जम्मू। जम्मू-कश्मीर के ’बागवानों’ के लिए बड़ी उपलब्धि। उत्तर रेलवे, जम्मू मंडल ने इस वर्ष 2026 में फल लोडिंग में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। जम्मू मंडल के प्रयासों से स्थानीय ’बागवानों’ की चेरी और लीची अब देश के बड़े बाजारों तक तेजी और सुरक्षित रूप से पहुंच रही है।
जम्मू मंडल के जनसम्पर्क निरीक्षक श्री राघवेन्द्र सिंह ने बताया कि इस वर्ष जम्मू तवी रेलवे स्टेशन से लगभग 250 टन चेरी की लोडिंग मुंबई, वडोदरा और सूरत जैसे प्रमुख महानगरों के लिए की गई। वहीं पठानकोट कैंट रेलवे स्टेशन से लगभग 10 टन लीची को मुंबई, अहमदाबाद और सूरत भेजा गया। यह जम्मू मंडल के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। जम्मू मंडल की इस पहल से बागवानों और क्षेत्र को भरपूर लाभ मिल रहे हैं। संक्षिप्त में अगर इस फायदों पर बात करें तो, बिचैलियों की भूमिका कम होने से ’उत्पादकों’ को सीधे उचित मूल्य मिल रहा है। रेल मालभाड़ा सड़क परिवहन की तुलना में किफायती है, जिससे ’कृषकों’ की लागत घटी है और मुनाफा बढ़ा है। रेल की रफ्तार से खराब होने वाले फल कम समय में बाजार पहुंच रहे हैं, जिससे नुकसान न्यूनतम हुआ है। नाशवान उत्पादों की डिलीवरी अब घंटों में, न कि दिनों में हो रही है। अब जम्मू-कश्मीर की चेरी और लीची की मांग मुंबई, गुजरात तक बढ़ी है, जिससे ’बागवानों’ की आय में बढ़ोतरी हुई है।
इस उपलब्धि पर वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्री उचित सिंघल ने कहा कि जम्मू मंडल बागवानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है। हमने चेरी और लीची जैसे नाशवान उत्पादों के लिए स्पेशल पार्सल वैगन और त्वरित लोडिंग-अनलोडिंग की व्यवस्था की है। हमारा लक्ष्य है कि जम्मू-कश्मीर का हर फल कम समय में, कम लागत पर देश के कोने-कोने तक पहुंचे। यह पहल न सिर्फ उत्पादकों’ की आमदनी बढ़ाएगी, बल्कि ‘‘वोकल फॉर लोकल’’ को भी मजबूती देगी। रेलवे की फ्रेट सेवा कृषकों के लिए सबसे किफायती और समयबद्ध विकल्प है। सड़क की तुलना में रेल से ढुलाई में 30-40 प्रतिशत तक लागत कम आती है और नाशवान फलों की ताजगी बरकरार रहती है। यही कारण है कि जम्मू की चेरी अब वडोदरा-सूरत तक उतनी ही ताजा पहुंच रही है जितनी जम्मू में। समय और लागत दोनों की बचत से ’बागवान’ सीधे लाभान्वित हो रहे हैं।
जम्मू मंडल ने भविष्य में भी ’उत्पादकों’ को रेलवे की मालभाड़ा सुविधा के लिए हरसंभव सहायता देने का आश्वासन दिया है।