महान् नारी उद्धारक, वृहत स्तर पर शुद्धि एवं सामाजिक कार्यों को करने वाले ऋषि दयानन्दभक्त देवीदास आर्य

( 396 बार पढ़ी गयी)
Published on : 30 Jun, 26 18:06

-मनमोहन कुमार आर्य, देहरादून।

महान् नारी उद्धारक, वृहत स्तर पर शुद्धि एवं सामाजिक कार्यों को करने वाले ऋषि दयानन्दभक्त देवीदास आर्य

     महान् नारी उद्धारक श्री देवीदास आर्य, कानपुर को परलोक पधारे काफी समय व्यतीत हो चुका है। वर्तमान आर्यसमाज की युवा पीढ़ी उनके  नाम एवं कार्यों से परिचित नहीं है। अतः हम श्री देवीदास आर्य जी के जीवन एवं कार्यों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत कर रहे हैं। 

    श्री देवीदास आर्य जी का जन्म 3 जून 1922 को अविभाजित भारत के सिन्ध प्रान्त (वर्तमान में पाकिस्तान का भाग) के सक्खर जिले की तहसील गढ़ीवासीन के केहर गांव में हुआ था। आपके पिताजी स्व. श्री विद्याराम एक साधारण कृषक व अध्यापक थे। आपकी माताजी स्व. श्रीमती पद्मादेवी जी एक अत्यन्त धर्मभीरू तथा सात्विक विचारों व स्वभाव की महिला थीं। आप अपने माता-पिता की एकमात्र सन्तान थे। आपने अपने जीवन में अध्ययन करते हुए अध्यापन का कार्य भी किया था। आपने सिद्धान्त शास्त्री तथा विद्यावाचस्पति की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की थी। सन् 1947 में भारत के विभाजन के समय आपने उत्तर प्रदेश के कानपुर नगर को अपनी कर्मभूमि बनाया। 

    श्री देवीदास आर्य जी ने जीवन में अनेक उल्लेखनीय कार्य किए। ऐसे कार्य किए जो व जैसे कार्य स्यात् देश में अन्य किसी सामाजिक कार्यकर्ता ने न किए हों। आपने अपने जीवन में अपने अभूतपूर्व शौर्य का परिचय देते हुए निजी संसाधनों से लगभग 3500 (तीन हजार पांच सौ) महिलाओं और कन्याओं को असामाजिक तत्वों तथा वैश्यालयों के चंगुल से मुक्त कराकर सभ्य समाज में पुनर्वासित किया था। श्री देवीदास आर्य जी ने 500 से अधिक कन्याओं को वैश्यालयों के नारकीय जीवन से त्राण दिलाकर उन्हें सम्मनित जीवन यापन करने हेतु प्रेरित किया तथा गृहस्थ बनाया। आपने लगभग 600 से अधिक निराश्रित निर्धन एवं उत्पीड़न का शिकार कन्याओं का विवाह निजी संसाधनों से स्वयं पिता बनकर कन्यादान करके कराया था।

    श्री देवीदास आर्य जी ने लगभग 2000 असहाय निराश्रित एवं निर्धन विधवाओं, वृद्धों एवं वृद्धाओं के जीवनयापन हेतु सरकार से पेंशन का प्रबन्ध कराया था। इसके अतिरिक्त श्री देवीदास आर्य जी ने लगभग 4000 चार हजार से अधिक विधर्मियों को हिन्दू धर्म (वैदिक धर्म) में प्रवेश कराया, जिनमें पादरी, मौलवी तथा इमाम भी थे। 

    श्री देवीदास आर्य जी अनेक वर्षों तक कानपुर नगर महापालिका के सभासद रहे तथा 50 से अधिक भ्रष्टाचार-काण्डों का पर्दाफाश किया जिस पर कांगे्रस पार्टी की बहुमत वाली नगर पालिका ने आपको विपक्षी होते हुए भी सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर भूरि-भूरि प्रशंसा की थी। श्री देवीदास आर्य जी डी.ए.वी. स्कूल के प्रधानाचार्य के पद कार्यरत रहे तत्पश्चात पत्रकारिता को आपने अपने जीवनयापन का साधन बनाया। 

    श्री देवीदास आर्य जी ने महर्षि दयानन्द सरस्वती तथा आर्यसमाज के नारी शिक्षा के स्वप्न को साकार करने हेतु आर्य कन्या इण्टर कालेज की स्थापना की थी तथा उसके भव्य भवन का निर्माण कराया। इस शिक्षण संस्थान में लगभग 4500 (चार हजार पांच सौ) छात्राएं निःशुल्क शिक्षण प्राप्त करती थीं। इसी प्रकार आपने आर्यसमाज गोविन्द नगर, कानपुर के विशाल भवन का निर्माण कार्य भी कराया था। श्री देवीदास आर्य जी स्वतन्त्रता सेनानी भी रहे। आपने स्वतन्त्रता सेनानियों को मिलने वाली पेंशन लेने से मना कर दिया था। सन् 1992 में उत्तर प्रदेश के राज्यपाल ने स्वतन्त्रता सेनानी के रूप में पदक देकर आपका अभिनन्दन किया था। 

    श्री देवीदास आर्य जी ने 700 जोड़ों के विवाह जांति-पांति तोड़कर (अन्तर्जातीय विवाह) कराये थे। इसके अतिरिक्त आपने लगभग 300 से अधिक रूठे हुए जोड़ों को, जो तलाक करना चाहते थे, उनकी सुलह सफाई कर उनका पुनर्मिलन कराया था। आपके निवास पर नित्य पारिवारिक झगड़ों को निःशुल्क निपटाने की अदालत लगती थी।  

    श्री देवीदास आर्य जी को आपतकाल 1975 में पहले ही दिन नही ‘मीसा’ कानून के अन्तर्गत बन्दी बनाया गया था। आपने 19 माह का आपत-काल कानपुर तथा फतेगढ़ के केन्द्रीय करागारों में व्यतीत किया। इसके अलावा आपने विभिन्न धार्मिक, सामाजिक एवं राजनैतिक दलों में भाग लेकर 15 बार कारावास की यन्त्रणाएं सहन कीं। आप राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के निष्ठावान स्वयं सेवक रहे। आपको विश्व उन्नयन संसद (वल्र्ड डेवेलपमेंट पार्लियामेन्ट) ने डाक्टर की मानद उपाधि, अखिल भारतीय सिन्धी समाज ने ‘सिन्धी समाज रत्न’ तथा अखिल भारतीय बुद्धिजीवी संस्था (आल इण्डिया कान्फ्रेन्स इन्टलेक्चुअल्स) जिसके भारत के राष्ट्रपति संरक्षिक हैं कि ओर से उत्तर प्रदेश रत्न की उपाधि से सम्मानित किया। आर्यसमाज के कुछ संगठनों ने आपको श्रेष्ठ आर्य तथा आदर्श आर्य वीर की उपाधि से भी अलंकृत किया। आपकी अतुलनीय समाज सेवाओं से प्रभावित होकर सन् 1983 में तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह जी ने आपको सम्मानित किया था। वर्ष 1988 में कानपुर में हुए आपके नागरिक अभिनन्दन समारोह के अवसर पर महान महिला उद्धारक देवीदास आर्य नामक पुस्तक का विमोचन करते हुए पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह जी ने कहा था कि मैं आर्य जी जैसे वीर पुरुष से अत्यन्त प्रभावित हूं, उन्हें तो सरकार को ‘पद्म-श्री’ या ‘पद्म-भूषण’ से सम्मानित करना चाहिये। 

    समय-समय पर प्रदेश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं ने आपके अभिनन्दन समारोह आयोजित कर कृतज्ञता ज्ञापित की। इन संस्थाओं में प्रमुख रूप से लायन्स क्लब, रोटरी क्लब, विश्व हिन्दू परिषद, सिंधी संघ, सनातन धर्म, आर्यसमाज तथा विभिन्न नगर पालिकाएं सम्मिलित हैं। श्री देवीदास आर्य जी अखिल भारतीय सिन्धी आर्य प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष, नारी सेवा संस्थान के अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश आर्य प्रतिनिधि सभा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष, उत्तर प्रदेश विद्यालय प्रबन्धक महासभा के संरक्षक, केन्द्रीय आर्य सभा के अध्यक्ष, आर्य समाज (गोविन्द नगर) के अध्यक्ष, राष्ट्रीय शिक्षण समिति के पूर्व महामंत्री तथा आर्य कन्या इण्टर कालेज (गोविन्द नगर) के संस्थापक व प्रबंधक तथा श्री मुनि इण्टर कालेज, गोविन्द नगर के संस्थापक थे। 

    पूर्व राष्ट्रपति श्री ज्ञानी जैल सिंह जी ने आपके बारे में कहा था कि श्री देवीदास आर्य जी जैसे वीर पुरुष को तो ‘पदम्-श्री’ की उपाधि से सम्मानित करना चाहिये। विश्व हिन्दू परिषद के महामंत्री श्री अशोक सिंहल जी ने कहा था कि श्री देवीदास आर्य जी को गौरवान्वित करने से हिन्दू समाज के एक सपूत ही नहीं वरन् सम्पूर्ण हिन्दू समाज का गौरव बढ़ता है। सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा, दिल्ली के प्रधान श्री लाला राम गोपाल शालवाले ने कहा था कि श्री देवीदस आर्य जी का सम्ूपर्ण जीवन अपने आप में उनकी विशिष्ट मानवीय सेवाओं का एक वृहद ग्रन्थ है। 

    हम पिछले लम्बे समय से श्री देवीदास आर्य जी के जीवन के कुछ ज्ञात पहलुओं को अपने मित्रों से साझा करना चाहते थे। ईश्वर की कृपा से आज हम इस कार्य को करने में सफल हुए हैं। ईश्वर का धन्यवाद करते हैं। हम आशा करते हैं कि हमारे सभी मित्र व पाठक श्री देवीदास आर्य जी के जीवन एवं कार्यों से संबंधित इस विवरण को पसन्द करेंगे। इस लेख की सामग्री हमने श्री देवीदास आर्य जी के अभिनन्दन ग्रन्थ से साभार ली है। ओ३म् शम्। ओ३म् शम्।
-मनमोहन कुमार आर्य
पताः 196 चुक्खूवाला-2
देहरादून-248001
फोनः09412985121
 


साभार :


© CopyRight Pressnote.in | A Avid Web Solutions Venture.