क्यों इतना इतराए रे ओ माटी के पुतले...

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Published on : 12 Jun, 26 19:06

क्यों इतना इतराए रे ओ माटी के पुतले...

महामण्डलेश्वर श्रीमहंत श्री हरिओमदासजी महाराज के श्रीमुख से सरस्वती विद्या मंदिर उदाजी का गड़ा में चल रही श्रीराम कथा का शुक्रवार को विश्राम हो गया ।  कथा के आखिरी दिन महाराजश्री ने अपनी मधुर आवाज में कई भजन सुनाएं जिन्हें सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए थे । विदाई की वेला में राम कथा वाचक के संग श्रद्धालु श्रोता भी भावुक हो गए थे । महाराजश्री ने कथा का समापन इस भजन से किया .... क्यों इतना इतराए रे ओ माटी के पुतले..... । उन्होने कहा कि भौतिकवादी समय में सभी लोग धर्म को झुठला देना चाहते हैं । माया की आंधी में सभी बहे जा रहे हैं ।
सरस्वती विद्या मंदिर महाविद्यालय में यज्ञ पूर्णाहुति से सम्पन्न श्री राम कथा महोत्सव
सरस्वती विद्या मंदिर महाविद्यालय में नौ दिनों से चली आ रही श्री राम कथा शुक्रवार को सायं यज्ञ पूर्णाहुति के साथ सम्पन्न हो गई।
महाविद्यालय परिसर में वैदिक ऋचाओं और पौराणिक मंत्रों के साथ लालीवाव पीठाधीश्वर महंत हरिओमशरणदास महाराज के सान्निध्य तथा कर्मकाण्डी पं. समरत मेहता एवं टीम के आचार्यत्व में भागवत यज्ञ हुआ। इसमें विद्यालय परिवार एवं भक्तों द्वारा श्रीफल से पूर्णाहुति अर्पित की। इस दौरान व्यासपीठ का पूजन किया।
महाराज श्री ने रावण वध विभीषण को राजतिलक और भगवान राम के अयोध्या आगमन और सीता की अग्नि परीक्षा तक के प्रसंग का वर्णन कथा के माध्यम से किया । आखिरी दिन श्रद्धालुओं की अपार भीड़ रही । महाराज श्री द्वारा कथा के बीच में गाए गए भजन पर श्रद्धालु झूमते नज़्ार आए ।
राम कथा में उमड़ा श्रद्धा का ज्वार
सरस्वती विद्या मंदिर महाविद्यालय उदाजी का गढ़ा में श्रीराम कथा की पूर्णाहुति के अवसर पर श्रद्धालुओं का ज्वार उमड़ आया और विभिन्न कथाओं को सुनते हुए श्रद्धालु कई-कई बार कीर्तनों पर झूम उठे।
कथा के समापन पर भक्तों ने व्यासपीठ से कथावाचन कर रहे लालीवाव पीठाधीश्वर महंत हरिओमशरणदास महाराज का साफा बांध कर तथा श्रीफल एवं भेंट अर्पित कर सम्मान किया और आशीर्वाद प्राप्त किया।
अपने उद्बोधन में कहा कि संसार भर में भारतभूमि सर्वश्रेष्ठ है। यह धर्म भूमि, कर्मभूमि है जहाँ ऋषि-मुनियों ने जन्म लेकर अपनी तपस्या, सद्कर्मों, जन एवं ईश्वर स्मरण कर मोक्ष प्राप्त किया। इसी भूमि पर अवतरण के लिए देवता भी लालालित रहते हैं ।
मनुष्य जीवन का उद्देश्य भगवान के चरणों की प्राप्ति - महामण्डलेश्वर हरिओमदासजी महाराज
सरस्वती विद्या मंदिर स्कूल उदाजी का गड़ा में श्री राम कथा महोत्सव के तहत श्री राम कथा में भागवत प्रवक्ता महामण्डलेश्वर हरिओमदासजी महाराज ने कहा कि मनुष्य जीवन का उद्देश्य भगवान के चरणों की प्राप्ति है । भगवान के चरणों तक उनकी भक्ति के माध्यम से ही पहुंचा जा सकता है । कहा कि इस भक्ति की अलख हृदय में तब जगती है जब उन्हें कान्हा से प्रेम हो जाए । कान्हा से प्रेम उनकी लीलाओं की कथा के श्रवण से होता है । श्री राम भगवान की अद्भुत लीलाओं का सार है । कहा कि पापी इस कथा को नहीं सुन सकता । जिन पर घट-घट में बसने वाले भगवान की कृपा होती है । वहीं इस कथा को सुन पाते है । कहा कि जब हम स्वार्थी दुनिया से अलग भगवान से अलग रिश्ता बना लेते हैं तो वह हर संकट में उनके साथ खड़े होते है । जीव को भगवान से प्रेम इस तरह करना चाहिए जेसा कि एक अबोध बालक अपनी माता से प्रेम करता है । उनका निःस्वार्थ प्रेम उन्हे परमात्मा के समीप ले जाता है ।  इस के साथ कथा को यहीं विश्राम दिया गया ।


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