आर.एन.टी मेडिकल कॉलेज में शुक्रवार को मनाया जाएगा विश्व सिकल सेल दिवस

( 302 बार पढ़ी गयी)
Published on : 18 Jun, 26 17:06

सेंटर ऑफ कॉम्पिटेंस ने स्थापित किए नए कीर्तिमान, 32 हजार नवजात शिशुओं की हुई स्क्रीनिंग

उदयपुर। दुनिया भर में विश्व सिकल सेल दिवस शुक्रवार 19 जून को मनाया जाएगा। इस वर्ष वैश्विक स्तर पर इस दिवस की आधिकारिक थीम क्लोजिंग द सर्वाइवल गैप इक्विटी इन सिकल सेल केयर रखी गई है। इसी उपलक्ष्य में रवींद्रनाथ टैगोर मेडिकल कॉलेज एवं संबद्ध चिकित्सालय संघ में भी कल इस दिवस को विशेष जागरूकता और संकल्प के साथ मनाया जाएगा।

यह है सिकल सेल रोग-
सिकल सेल रोग एक गंभीर वंशानुगत रक्त विकार है। सामान्य परिस्थितियों में मानव शरीर की लाल रक्त कोशिकाएँ गोलाकार और लचीली होती हैं, लेकिन इस बीमारी से ग्रसित मरीज के शरीर में ये कोशिकाएँ कड़क होकर दरांती या आधे चांद के आकार की हो जाती हैं। आकार बिगड़ने के कारण ये रक्त वाहिकाओं में फंसकर रुकावट उत्पन्न करती हैं, जिससे मरीज को असहनीय व तीव्र दर्द, गंभीर एनीमिया (खून की कमी), बार-बार संक्रमण, स्ट्रोक और अंगों की क्षति जैसी जानलेवा जटिलताओं का सामना करना पड़ता है।
यह रोग भारत के आदिवासी एवं जनजातीय समुदायों में आनुवंशिक रूप से अधिक पाया जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन-2047 संचालित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य देश को इस बीमारी से पूरी तरह मुक्त करना है। आमजन को इस छिपी हुई बीमारी के प्रति जागरूक करने के लिए ही हर साल 19 जून को वैश्विक स्तर पर यह दिवस मनाया जाता है।

सेंटर ऑफ कॉम्पिटेंस की अभूतपूर्व उपलब्धियां
महाराणा भूपाल राजकीय चिकित्सालय में स्थापित सेंटर ऑफ कॉम्पिटेंस फॉर सिकल सेल डिजीज दक्षिण राजस्थान के जनजातीय बहुल क्षेत्रों में इस रोग की रोकथाम और प्रबंधन में मील का पत्थर साबित हो रहा है। इस केंद्र की स्थापना 10 फरवरी 2023 को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में घोषित हुई थी और 20 फरवरी 2023 से नियमित सेवाएं शुरू की गईं। इसकी बेहतरीन कार्यप्रणाली को देखते हुए दिसंबर 2024 में भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा इसे आधिकारिक रूप से “सेंटर ऑफ कॉम्पिटेंस” के रूप में उच्च स्तरीय मान्यता प्रदान की गई। नोडल ऑफिसर डॉ. भूपेश जैन ने केंद्र के महत्वपूर्ण आंकड़े साझा करते हुए बताया कि केंद्र द्वारा अब तक ओपीडी व पंजीकरणः अब तक 6,160 ओपीडी परामर्श, 306 आईपीडी भर्ती और 589 सिकल सेल रोगियों का स्थायी पंजीकरण किया जा चुका है। समाज में इस रोग को आगे बढ़ने से रोकने के लिए 3,000 सिकल सेल वाहकों की पहचान की गई है। नवजात व गर्भवती महिलाओं की स्क्रीनिंगरू केंद्र ने एक बड़ा कीर्तिमान स्थापित करते हुए 32,000 नवजात शिशुओं की स्क्रीनिंग की, जिसमें 621 पॉजिटिव मामलों की समय पर पहचान की गई। साथ ही 8,500 गर्भवती महिलाओं की स्क्रीनिंग कर 500 वाहक चिन्हित किए गए।

क्षमता संवर्धन- इस बीमारी के सटीक प्रबंधन के लिए अब तक 1,107 स्वास्थ्य कर्मियों को विशेष तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है। यह केंद्र वर्तमान में नवजात स्क्रीनिंग, सटीक रोग निदान, उपचार, विशेष टीकाकरण, आनुवंशिक परामर्श, फिजियोथेरेपी, दिव्यांगता प्रमाणन, सामुदायिक व पारिवारिक स्क्रीनिंग, स्वास्थ्य शिक्षा तथा उच्च स्तरीय अनुसंधान गतिविधियों का सफलतापूर्वक संचालन कर रहा है।
रवींद्रनाथ टैगोर मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य एवं नियंत्रक डॉ. राहुल जैन ने इस वैश्विक दिवस की पूर्व संध्या पर संस्थान के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि विश्व सिकल सेल दिवस हमारे लिए केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि जनजातीय अंचल के अंतिम छोर पर बैठे पीड़ित व्यक्ति तक सर्वोत्तम स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का हमारा मिशन है। रवींद्रनाथ टैगोर मेडिकल कॉलेज का सेंटर ऑफ कॉम्पिटेंस जिस प्रतिबद्धता से नवजात शिशुओं और गर्भवती महिलाओं की स्क्रीनिंग कर रहा है, वह सराहनीय है। समय पर पहचान, समुचित उपचार एवं सामुदायिक जागरूकता ही सिकल सेल मुक्त भारत की दिशा में सबसे प्रभावी कदम है। हम इस वर्ष की वैश्विक थीम क्लोजिंग द सर्वाइवल गैप को आत्मसात करते हुए संभाग में प्रत्येक मरीज को बिना किसी भेदभाव के पूरी तरह निःशुल्क एवं कैशलेस आधुनिक उपचार देने के लिए कटिबद्ध हैं ताकि राष्ट्रीय मिशन-2047 के लक्ष्यों को समय से पहले हासिल किया जा सके।
महाराणा भूपाल राजकीय चिकित्सालय में सिकल सेल के मरीजों के लिए एक ही छत के नीचे ओपीडी, आईपीडी, अत्याधुनिक लैबोरेट्री जांचें, आवश्यक दवाएं और परामर्श की संपूर्ण व्यवस्था निःशुल्क सुनिश्चित की गई है। इस बीमारी के कारण बच्चों में होने वाली रुग्णता और मृत्यु दर को कम करने में हमारे केंद्र के डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने दिन-रात मेहनत की है। कल 19 जून को अस्पताल परिसर में विशेष जागरूकता सत्र और सेमिनार का भी आयोजन किया जाएगा ताकि अधिक से अधिक मरीजों और उनके परिजनों को इस बीमारी के प्रबंधन और बचाव के प्रति संवेदनशील बनाया जा सके।


साभार :


© CopyRight Pressnote.in | A Avid Web Solutions Venture.