इलाज में लापरवाही और मारपीट के आरोपों पर सकल दिगम्बर जैन समाज ने उठाई निष्पक्ष जांच की मांग

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Published on : 28 Jun, 26 10:06

इलाज में लापरवाही और मारपीट के आरोपों पर सकल दिगम्बर जैन समाज ने उठाई निष्पक्ष जांच की मांग

 

उदयपुर। सकल दिगम्बर जैन समाज, उदयपुर ने 2 जून को सड़क दुर्घटना में घायल हुए कुलदीप कुमार जैन के उपचार के दौरान कथित चिकित्सीय लापरवाही, अस्पतालों में हुए घटनाक्रम तथा परिजनों के साथ कथित मारपीट के मामले में निष्पक्ष, पारदर्शी एवं समयबद्ध जांच की मांग की है। समाज ने पूरे प्रकरण का विस्तृत तथ्यात्मक क्रम जारी करते हुए पीड़ित परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी अपील की है।

समाज के अनुसार, 2 जून की सुबह लगभग 7 बजे कुलदीप कुमार जैन सड़क दुर्घटना में घायल हो गए, जिसके बाद उन्हें उपचार के लिए उदयपुर स्थित जेपी ऑर्थोपेडिक हॉस्पिटल ले जाया गया। प्रारंभिक जांच के बाद चिकित्सकों ने दोनों हाथों में फ्रैक्चर बताते हुए सामान्य ऑपरेशन से उपचार किए जाने की जानकारी दी।

समाज का आरोप है कि दोपहर करीब 3 बजे शुरू होने वाला ऑपरेशन निर्धारित समय से अधिक देर तक चला, लेकिन इसके बाद भी मरीज को होश नहीं आया और उन्हें वेंटिलेटर पर रखना पड़ा। आरोप है कि शाम तक परिजनों को मरीज की वास्तविक स्थिति, उपचार की प्रगति तथा उत्पन्न हुई जटिलताओं की स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।

समाज का कहना है कि इसी दौरान अस्पताल प्रशासन ने अन्य चिकित्सकों को बुलाया और पुलिस को भी सूचना दी। मरीज की गंभीर स्थिति की सूचना मिलने पर बड़ी संख्या में समाजजन अस्पताल पहुंचे और उपचार संबंधी जानकारी लेने का प्रयास किया। आरोप है कि स्पष्ट जानकारी नहीं मिलने से अस्पताल परिसर में तनावपूर्ण स्थिति बनी, जो बाद में कथित विवाद और मारपीट तक पहुंच गई।

समाज के अनुसार, लगातार आग्रह के बाद मरीज को उच्च स्तरीय उपचार के लिए गीतांजलि हॉस्पिटल रेफर किया गया। आरोप है कि मरीज अत्यंत गंभीर अवस्था में वहां पहुंचा, जबकि डिस्चार्ज दस्तावेजों में उसकी स्थिति अलग प्रकार से दर्ज की गई, जिसकी स्वतंत्र जांच आवश्यक है।

समाज ने आरोप लगाया कि गीतांजलि हॉस्पिटल में उपचार प्रारंभ होने से पहले आवश्यक सहमति-पत्रों पर हस्ताक्षर करवाए गए। इसके बाद मरीज के परिजन जम्बू कुमार जैन को पुनः हस्ताक्षर के बहाने एक कमरे में बुलाकर उनके साथ कथित रूप से मारपीट, अभद्र व्यवहार तथा गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियां दी गईं।

इसी क्रम में समाज का आरोप है कि अस्पताल परिसर के बाहर लक्ष्य जैन को कथित रूप से जबरन रोककर रखा गया। वहीं रात्रि करीब एक बजे मरीज के पुत्र अक्षत जैन को भी हस्ताक्षर के नाम पर नीचे बुलाया गया, जहां पहले से मौजूद डॉक्टरों एवं मेडिकल स्टाफ ने उन्हें घेर लिया। समाज का कहना है कि पुलिस ने सुरक्षा का आश्वासन देकर उन्हें वाहन में बैठाया, लेकिन बाद में उन्हें हिरासत में ले लिया।

समाज के अनुसार, पूरे मामले को लेकर सविना थाना, उदयपुर में परिवाद दर्ज कराए जा चुके हैं। इसके बावजूद अब तक न तो स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच हुई है और न ही आरोपित व्यक्तियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की गई है। समाज का आरोप है कि पूरे घटनाक्रम के दौरान पीड़ित परिवार के साथ मारपीट, अभद्र व्यवहार, धमकी और भय का वातावरण बनाया गया, जिससे उन्हें मानसिक, सामाजिक और शारीरिक क्षति पहुंची।

समाज की प्रमुख मांगें

सकल दिगम्बर जैन समाज ने राज्य सरकार एवं प्रशासन से मांग की है कि पूरे प्रकरण की किसी स्वतंत्र एजेंसी अथवा वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की निगरानी में निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कराई जाए। दोनों अस्पतालों के सीसीटीवी फुटेज, ऑपरेशन थिएटर रिकॉर्ड, मेडिकल दस्तावेज, कॉल डिटेल्स तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को तत्काल सुरक्षित रखा जाए। सभी संबंधित चिकित्सकों, मेडिकल स्टाफ और अन्य व्यक्तियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही पूरे घटनाक्रम में पुलिस की भूमिका की भी स्वतंत्र जांच कराई जाए।

समाज ने पीड़ित परिवार और प्रमुख गवाहों को तत्काल सुरक्षा उपलब्ध कराने, जांच पूरी होने तक सभी साक्ष्यों को सुरक्षित रखने तथा किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ रोकने की मांग की है। इसके साथ ही राज्य सरकार से आग्रह किया गया है कि किसी भी प्रकार के प्रभाव या दबाव से मुक्त होकर दोषियों के विरुद्ध निष्पक्ष एवं विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

(नोट: यह समाचार सकल दिगम्बर जैन समाज द्वारा जारी बयान एवं लगाए गए आरोपों पर आधारित है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित अस्पतालों, चिकित्सकों, पुलिस अथवा अन्य पक्षों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)


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