संजय कॉलोनी में श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव 

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Published on : 15 Jun, 26 12:06

संजय कॉलोनी में श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव 

ध्रुव चरित्र, कपिल ज्ञान एवं शिव-पार्वती विवाह प्रसंग का हुआ भावपूर्ण वर्णन

भगवत भक्ति, ज्ञान, तपस्या एवं आदर्श दाम्पत्य जीवन का संदेश देती है कथा - आचार्य शक्ति देव जी महाराज

शिव पार्वती की झांकी बनी आकर्षण का केंद्र 

भीलवाड़ा । संजय कॉलोनी स्थित श्री चारभुजा मंदिर में श्री चारभुजा मंदिर सेवा समिति एवं महिला मंडल के तत्वावधान में आयोजित 26 वें पाटोत्सव महोत्सव के अंतर्गत चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस पर कथा व्यास आचार्य श्री शक्ति देव जी महाराज ने ध्रुव चरित्र, कपिल मुनि के ज्ञान, सती चरित्र एवं शिव-पार्वती विवाह प्रसंग का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन कर श्रद्धालुओं को भक्ति एवं अध्यात्म के अमृत रस से सराबोर कर दिया।
   कथा के दौरान आचार्य श्री ने ध्रुव चरित्र का वर्णन करते हुए बताया कि भगवान श्रीहरि की प्राप्ति के बाद ध्रुव का जीवन दिव्य एवं आदर्श बन गया। उनकी विमाता सुरुचि ने भी उन्हें सम्मानपूर्वक प्रणाम किया। बाद में उनके भाई उत्तम की मृत्यु हो गई, किन्तु ध्रुव ने धर्म, भक्ति और क्षमा का मार्ग नहीं छोड़ा। उन्होंने कहा कि गुरु और भगवान की कृपा से मृत्यु जैसे भय पर भी विजय प्राप्त की जा सकती है। ध्रुव की अटूट भक्ति और दृढ़ संकल्प के कारण आज भी वे ध्रुव तारे के रूप में आकाश में विद्यमान हैं।
इसके पश्चात आचार्य श्री ने स्वयंभूव मनु की पुत्रियों आकूति, देवहूति एवं प्रसूति का प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि देवहूति का विवाह महर्षि कर्दम से हुआ था। चारों आश्रमों का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि गृहस्थ आश्रम सबसे अधिक उत्तरदायित्वपूर्ण माना गया है, क्योंकि इसमें त्याग, संयम, सेवा और कर्तव्य का विशेष महत्व होता है।
आचार्य श्री ने बताया कि विवाह के पश्चात महर्षि कर्दम तपस्या में लीन हो गए। देवहूति ने पति सेवा में स्वयं को इतना समर्पित कर दिया कि उन्होंने अपने स्वास्थ्य की भी चिंता नहीं की। उनकी निष्ठा से प्रसन्न होकर महर्षि कर्दम ने योगबल से दिव्य विमान की रचना की तथा उन्हें सुख-सुविधाएं प्रदान कीं। बाद में उनके यहां नौ कन्याओं एवं भगवान विष्णु के अंशावतार कपिल मुनि का जन्म हुआ।
कपिल मुनि के ज्ञानोपदेश का वर्णन करते हुए आचार्य श्री ने कहा कि संसार के भोगों से कभी स्थायी तृप्ति प्राप्त नहीं होती। वास्तविक सुख और संतोष केवल ईश्वर भक्ति एवं आत्मज्ञान से ही प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि यदि मन रूपी वस्त्र संसार की माया से मलिन हो जाए तो उसे ज्ञान रूपी साबुन से स्वच्छ किया जा सकता है। इस अवसर पर उन्होंने भजन की पंक्तियां सुनाकर श्रद्धालुओं को आत्मचिंतन एवं सदाचार का संदेश दिया।
कथा के अगले क्रम में दक्ष प्रजापति और माता सती के प्रसंग का वर्णन करते हुए आचार्य श्री ने बताया कि दक्ष ने अपने यज्ञ में भगवान शिव का अपमान किया। भगवान शिव के समझाने के बावजूद माता सती यज्ञ में पहुंचीं, जहां उन्हें उपेक्षा और अपमान का सामना करना पड़ा। अपने आराध्य भगवान शिव की निंदा सहन न कर पाने के कारण माता सती ने योगाग्नि द्वारा देह त्याग कर दिया। इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने अहंकार के दुष्परिणाम एवं सम्मान के महत्व को स्पष्ट किया।
इसके बाद राजा हिमाचल और मैना के यहां माता पार्वती के अवतरण तथा भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने हेतु उनकी कठोर तपस्या का वर्णन किया गया। आचार्य श्री ने कहा कि माता पार्वती का जीवन दृढ़ संकल्प, तप, त्याग और समर्पण का अनुपम उदाहरण है।
शिव-पार्वती विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि भगवान शिव की बारात अत्यंत अलौकिक थी, जिसमें देवताओं के साथ भूत-प्रेत, गण, योगी एवं सिद्धजन भी सम्मिलित थे। कथा पांडाल में शिव-पार्वती विवाह की आकर्षक झांकी सजाई गई। महिलाओं ने भगवान शिव एवं माता पार्वती का विधिवत पूजन-अर्चन किया तथा श्रद्धाभाव से भजन प्रस्तुत किए। "सज रहे हैं भोले बाबा बरात में..." भजन पर पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।  भगवान शिव एवं माता पार्वती के रूप में आशीष  एवं पूजा गन्दोडिया ने अभिनय किया।
  आचार्य श्री ने कहा कि शिव-पार्वती विवाह केवल एक वैवाहिक प्रसंग नहीं, बल्कि शिव और शक्ति, चेतना और ऊर्जा तथा पुरुष और प्रकृति के दिव्य मिलन का प्रतीक है। यह प्रसंग त्याग, विश्वास, धैर्य, तपस्या और समर्पण का संदेश देता है तथा आदर्श दाम्पत्य जीवन की प्रेरणा प्रदान करता है।
कथा के दौरान श्रद्धालु भजनों एवं संकीर्तन में भाव-विभोर होकर झूम उठे। "हर-हर महादेव" और "बोल बम" के जयघोषों से पूरा कथा पांडाल गुंजायमान हो गया। बड़ी संख्या में महिला-पुरुष, युवा एवं बच्चों ने कथा श्रवण कर आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति की।
अंत में  महाआरती उतारी गई जिसका लाभ चारभुजा महिला मंडल और सुरेश कुमार खंडेलवाल परिवार ने लिया ।
  कथा के दौरान निवर्तमान पार्षदा श्रीमती सुशीला जैन एवं पार्षद प्रतिनिधि राजेंद्र जैन का सम्मान किया गया

   समिति के अध्यक्ष जगदीश देवपुरा एवं मंत्री अरविन्द जैन ने बताया पाटोत्सव कार्यक्रम की सफलता में  कमलेश ओझा, गणेश प्रजापत, प्रहलाद त्रिपाठी, महेश खंडेलवाल, ओम गन्दोडिया  दिनेश पीला, प्रकाश देवपुरा, पंकज खारीवाल, राकेश कुकड़ा, गोपाल तोषनीवाल, गोविंद गंदोडिया,  हस्तीमल तातेड , महेश सोमानी, अर्पित जैन, लोकेश टॉक, श्याम शर्मा, नरेंद्र तातेड, शांतिलाल बाबेल, लादू लाल पारीक, पवन रूणवाल, संजय सुराणा, राजेश अजमेरा, रामस्वरूप सनाढय,रतन खारीवाल, प्रदीप बाफना, राजकुमार सोमानी, विनोद अजमेरा, अजीत झामड़ , बंशी लाल शर्मा, महेश लड्ढा, दिनेश जैन, हरि बिरला, शुभम मूंदड़ा, अंकित सोडाणी, मदन गट्टानी रामराय गट्टानी, दिनेश मालीवाल, विनोद कोगटा, रामनिवास डाड, देवकी नन्दन पालीवाल आशीष गन्दोडिया, विकास  धूपिया, मनोज पीला,   रमेश काबरा, सत्य नारायण टेलर एवं उमा शंकर चतुर्वेदी पूरे श्रद्धा भाव से जुटे हुए है । कथा उपरांत श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया गया।

समिति के मंत्री अरविन्द जैन ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए सभी श्रद्धालुओं का स्वागत एवं आभार व्यक्त कर अधिक से अधिक संख्या में भागवत रसपान करने का आग्रह किया है।


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