प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार के 12 वर्ष

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Published on : 09 Jun, 26 18:06

एन जी भट्ट 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार के 12 वर्ष

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में एन डी ए शासित केंद्र सरकार ने मई 2014 से जून 2026 तक बारह वर्षों का कार्यकाल पूरा कर लिया है। एन डी ए शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री बुधवार को देश की राजधानी नई दिल्ली में जुट रहे है जहाँ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व के इस ऐतिहासिक पल पर उनका सम्मान किया जाएगा। इंडिया ब्लॉक के नेताओं की सामूहिक बैठक के दो दिनों बाद ही आयोजित हो रही उस बैठक के अपने राजनीतिक मायने और संकेत है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार के 12 वर्ष की यह अवधि भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में देखी जा रही है। इन बारह वर्षों में भारत ने आर्थिक, सामाजिक, कूटनीतिक और तकनीकी क्षेत्रों में अनेक परिवर्तन देखे हैं। साथ ही इस दौर में सरकार की नीतियों और निर्णयों को लेकर व्यापक बहस भी हुई है। इसलिए मोदी सरकार के बारह वर्षों का मूल्यांकन उपलब्धियों और चुनौतियों दोनों के संदर्भ में किया जाना चाहिए।

2014 में भाजपा को पूर्ण बहुमत मिलने के बाद नरेंद्र मोदी ने एक मजबूत और निर्णायक नेतृत्व की छवि स्थापित की। 2019 और 2024 के आम चुनावों में भी भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन को जनादेश प्राप्त हुआ। इससे केंद्र में राजनीतिक स्थिरता बनी रही, जो किसी भी देश के दीर्घकालिक विकास के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। मोदी ने स्वयं को एक ऐसे नेता के रूप में स्थापित किया, जो सीधे जनता से संवाद करता है और राष्ट्रीय मुद्दों पर स्पष्ट रुख अपनाता है। उनकी लोकप्रियता ने भाजपा को देश के अनेक राज्यों में विस्तार करने में मदद की। मोदी सरकार की प्रमुख उपलब्धियों में आधारभूत ढांचे का विस्तार, डिजिटल अर्थव्यवस्था का विकास और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देना शामिल है। जनधन योजना, डिजिटल भुगतान व्यवस्था, यूपीआई, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) तथा स्टार्टअप और नवाचार को प्रोत्साहन देने वाली योजनाओं ने प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने का प्रयास किया। भारत दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हुआ और वैश्विक स्तर पर उसकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई। सड़क, रेलवे, बंदरगाह और हवाई अड्डों के निर्माण में उल्लेखनीय निवेश किया गया। उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाओं के माध्यम से विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया।

हालांकि बेरोजगारी, महंगाई और ग्रामीण आय जैसे मुद्दों पर सरकार को आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा। विपक्ष का तर्क रहा कि आर्थिक विकास के लाभ समाज के सभी वर्गों तक समान रूप से नहीं पहुंच पाए हैं।मोदी सरकार ने गरीब और वंचित वर्गों के लिए अनेक योजनाएँ शुरू कीं। उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन, प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से आवास, स्वच्छ भारत अभियान के तहत शौचालय निर्माण तथा आयुष्मान भारत जैसी स्वास्थ्य योजनाओं ने करोड़ों लोगों को प्रभावित किया।

सरकार का दावा है कि इन योजनाओं ने जीवन स्तर सुधारने और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। दूसरी ओर आलोचक इन योजनाओं के क्रियान्वयन, लाभार्थियों की वास्तविक स्थिति और रोजगार सृजन से जुड़े सवाल उठाते रहे हैं।

 

मोदी सरकार के बारह वर्षों में भारत की विदेश नीति अधिक सक्रिय दिखाई दी। भारत ने अमेरिका, यूरोप, खाड़ी देशों और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के देशों के साथ संबंधों को मजबूत किया। जी-20 की अध्यक्षता और वैश्विक मंचों पर भारत की बढ़ती भूमिका को इस दौर की महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जाता है। भारत ने स्वयं को वैश्विक दक्षिण की आवाज के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया। कोविड-19 महामारी के दौरान वैक्सीन मैत्री कार्यक्रम और आपदा राहत सहयोग ने भी भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि को मजबूती दी।

राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में सरकार ने सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट एयर स्ट्राइक तथा जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने जैसे निर्णयों को अपनी प्रमुख उपलब्धियों के रूप में प्रस्तुत किया। नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए), तीन तलाक कानून और समान नागरिक संहिता पर चल रही बहस जैसे मुद्दों ने भी राष्ट्रीय राजनीति को प्रभावित किया।

समर्थकों के अनुसार ये निर्णय राष्ट्रीय एकता और सुरक्षा को मजबूत करने वाले कदम थे, जबकि आलोचकों ने इन्हें संवैधानिक और सामाजिक दृष्टि से विवादास्पद बताया।

बारह वर्षों के दौरान सरकार को कई कठिन चुनौतियों का सामना भी करना पड़ा। कोविड-19 महामारी, वैश्विक आर्थिक अस्थिरता, बेरोजगारी, कृषि संकट और सामाजिक ध्रुवीकरण जैसे विषय लगातार चर्चा में रहे। कृषि कानूनों के खिलाफ हुए किसान आंदोलन और बाद में उन कानूनों की वापसी ने यह भी दिखाया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार को जनमत के दबाव का सामना करना पड़ सकता है।विपक्ष और कुछ नागरिक संगठनों ने संस्थाओं की स्वायत्तता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक विमर्श को लेकर भी चिंताएँ व्यक्त की हैं।

इस प्रकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारह वर्ष भारतीय राजनीति के सबसे प्रभावशाली और परिवर्तनकारी दौरों में गिने जाएंगे। इस अवधि में भारत ने डिजिटल क्रांति, आधारभूत संरचना के विस्तार, सामाजिक कल्याण योजनाओं और वैश्विक प्रतिष्ठा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। वहीं बेरोजगारी, सामाजिक समरसता, कृषि और आर्थिक असमानता जैसी चुनौतियाँ अभी भी नीति-निर्माताओं के सामने मौजूद हैं।निष्पक्ष रूप से कहा जाए तो मोदी युग का मूल्यांकन केवल राजनीतिक लोकप्रियता या आलोचना के आधार पर नहीं, बल्कि इस बात से होगा कि इन बारह वर्षों में शुरू किए गए परिवर्तन भारत के दीर्घकालिक विकास, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कितना मजबूत बना पाए हैं।

 


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