प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का पेरिस में भारतीय समुदाय को संबोधन: प्रवासी भारतीयों से संवाद का नया अध्याय

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Published on : 19 Jun, 26 07:06

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का पेरिस में भारतीय समुदाय को संबोधन: प्रवासी भारतीयों से संवाद का नया अध्याय

गोपेन्द्र नाथ भट्ट 

अपनी यूरोप यात्रा के अंतिम पड़ाव पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पेरिस पहुंचे। यहां उनका स्वागत सिर्फ कूटनीतिक प्रोटोकॉल तक सीमित नहीं रहा। पेरिस की सड़कों पर शाम ढलते ही होटल के बाहर भारतीय प्रवासियों का हुजूम उमड़ पड़ा। तिरंगे लहराते, "भारत माता की जय" के नारों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन के बीच माहौल एक "मिनी इंडिया" सा बन गया। इसी गर्मजोशी भरे स्वागत के बाद पीएम मोदी ने भारतीय समुदाय के लिए आयोजित विशेष कार्यक्रम को संबोधित किया।  

 

 

पीएम मोदी का संबोधन फ्रांस में बसे भारतीयों के योगदान को नमन से शुरू हुआ। उन्होंने कहा कि भले ही भौगोलिक दूरियां हों, लेकिन दिलों में भारत बसता है। पेरिस की सड़कों पर बुजुर्ग महिलाओं से हाथ मिलाते, बच्चों को दुलारते और सिख समुदाय के लोगों से मिलते हुए उनकी तस्वीरें इस आत्मीयता की गवाह बनीं। मोदी ने विशेष रूप से पीली साड़ी पहनी एक बुजुर्ग महिला से हुई मुलाकात का जिक्र किया, जिनकी हंसी में उन्हें "मां भारती का आशीर्वाद" नजर आया।  

 

प्रधानमंत्री ने भारत-फ्रांस संबंधों को "विश्वास और नवाचार की साझेदारी" बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देश सिर्फ रक्षा और परमाणु ऊर्जा में नहीं, बल्कि डिजिटल, ग्रीन एनर्जी और स्टार्टअप में भी साथ बढ़ रहे हैं। इसी दौरे पर वे यूरोप के सबसे बड़े टेक इवेंट विवा टेक समिट में भाग लेने वाले थे। मोदी ने प्रवासियों से आह्वान किया कि वे इस तकनीकी साझेदारी के 'ब्रांड एंबेसडर' बनें। फ्रांस में रह रहे 1 लाख से अधिक भारतीय छात्रों, प्रोफेशनल्स और कारोबारियों को उन्होंने "सॉफ्ट पावर का जीवंत उदाहरण" कहा।  

 

संबोधन का एक बड़ा हिस्सा "पिछले 10 वर्षों में बदले भारत" पर केंद्रित रहा। मोदी ने बताया कि कैसे यू पी आई, डिजिटल पेमेंट और स्टार्टअप क्रांति ने दुनिया को चौंकाया है। उन्होंने कहा, "आज जब मैं जी -7 में भारत का पक्ष रखता हूं, तो दुनिया सुनती है क्योंकि 140 करोड़ भारतीयों की ताकत मेरे साथ है"। चंद्रयान, वंदे भारत, मेड इन इंडिया रक्षा उपकरणों का जिक्र कर उन्होंने प्रवासियों से कहा कि वे गर्व से बताएं कि उनका देश अब "समाधान देने वाला भारत" है।

 

पीएम ने फ्रांस में बसे भारतीयों को चार जिम्मेदारियां दीं की सर्वप्रथम वे संस्कृति के वाहक बने। योग, आयुर्वेद, त्योहारों को स्थानीय समुदाय से जोड़ें। साथ भारत में निवेश के सेतु भी बने । फ्रांसीसी कंपनियों को भारत की पी एल आई स्कीम, सेमीकंडक्टर मिशन से जोड़ें। इसके अलावा वे पर्यटन के प्रचारक बने। "देखो अपना देश" और "वेड इन इंडिया" अभियान को आगे बढ़ाएं। साथ ही ज्ञान के साझीदार बन वीवा तकनीकी जैसे मंचों पर भारतीय इनोवेशन की कहानी बताएं। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि सरकार ने ओ सी आई कार्ड नियम आसान किए हैं और पेरिस में नया काउंसलेट खोलने पर काम चल रहा है ताकि प्रवासियों को सुविधा हो।

 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का यह संबोधन ऐसे समय हुआ जब भारत-फ्रांस राजनयिक संबंधों के 25 साल पूरे हो रहे हैं। पेरिस की सड़कों पर देर शाम तक चले इस कार्यक्रम को कई मीडिया संस्थानों ने "डायस्पोरा कूटनीति का उत्सव" बताया। जहां एक ओर समर्थकों ने इसे "राष्ट्रीय गौरव का क्षण" कहा, वहीं सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने इसे "PR इवेंट" कहकर बहस भी छेड़ी। फिर भी, कार्यक्रम में दिखी भावनात्मक जुड़ाव की तस्वीरें सबसे प्रभावी रहीं।  

 

कुल मिला कर 'विकसित भारत 2047' में प्रवासियों की भागीदारी पर बल देते मोदी ने संबोधन का समापन "विकसित भारत 2047" के विजन के साथ किया। उन्होंने कहा कि आजादी के 100 साल पर भारत को विकसित बनाने में प्रवासी भारतीयों की भूमिका निर्णायक होगी। "आप जहां हैं, वहीं से भारत के लिए काम करें। आपकी एक पहल, भारत में हजारों जिंदगियां बदल सकती है।"

 

मोदी का यह पेरिस संबोधन सिर्फ एक भाषण नहीं था, बल्कि 35 मिलियन प्रवासी भारतीयों को भारत की विकास यात्रा से जोड़ने का संकल्प था। जब पीएम मोदी ने "सारे जहां से अच्छा" की पंक्तियों के साथ अपनी बात खत्म की, तो बैरिकेड के पीछे खड़े हर भारतीय की आंखों में अपने देश के लिए गर्व साफ झलक रहा था। यही प्रवासी कूटनीति की असली ताकत है - जो सरहदों से परे दिलों को जोड़ती है।


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