल थैरेपी को 'इलाज-बिल-तदबीर' का ही एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। गर्म पानी के पूल में हिलना-डुलना या व्यायाम करने से जोड़ों में मुलायमपन और मांसपेशियां मजबूत होती हैं जिससे पुनर्वास या बेहतर गतिशीलता मिलती हैं, पानी में शरीर का कम वजन महसूस होने के कारण मूवमेंट आसान हो जाती है क्योंकि पानी का उत्प्लावन बल जोड़ों पर वजन कम करता है। यानि वॉटर एरोबिक्स या तैराकी एक बेहतरीन विकल्प है ऐसे लोगों को जिन्हें दूसरे तरह के व्यायामों से दर्द होता है । 
3. चोट या सर्जरी के बाद के चोट के निशान एवं जोड़ों की गतिशीलता को सुधारने के लिए ।
4. तापमान नियंत्रण कर रक्त संचार में वृद्धि__भाप स्नान द्वारा  शरीर में रक्त प्रवाह को बढ़ाता है। गर्म, ठंडा पानी और भाप का उपयोग करके शरीर से पसीना निकाला जाता है। यह त्वचा के छिद्रों को खोलता है, रक्त संचार बढ़ाता है । गर्म पानी मांसपेशियों को आराम देने और ठंडा पानी सूजन कम करने के लिए प्रयोग किया जाता है। गर्म और ठंडे पानी का मिश्रण रक्त प्रवाह को बढ़ाता है। ठंडे पानी का प्रयोग तंत्रिकाओं को बल देने के लिए किया जाता है । बुखार के दौरान माथे और पेट पर ठंडे पानी की पट्टी रखना ।
5. तनाव से मुक्ति__ गर्म पानी में तैरना या स्नान करना मांसपेशियों को आराम देता है और मानसिक तनाव कम करता है।
6. प्रेशराइज़्ड जेट (पैक और पानी का दबाव बना कर) __शरीर पर तेज़ दबाव वाला पानी डालना शरीर के प्रभावित अंगों पर अलग-अलग तापमान (गर्म या ठंडा) के गीले तौलिये या कपड़े लपेटकर उपचार किया जाता है। पानी का दबाव जोड़ों और ऊतकों की सूजन को कम करता है साथ ही लालिमा , त्वचा का रंग हमेशा के लिए बदल देता हैं।7.  कटि स्नान और पैरों का स्नान __ इस विधि में अंगों की समस्याओं में सुधार होता हैं जैसे शुक्राणु कम होने पर विशेष टब में ठंडा पानी भर कर उसमें बैठाया जाता है। और बवासीर होने पर विशेष टब में गर्म पानी भर कर उसमें बैठाया जाता है जिससे बवासीर मुलायम और दर्द में राहत मिलती हैं।
8. पट्टियाँ __ पानी से भीगी गर्म या ठंडी पट्टियों का प्रयोग करना ।
9. जलनेति या नतूल  __इसमें शरीर के किसी विशेष हिस्से पर विशेष औषधीय पानी या काढ़े की धार डाली जाती है जैसे पुराने ज़ुकाम में नाक में पानी की धार डालने की इस योग क्रिया को "जल नेति"  कहा जाता हैं इसमें एक विशेष लोटे (नेति पॉट) की मदद से गुनगुने नमकीन पानी को एक नाक के छिद्र से डालकर दूसरे छिद्र से बाहर निकाला जाता है।

अन्य लाभ __पीरियड्स का दर्द , ऑस्टियोआर्थराइटिस , फाइब्रोमायल्जिया , पार्किंसंस रोग , न्यूरोपैथी , एंकिलोसिंग स्पोंडिलाइटिस , मल्टीपल स्क्लेरोसिस  , सेरेब्रल पाल्सी , हाई ब्लड प्रेशर वाली प्रेग्नेंट महिलाएं रेगुलर हाइड्रोथेरेपी सेशन से प्री-एक्लेम्पसिया जैसी कॉम्प्लिकेशन्स के खतरे को कम कर सकती हैं। डिलीवरी के समय गर्म पानी में रहना चुन सकती हैं जिससे ज़्यादा आराम मिलेगा और दर्द और घबराहट कम होगी। वज़न घटाने और पूरी सेहत को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं।

हाइड्रोथेरेपी से होने वाले नुकसान __
1. हाइड्रोथेरेपी टैंक, पूल या टब से इन्फेक्शन होने का खतरा बढ़ सकता है। 
2. सर्जरी के बाद चीरे वाली जगह को गीला करने से पहले कुछ तय समय तक इंतज़ार भी करना पड़ सकता है।

सावधानियां__
1. हाइड्रोथेरेपी शुरू करने से पहले किसी योग्य यूनानी चिकित्सक से परामर्श करें । यह थेरेपी विशेषज्ञों की देखरेख में करना सबसे सुरक्षित है।2.  यदि  हृदय रोग या त्वचा संक्रमण है, जल चिकित्सा कराने से पहले, विशेष रूप से उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, या गर्भवती महिलाओं को डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए। 


साभार :


© CopyRight Pressnote.in | A Avid Web Solutions Venture.