पुरुषोत्तम मास में भक्ति ही जीवन का सच्चा आधार, भगवान से जुड़कर ही आत्मा का कल्याण संभवःगुरुदेव

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Published on : 11 Jun, 26 15:06

श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की दिव्य झांकी से भक्तिरस में सराबोर हुआ कथा पंडाल, “मैं भगवान का हूँ, भगवान मेरे हैं” का संदेश गूंजा

पुरुषोत्तम मास में भक्ति ही जीवन का सच्चा आधार, भगवान से जुड़कर ही आत्मा का कल्याण संभवःगुरुदेव


उदयपुर। श्री तैलिक साहू समाज पंच महासभा (छः बैठक) उदयपुर द्वारा माहेश्वरी सेवा सदन में पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के अवतार जन्मोत्सव का उल्लासपूर्ण आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने भजन, कीर्तन और जयघोष के साथ प्रभु के प्राकट्य उत्सव को बड़े हर्षाेल्लास से मनाया। सुसज्जित कथा पंडाल में भक्तों की उमड़ी आस्था ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
अपने प्रेरक प्रवचनों में पूज्य गुरुदेव अनन्तराम शास्त्री ने कहा कि “मैं भगवान का हूँ, भगवान मेरे हैं” की भावना ही सच्ची भक्ति का मूल मंत्र है। जब जीव स्वयं को भगवान के चरणों में समर्पित कर देता है, तब उसके जीवन की सभी चिंताएं समाप्त हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि संसार में धन, वैभव और संबंध क्षणभंगुर हैं, लेकिन भगवान का नाम और भक्ति ही आत्मा के साथ रहने वाली वास्तविक संपत्ति है।
गुरुदेव ने पुरुषोत्तम मास की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि यह माह भगवान की विशेष  कृपा प्राप्त करने का अवसर है। इस पावन काल में किए गए व्रत, उपवास, जप, तप, दान और धर्म के कार्यों का अनंत पुण्य फल प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि गृहस्थ जीवन में व्यस्त रहने वाला व्यक्ति भी यदि प्रतिदिन श्रद्धा से भगवान के नाम की एक माला का जाप कर ले, तो उसका जीवन सफल और आत्मा का कल्याण सुनिश्चित हो सकता है।
प्रवचन के दौरान गुरुदेव ने भगवान ऋषभदेव, महाराज भरत और शालिग्राम भगवान की महिमा का वर्णन करते हुए बताया कि भारतवर्ष का नाम महाराज भरत के नाम पर पड़ा। उन्होंने कहा कि जीव को मोह-माया और सांसारिक आसक्तियों से ऊपर उठकर प्रभु भक्ति, सेवा और परोपकार का मार्ग अपनाना चाहिए। मृत्यु के बाद केवल धर्म और सत्कर्म ही जीव के साथ जाते हैं, इसलिए जीवन में दान-पुण्य करते रहना चाहिए।
समाज अध्यक्ष एडवोकेट हेमेन्द्र पण्डियार ने बताया कि समाज की सभी छह बैठकों के अध्यक्षों एवं कार्यकारिणी सदस्यों द्वारा गुरुदेव का भावभीना स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। समाज के महामंत्री कन्हैयालाल नैनावा ने बताया कि एकादशी पर्व के अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद वितरण किया गया तथा भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में कथा पंडाल को आकर्षक सजावट और गुब्बारों से सजाया गया।
कथा श्रवण करने पहुंचे श्रद्धालु, माताएं एवं बहनें भक्ति गीतों पर झूमते हुए प्रभु की भक्ति में लीन नजर आए। पूरा पंडाल “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” और अन्य भक्ति जयघोषों से गुंजायमान रहा।
कार्यक्रम संयोजक चन्द्रशेखर दशोरा ने 16 जून को आयोजित होने वाले पुरुषोत्तम मास के भव्य धार्मिक आयोजन की रूपरेखा प्रस्तुत की, जबकि कोषाध्यक्ष भरत पचलोड़िया ने विभिन्न समाजों से आयें पदाधिकारियों एवं अतिथियों का स्वागत कर आभार व्यक्त किया।
कथा में गुरुदेव ने संदेश दिया कि कलियुग में भगवान का नाम-स्मरण, सत्संग और भक्ति ही जीवन को शांति, आनंद और मोक्ष की दिशा प्रदान करने वाला सबसे सरल एवं प्रभावी मार्ग है।


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