प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना: विकसित भारत के निर्माण में रोजगार और सामाजिक सुरक्षा का नया अध्याय

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Published on : 18 Jun, 26 17:06

प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना: विकसित भारत के निर्माण में रोजगार और सामाजिक सुरक्षा का नया अध्याय

उदयपुर। आज का भारत बदलाव के एक ऐसे ऐतिहासिक दौर से गुजर रहा है जहाँ आर्थिक प्रगति का सीधा लाभ देश के युवाओं और कार्यबल को मिल रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार का संकल्प केवल आर्थिक विकास दर को बढ़ाना ही नहीं है, बल्कि एक ऐसा सुदृढ़ ढांचा तैयार करना है जिसमें हर हाथ को सम्मानजनक काम और सामाजिक सुरक्षा मिल सके । इसी विज़न को धरातल पर उतारने के लिए सरकार ने प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (पीएम-वीबीआरवाय) की शुरुआत की है, जो देश के श्रम इतिहास में मील का पत्थर साबित हो रही है।

यह है पीएम-वीबीआर योजना
प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना भारत सरकार की एक प्रमुख रोजगार-संबद्ध  प्रोत्साहन योजना है। इस योजना का मूल उद्देश्य देश में औपचारिक रोजगार के दायरे को बढ़ाना, पहली बार नौकरी की दुनिया में कदम रख रहे युवाओं को प्रोत्साहित करना और नियोक्ताओं को नए पदों के सृजन के लिए आर्थिक संबल देना है। सरकार ने इस क्रांतिकारी योजना के लिए 99,446 करोड़ का भारी-भरकम बजट (कुल परिव्यय) आवंटित किया है। इस योजना का लक्ष्य आगामी दो वर्षों में देशभर में 3.5 करोड़ से अधिक नए रोजगार सृजित करना है, जिसमें से लगभग 1.92 करोड़ युवा ऐसे होंगे जो पहली बार औपचारिक कार्यबल ( फाॅरमल वर्कफोर्स ) का हिस्सा बनेंगे।

नियोक्ता और कर्मचारी दोनों को लाभ
योजना की सबसे बड़ी खूबी इसका संतुलित और व्यावहारिक डिजाइन है, जो कर्मचारी और नियोक्ता दोनों के हितों को समान रूप से साधता है। इसे मुख्य रूप से दो श्रेणियों में विभाजित किया गया है।

प्रथम श्रेणी : इसमें नए श्रमबल (युवाओं) का स्वागत और बचत की आदत पर फोकस किया गया है। जो युवा पहली बार कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) में पंजीकृत हो रहे हैं और जिनका मासिक वेतन 1 लाख तक है, उन्हें सरकार द्वारा एक महीने के वेतन के बराबर (अधिकतम 15,000 तक) की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। यह राशि दो किश्तों में सीधे आधार लिंक्ड प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के जरिए ट्रांसफर होती है। इसमें पहली किश्त 6 महीने की निरंतर सेवा पूरी करने पर तथा दूसरी किश्त 12 महीने की सेवा और एक अनिवार्य वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम पूरा करने पर देय है। दूसरी किश्त को एक निश्चित अवधि के लिए बचत खाते या वित्तीय साधनों में सुरक्षित रखा जाता है, ताकि देश के युवाओं में शुरुआत से ही बचत की आदत को बढ़ावा दिया जा सके।

द्वितीय श्रेणी: यह नियोक्ताओं को नए रोजगार सृजन के लिए सीधी मदद प्रदान करती है। नए कर्मचारियों की भर्ती करने वाले नियोक्ताओं (कंपनियों/प्रतिष्ठानों) को सरकार द्वारा प्रति अतिरिक्त कर्मचारी  3,000 रूपए प्रति माह तक की प्रोत्साहन राशि पूरे दो वर्षों तक दी जाती है। इसका सीधा भुगतान कंपनी के पैन से जुड़े बैंक खातों में होता है। विनिर्माण क्षेत्र को विशेष बढ़ावा देने तथा देश को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के उद्देश्य से इस सेक्टर की कंपनियों के लिए इस वित्तीय सहायता को दो और वर्षों के लिए बढ़ाकर कुल चार वर्षों तक कर दिया गया है । योजना के तहत रोजगार सृजन की न्यूनतम शर्त छोटे उद्योगों (50 से कम कर्मचारी) को कम से कम 2 नए पद और बड़े उद्योगों (50 या अधिक कर्मचारी) को न्यूनतम 5 अतिरिक्त पदों पर भर्तियां करना रखा गया है।

धरातल पर दिखने लगे परिणाम
यह योजना केवल कागजी दावों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके परिणाम धरातल पर दिखने शुरू हो चुके हैं। मार्च 2026 तक के आंकड़े इस बात के गवाह हैं। प्रथम श्रेणी के तहत देशभर के 4.41 लाख पहली बार नौकरी पाने वाले युवाओं को 247 करोड़ की प्रोत्साहन राशि वितरित की जा चुकी है। वहीं द्वितीय श्रेणी में देश के 17,551 व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को 214 करोड़ की सहायता दी गई। इसके दम पर इन कंपनियों ने रिकॉर्ड 6.46 लाख से अधिक अतिरिक्त रोजगार पैदा किए। 19 जून को प्रस्तावित राष्ट्रीय कार्यक्रम में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी सिंगल क्लिक के माध्यम से 2,400 करोड़ की प्रोत्साहन राशि का वितरण करेंगे। इससे देश में 15 लाख अतिरिक्त रोजगार सृजन को बल मिलेगा।

विकसित भारत की मजबूत बुनियाद
प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना केवल एक वित्तीय प्रोत्साहन योजना नहीं है, बल्कि यह देश के श्रमबल के औपचारीकरण और उन्हें सामाजिक सुरक्षा कवरेज के दायरे में लाने का एक महा-अभियान है । जब देश का युवा आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होगा और देश के उद्योग बिना किसी वित्तीय बोझ के नई नियुक्तियां कर सकेंगे, तभी विकसित भारत का सपना सच हो पाएगा। यह योजना नए भारत के आत्मनिर्भर युवाओं और सशक्त नियोक्ताओं के बीच एक मजबूत सेतु का काम कर रही है। शुक्रवार को देशव्यापी उत्सव के तहत पूरे भारत में 200 स्थानों पर समानांतर क्षेत्रीय कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में उदयपुर के चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री सभागार में भी शाम 4 बजे से क्षेत्रीय कार्यक्रम होगा। इसमें जनप्रतिनिधिगण, अधिकारीगण, नियोक्ता, कर्मचारी आदि भाग लेंगे। - प्रशान्त कुमार सिन्हा, क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त, उदयपुर
 


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