21 जून को निकलेगी श्री कल्याण पदयात्रा, राष्ट्रधर्म और शौर्य की परंपरा से जुड़ेंगे श्रद्धालु-  प्रो. वैद्य महेश दीक्षित

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Published on : 17 Jun, 26 19:06

21 जून को निकलेगी श्री कल्याण पदयात्रा, राष्ट्रधर्म और शौर्य की परंपरा से जुड़ेंगे श्रद्धालु-  प्रो. वैद्य महेश दीक्षित

निम्बाहेड़ा । वीर शिरोमणि लोकदेवता श्री कल्लाजी राठौड़ की स्मृति में आगामी 21 जून को कल्याण नगरी निम्बाहेड़ा से चित्तौड़गढ़ दुर्ग तक पदयात्रा निकाली जाएगी। श्री कल्लाजी वेद पीठ, निम्बाहेड़ा के तत्वावधान में आयोजित होने वाली यह पदयात्रा पिछले दो दशकों से अधिक समय से निरंतर आयोजित की जा रही है। आयोजन का उद्देश्य युवा पीढ़ी को राष्ट्रधर्म, शौर्य, त्याग और भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना है। श्रीकल्लाजी वैदिक विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वैद्य महेश दीक्षित ने बताया कि वीर कल्लाजी राठौड़ मेवाड़ की गौरवशाली परंपरा के ऐसे लोकनायक हैं, जिन्होंने मातृभूमि, धर्म और स्वाभिमान की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया। लोक परंपराओं में वर्णित है कि चित्तौड़गढ़ के युद्ध के दौरान वीर जयमल राठौड़ के घायल होने पर कल्लाजी ने उन्हें अपने कंधों पर बैठाकर युद्ध जारी रखा था। यही कारण है कि आज भी राजस्थान, गुजरात और मध्यप्रदेश के अनेक क्षेत्रों में उन्हें लोकदेवता के रूप में श्रद्धापूर्वक पूजा जाता है। उन्होंने बताया कि पदयात्रा का समापन ऐतिहासिक चित्तौड़गढ़ दुर्ग पर होगा। यह दुर्ग भारतीय स्वाभिमान, त्याग और बलिदान का प्रतीक माना जाता है तथा इसकी प्राचीरें आज भी वीरता और राष्ट्रभक्ति की अमर गाथाओं की साक्षी हैं। आयोजकों के अनुसार यह पदयात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि राष्ट्र चेतना, इतिहास जागरण और सांस्कृतिक संरक्षण का अभियान है। यात्रा के माध्यम से युवाओं में राष्ट्रभक्ति, अनुशासन, कर्तव्यबोध, नशामुक्ति, चरित्र निर्माण और सामाजिक समरसता का संदेश दिया जाएगा। प्रो. दीक्षित ने कहा कि वर्तमान समय में युवा पीढ़ी को अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना आवश्यक है। ऐसी यात्राएं उन्हें अपने गौरवशाली अतीत से परिचित कराती हैं तथा राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करती हैं। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से पदयात्रा में सहभागी बनने और वीर कल्लाजी राठौड़ के साहस, कर्तव्यनिष्ठा, राष्ट्रभक्ति तथा बलिदान के आदर्शों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
 


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