उदयपुर, डबोक स्थित शाश्वत धाम में श्री कुन्दकुन्द कहान वीतराग विज्ञान शिक्षण समिति उदयपुर द्वारा आयोजित सात दिवसीय आवासीय जैन एज्यूकेशनल कैम्प के दौरान देश के प्रख्यात चिंतक, अंतरराष्ट्रीय मोटिवेशनल स्पीकर, लेखक एवं आध्यात्मिक मार्गदर्शक डॉ. एस.पी. भारिल्ल को जैन समाज के सर्वाेच्च सम्मान “जैन रत्न सम्मान” से अलंकृत किया गया। इस अवसर पर सकल जैन समाज एवं विभिन्न सामाजिक-धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने उनका भव्य अभिनंदन किया।
शिक्षण समिति के निदेशक, शाश्वत धाम के मंत्री एवं राजस्थान गौरव डॉ. जिनेन्द्र शास्त्री ने बताया कि जयपुर निवासी डॉ. एस.पी. भारिल्ल ने जैन दर्शन, आत्मजागरण, व्यक्तित्व विकास एवं जीवन मूल्यों के प्रचार-प्रसार में उल्लेखनीय योगदान दिया है। उनके इसी उत्कृष्ट कार्य को सम्मानित करते हुए उन्हें जैन समाज के सर्वाेच्च सम्मान से नवाजा गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ श्रीमती अर्पिता जैन के मंगलाचरण से हुआ। समिति अध्यक्ष अभय बंडी ने शब्दों अतिथियों का स्वागत किया। समारोह की अध्यक्षता सकल दिगम्बर जैन समाज उदयपुर के अध्यक्ष शांतिलाल जैन,वेलावत ने की, जबकि मुख्य अतिथि शाश्वत धाम के अध्यक्ष ललित जैन,कीकावत रहे। विशिष्ट अतिथि शाश्वत धाम के ट्रस्टी चांदमल कीकावत ,दिगम्बर जैन बीसा नरसिंहपुरा तेरापंथ आम्नाय के अध्यक्ष योगेश अखावत, सकल नरसिंहपुरा समाज के महामंत्री अनिल मेहता, श्री दिगम्बर दशा नरसिंहपुरा मुमुक्षु समाज भीण्डर के महामंत्री सुरजमल फान्दोत, दिगम्बर जैन आदिनाथ चेरिटेबल ट्रस्ट सेक्टर-11 के अध्यक्ष पारस चित्तौड़ा, श्री दशा हूमड़ समाज के अध्यक्ष रमेश शाह, चन्द्रवीर सेवा संस्थान के अध्यक्ष सुन्दरलाल डागरिया, दशा नरसिंहपुरा तेरापंथ समाज के अध्यक्ष शेखर जेतावत,चित्तौड़ा समाज के अध्यक्ष सुरेश पदमावत, दशा हूमड़ समाज के अध्यक्ष देवेन्द्र छाप्या, समाजसेवी डॉ.श्याम एस.सिंघवी,पं.राजकुमार जैनदर्शनाचार्य एवं ओसवाल समाज के महामंत्री आलोक पगारिया सहित विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के माला,तिलक,उपरणा ,शाल ,रजत श्रीफल व प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया ,
डॉ एस.पी भारिल्ल का जीवन परिचय का वाचन समिति के संयोजक पं.ऋषभ शास्त्री ने किया वही प्रशस्ति पत्र का वाचन शिविर प्रभारी डॉ तपीश शास्त्री ने किया
श्री कुन्दकुन्द वीतराग विज्ञान शिक्षण समिति के महामंत्री राजमल जैन ने समिति का उपलब्धियों पर प्रकाश डाला प्रस्तुत किया।
समिति के संयोजक पं. ऋषभ शास्त्री ने डॉ. भारिल्ल का परिचय प्रस्तुत करते हुए कहा कि वे पिछले कई दशकों से देश-विदेश में हजारों प्रेरक व्याख्यान देकर युवाओं, विद्यार्थियों, शिक्षकों, उद्यमियों एवं समाज के विभिन्न वर्गों को सकारात्मक जीवन जीने की प्रेरणा दे रहे हैं। उन्होंने जैन दर्शन और आध्यात्मिक चिंतन को सरल भाषा में आमजन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य किया है।
डॉ. भारिल्ल के व्याख्यान आत्मअनुशासन, सकारात्मक सोच, समय प्रबंधन, आत्मकल्याण एवं जीवन के वास्तविक उद्देश्य पर केंद्रित रहते हैं। समाज, शिक्षा एवं अध्यात्म के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हो चुके हैं, जिनमें प्रतिष्ठित इंदिरा गांधी प्रियदर्शिनी अवार्ड भी शामिल है।
शिविर प्रभारी डॉ. तपीश शास्त्री ने प्रशस्ति पत्र का वाचन किया, जबकि समिति के महामंत्री राजमल जैन ने संस्था की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन डॉ. महावीर प्रसाद शास्त्री ने किया तथा अंत में प्रचार मंत्री डॉ. निलेश शास्त्री ने आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर उपस्थित समाजजनों ने डॉ. एस.पी. भारिल्ल को जैन समाज की गौरवशाली परंपरा का प्रेरणास्रोत बताते हुए उनके दीर्घायु एवं निरंतर समाजसेवा की कामना की।
इस अवसर पर राकेश दलावत,निर्मल अखावत, मनोहर भोरावत,डॉ तपीश शास्त्री,पं गजेंद्र शास्त्री,नृपेंद्र जैन,डॉ निलेश शास्त्री,राकेश दलावत,श्रीमती मंजू जैन,श्रीमती समता जैन,डॉ सीमा जैन,डॉ पायल जैन,परिणति जैन आदि मौजूद थे।