अहंकार मनुष्य को ले डूबता है -महामण्डलेश्वर हरिओमदास महाराज

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Published on : 11 Jun, 26 19:06

अष्ट्म दिवस श्रीराम कथा सरस्वती विद्या मंदिर स्कूल उदाजी का गड़ा

अहंकार मनुष्य को ले डूबता है -महामण्डलेश्वर हरिओमदास महाराज

सरस्वती विद्या मंदिर स्कूल उदाजी का गड़ा में चल रही श्री राम कथा के अष्ट्म दिन महामण्डलेश्वर श्रीमहंत श्री हरिओमदासजी महाराज ने प्रवचनों की अमृतवर्षा की । कथा के दौरान महाराजश्री ने कहा अहंकार मनुष्य को ले डूबता है । रावण के अंहकार के कारण रावण के पूरे परिवार का सर्वनाश हो गया ।
अभिमान नहीं, कर्म की करो पूजा
किस्मत से कर्म नहीं कर्म से किस्मत बदल जाती है । मनुष्य के सुख और दुख का कारण उसके कर्म है । इसलिए इंसान को सबसे पहले अपने कर्म की पूजा करनी चाहिए । उक्त भक्तिपूर्ण विचार सरस्वती विद्या मंदिर स्कूल, उदाजी का गड़ा में चलु रही श्रीराम कथा के व्यासपीठ पर बैठे महामण्डलेश्वर श्रीमहंत श्री हरिओमदासजी महाराज ने आठवें दिन उपस्थित भक्तों को मनुष्य कर्मों पर प्रकाश डालते हुए व्यक्त किए । मानव को सत्य का ज्ञान हो, जीव सत्य का मार्ग अपनाये, जो व्यक्ति अंधकार से प्रकाश की और आये, हिंसा छोड़ अहिंसा का रास्ता अपनाये, पाप से पुण्य की ओर अग्रसर हो यह परम लक्ष्य श्रीराम कथा का है । मानव योनी में जन्म लेने मात्र से जीवन को मानवता प्राप्त नहीं होती । यदि मनुष्य योनी में जन्म लेने के बाद भी उसमें स्वार्थ की भावना भरी हुई है, तो वह मानव होते हुए भी राक्षसी वृत्ति की पायदान पर खड़ा रहता है । यदि व्यक्ति स्वार्थ की भावना को त्याग कर हमेशा परमार्थ भाव से जीवन यापन करे तो निक्षित रूप् से यह एक अच्छा इंसान है ।
इष्ट देव का वंदन जरुरी - महामण्डलेश्वर हरिओमदास महाराज
श्रीराम कथा के अष्ट्म दिवस में महाराजश्री ने कथा के बीच-बीच में उपस्थित श्रद्धालुओं को जीवन दर्शन की बातें भी बताई । इसमें उन्होंने भक्ति के विषय में विस्तार से वर्णन किया । उन्होंने सभी को अपना एक ईष्ट देव चुनने की सलाह दी । कहा कि हम चाहे किसी भी मंदिर में जाएं या किसी भी देवता का पूजन करें लेकिन अपना एक ईष्ट देव जरुर चुनें । अन्य देवताओं से भी अपने ईष्ट देव के प्रति श्रद्धा रखने का ही वरदान मांगे । तुलसीदासजी ने भी गणेश वंदन कर भगवान राम की प्राप्ति का वर मांगा था । आत्मा का रिश्ता परमात्मा से रखो । भावविभोर होकर भगवान को अपना लो । बाकी रिश्तें सब बेकार है ।
हमें अपने बच्चों को संस्कार और अच्छी शिक्षा अवश्य देना चाहिए । बच्चे शिक्षा तो प्राप्त कर रहे हैं, लेकिन संस्कार भूल रहे हैं । संस्कारवान नई पीढ़ी ही अपने जीवन को सफल और सार्थक कर सकती है । लोक कल्याण ही परम धर्म है । इससे जीवन आनंदित होता है । सभी को आनंदित करना ही सच्चा धर्म है ।  
मांस खाने से नहीं मिल पाती भगवान की कृपा- महामण्डलेश्वर हरिओमदास महाराज
भजन करना है तो भोजन करना सीखना जरुरी है, क्योंकि भोजन का सीधा फर्क मनुष्य की सोच पर पड़ता है । लोग जैसा भोजन करते हैं उनकी सोच वैसी ही  हो जाती है, अगर कोई दूषित भोजन करता है तो उसके मन में धार्मिक ख्याल आना काफी मुश्किल होता है । मांस खाने से भगवान की कृपा से वंचित हो जाते हैं । यह बात राम कथा के आंठवे दिन कथावाचक महामण्डलेश्वर हरिओमदासजी महाराज ने कही । भजन तभी होता है जब भोजन ठीक होता है । लोग धीरे-धीेरे सादे भोजन के महत्व को भूलते जा रहे हैं, वे फास्ट फूड और पश्चिमी जीवन शैली को ही अपने जीवन में उतार चुके हैं । ऐसी स्थिति में वे न चाह कर भी भगवान से दूर होते जा रहे हैं । साधना करने से भगवान की कृपा होना जरुरी होता है और जब हम जीवन हत्या करके उनका मांस खाते हैं तो हमारा मन तो दूषित होता ही है । साथ ही भगवान की कृपा भी नहीं मिल पाती ।

श्रीराम कथा की पूर्णाहूति शुक्रवार को
सरस्वती विद्या मंदिर स्कूल उदाजी का गड़ा में श्रीराम कथा की पुर्णाहुति महायज्ञ शनिवार को प्रातः 9 बजे से महायज्ञ प्रारंभ होगा ।
आज की कथा में राधे-राधे बाबा श्रीमहंत मनमोहनदासजी महाराज इंदौर का आशीर्वचन व सानिध्य प्राप्त हुआ । इसके साथ ही सायं 5 बजे भगवानजी को भोग एवं उसके बाद व्यासपीठ की आरती उतारी गई एवं प्रसाद वितरण किया गया ।


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