उदयपुर। जब इतिहास केवल पुस्तकों के पन्नों से निकलकर सजीव रूप में सामने खड़ा हो जाए, तो वह केवल कला नहीं बल्कि संस्कृति का उत्सव बन जाता है। ऐसा ही अद्भुत दृश्य देखने को मिला भंडारी दर्शक मंडप में, जहां प्रताप गौरव केंद्र द्वारा आयोजित हल्दीघाटी विजय सार्द्ध चतुःशती समारोह के दौरान कलाकारों ने मिट्टी से मेवाड़ के गौरवशाली इतिहा
स को साकार कर दिया।
कुंभलगढ़ दुर्ग की अजेय भव्यता, हल्दीघाटी युद्ध की वीरगाथा और चित्तौड़ के विजय स्तंभ की ऐतिहासिक गरिमा को मिट्टी की कलाकृतियों के माध्यम से जीवंत रूप दिया गया। इन कलाकृतियों ने न केवल दर्शकों को आकर्षित किया बल्कि उन्हें मेवाड़ के स्वर्णिम इतिहास से भी भावनात्मक रूप से जोड़ दिया।
इस अ
नूठे सृजन को मूर्त रूप देने में कलाकार यशराज सोनी, राहुल माली, उद्धव, शंकर और आयुष ने अपनी कला और कल्पनाशीलता का अद्भुत परिचय दिया।
पांच दिनों की अथक मेहनत, सूक्ष्म शिल्पकारी और ऐतिहासिक तथ्यों की गहन समझ के साथ तैयार की गई इन कलाकृतियों में मेवाड़ की वीरता और सांस्कृतिक विरासत की झलक स्पष्ट दिखाई दी।
विशेष बात यह रही कि साधारण मिट्टी को कलाकारों ने इस प्रकार आकार दिया कि दर्शकों को ऐसा महसूस हुआ मानो वे इतिहास के उन्हीं गौरवपूर्ण क्षणों के साक्षी बन गए हों। कुंभलगढ़ की विशाल प्राचीरें, हल्दीघाटी के रणक्षेत्र की स्मृतियां और विजय स्तंभ की स्थापत्य भव्यता ने हर आयु वर्ग के लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
समारोह में पहुंचने वाले हजारों दर्शकों के लिए ये कलाकृतियां आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहीं। लोगों ने कलाकारों की कल्पनाशीलता और मेहनत की सराहना करते हुए इसे इतिहास, संस्कृति और कला के अद्भुत संगम का उदाहरण बताया।
मिट्टी से निर्मित ये जीवंत कलाकृतियां केवल कलात्मक अभिव्यक्ति नहीं थीं, बल्कि मेवाड़ की गौरवगाथा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम भी बनीं। उन्होंने यह संदेश दिया कि इतिहास केवल स्मरण करने की वस्तु नहीं, बल्कि उसे सहेजने और अगली पीढ़ियों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी हमारी ही है।