श्रीगंगानगर। जिला कलक्टर डॉ. अमित यादव व जिला पुलिस अधीक्षक श्री हरिशंकर के नेतृत्व में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा संचालित “नशा मुक्त भारत अभियान” के अंतर्गत मादक द्रव्यों के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के खिलाफ मनाए जाने वाले अंतर्राष्ट्रीय दिवस (26 जून) के उपलक्ष्य में आयोजित “नशा मुक्त भारत सप्ताह” के तहत बुड्ढा जोहड़ डाबला स्थित राष्ट्रीय जाम्भाणी संस्कार शिविर में नशा मुक्ति जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के श्री विक्रम ज्याणी एवं उनकी टीम रेड आर्ट्स थिएटर ग्रुप द्वारा प्रस्तुत नाटक “अंधेरे से उजाले की ओर” ने उपस्थित हजारों लोगों को नशामुक्ति के लिए जागरूक किया। नाटक में दिखाया गया कि कैसे नशा धीरे-धीरे व्यक्ति के जीवन में प्रवेश करता है और फिर उसके सपनों, रिश्तों, परिवार और भविष्य को निगल जाता है।
कार्यक्रम में यह संदेश दिया कि नशा केवल एक व्यक्ति को नहीं बल्कि पूरे परिवार को बर्बाद करता है। माता-पिता की आंखों के आंसू, बच्चों का उजड़ता भविष्य और टूटते रिश्ते नशे की सबसे बड़ी कीमत हैं। मंच पर एक छोटी सी बेटी रो-रोकर लोगों को जगाने का प्रयास कर रही है, उसमें कोई कमी नहीं है, कमी केवल समझने वालों की है। राष्ट्रीय जाम्भाणी संस्कार शिविर के संयोजक महंत डॉ. स्वामी सच्चिदानंद आचार्य ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि अच्छे संस्कार जीवन की सबसे बड़ी पूंजी हैं। उन्होंने कहा, “संस्कार एक अलार्म घड़ी की तरह हैं, जो समय आने पर व्यक्ति को जगा देते हैं। श्री बिश्नोई मंदिर समिति के अध्यक्ष अरविंद सिहाग ने बताया कि राष्ट्रीय जाम्भाणी संस्कार शिविर का मूल उद्देश्य संस्कार से समृद्धि, सेवा से सिद्धि, ज्ञान से उत्थान और एकता से महान” के भाव को समाज में स्थापित करना है।
अंत में उपस्थित सभी लोगों ने नशा मुक्त भारत अभियान से जुड़ने तथा अपने परिवार, गांव और समाज को नशा मुक्त बनाने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि यदि हर व्यक्ति केवल एक युवा को नशे से बचाने का प्रयास करे तो समाज में एक बड़ा परिवर्तन लाया जा सकता है।