चंडीगढ़/जयपुर। राजस्थान विधानसभाध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को पूर्ण विकसित, आत्मनिर्भर, समृद्ध और समावेशी राष्ट्र बनाने का संकल्प केवल सरकार का कार्यक्रम नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों की सामूहिक आकांक्षा और सहभागिता का महायज्ञ है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए जागरुक समाज, दूरदर्शी जनप्रतिनिधि तथा युवा शक्ति की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है।
विधानसभाध्यक्ष देवनानी मंगलवार को चंडीगढ़ स्थित हरियाणा विधान सभा में आयोजित राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (सीपीए) जोन-द्वितीय सम्मेलन में "विकसित भारत-2047 के लक्ष्यों एवं भावी चुनौतियों को साकार करने में जागरूक समाज एवं विधायकों की भूमिका विषय पर सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। देवनानी ने हरियाणा को जीवंत संस्कृति, अपूर्ण शौर्य और पुरुषार्थ की पावन धरा बताया। उन्होंने विषय को सामयिक और राष्ट्र के भविष्य का मार्ग चित्र तय करने वाला युगांतकारी संकल्प बताया।
सम्मेलन में लोकसभाध्यक्ष ओम बिरला, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष, उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना, मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष हरविंदर कल्याण सहित विभिन्न राज्यों के विधानसभा अध्यक्ष, विधायक एवं अनेक गणमान्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
*अंतिम व्यक्ति के उत्थान से ही समग्र विकास संभव:*
अपने संबोधन में देवनानी ने कहा कि विकसित भारत का अर्थ केवल आर्थिक प्रगति नहीं, बल्कि ऐसा समग्र विकास है जिसमें अंतिम व्यक्ति के उत्थान से ही समाज का समग्र विकास संभव है। सामाजिक समरसता, तकनीकी नवाचार, पर्यावरणीय संतुलन, सुशासन और लोकतांत्रिक मूल्यों की मजबूती ही विकसित भारत की वास्तविक आधारशिला है।
स्पीकर देवनानी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, तीव्र शहरीकरण, कौशल विकास और वैश्विक अस्थिरता जैसी चुनौतियों का प्रभावी समाधान जागरूक नागरिक समाज और उत्तरदायी जनप्रतिनिधियों के समन्वित प्रयासों से ही संभव है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की सफलता एक सजग नागरिक समाज पर निर्भर करती है, जो अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों के प्रति भी समान रूप से प्रतिबद्ध हो। देवनानी ने विकसित भारत अभियान को 140 करोड़ भारतीयों की सामूहिक आकांक्षाओं का पावन महायज्ञ बताया। विकसित भारत के लिये हमारे सामने जटिल चुनौतियां हैं, जिनका सभी को मिलजुल कर मुकाबला करना होगा।
*ए.आई और ई-गवर्नेस जैसे विषयों पर प्रासंगिक कानूनों की आवश्यकताः*
देवनानी ने कहा कि वर्तमान समय में विधायकों की भूमिका केवल स्थानीय समस्याओं के समाधान तक सीमित नहीं रह गई है। उन्हें नीति-निर्माता, समाज सुधारक और दूरदर्शी नेतृत्वकर्ता के रूप में कार्य करना होगा। बदलते समय की आवश्यकताओं के अनुरूप साइबर अपराध, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ई-गवर्नेस तथा पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर प्रभावी और प्रासंगिक कानूनों का निर्माण समय की आवश्यकता है।
*जनप्रतिनिधियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण:*
स्पीकर देवनानी ने कहा कि विधानसभाएं केवल कानून निर्माण की संस्थाएं नहीं हैं, बल्कि राज्यों के विकास की दिशा निर्धारित करने वाले महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक मंच हैं। जन-आकांक्षाओं के अनुरूप नीतियों का निर्माण तथा सार्वजनिक संसाधनों के पारदर्शी और जवाबदेह उपयोग को सुनिश्चित करने में जनप्रतिनिधियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
*राजस्थान में डिजिटल तकनीकों का उपयोगः*
राजस्थान विधानसभा के नवाचारों का उल्लेख करते हुए श्री देवनानी ने कहा कि विधानसभा को अधिक पारदर्शी, आधुनिक और जनोन्मुखी बनाने के लिए डिजिटल तकनीकों का व्यापक उपयोग किया गया है। विधानसभा की कार्यवाही, प्रश्नोत्तर, प्रस्ताव एवं विधायी दस्तावेजों को ऑनलाइन उपलब्ध कराकर पेपरलेस व्यवस्था को सुदृढ़ किया गया है। साथ ही जन-दर्शन कार्यक्रम, युवा संसद तथा विधायकों के क्षमता निर्माण संबंधी प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से लोकतांत्रिक संस्थाओं को जनता और युवाओं से जोड़ने के प्रभावी प्रयास किए गए हैं।
*विकसित भारत-2047 के संकल्प की सबसे महत्वपूर्ण शक्ति देश की युवा पीढ़ी:*
देवनानी ने कहा कि भारत विश्व का सबसे युवा राष्ट्र है और उसका जनसांख्यिकीय लाभांश देश की सबसे बड़ी पूंजी है। स्टार्टअप, डिजिटल अर्थव्यवस्था, अनुसंधान, नवाचार और खेल जगत में भारतीय युवाओं ने अपनी प्रतिभा का लोहा विश्वभर में मनवाया है। युवाओं को अवसर, संसाधन और अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराकर राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में उनकी भागीदारी और अधिक सशक्त बनाई जा सकती है। देवनानी ने विकसित भारत-2047 के संकल्प की सबसे महत्वपूर्ण शक्ति देश की युवा पीढ़ी को बताया है।
*जागरूक समाज की ऊर्जा, विधायकों का उत्तरदायी नेतृत्व और युवाओं का नवाचार एक साथ जुड़ेंगे, तब होगा विकसित भारतः*
विधानसभाध्यक्ष ने आवश्यकता प्रतिपादित की है कि युवाओं को आधुनिकता और तकनीकी प्रगति के साथ-साथ सांस्कृतिक जड़ों, नैतिक मूल्यों और भारतीय विरासत से भी गहराई से जुड़े रहना होगा। भारत की संस्कृति ‘वसुधैव कुटुम्बकम्' और 'सर्वे भवन्तु सुखिनः' जैसे सार्वभौमिक मूल्यों की प्रेरणा देती है. जो विकसित भारत के निर्माण की आधारशिला हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जब जागरूक समाज की ऊर्जा, विधायकों का उत्तरदायी नेतृत्व और युवाओं का नवाचार एक साथ जुड़ेंगे, तब वर्ष 2047 तक भारत को विश्वगुरु तथा पूर्ण विकसित राष्ट्र बनने से कोई नहीं रोक सकेगा।