पधारो म्हारे देस युग पुरुष ... अभी मन भरा नहीं !!
गोपेन्द्र नाथ भट्ट
विश्व की सबसे प्राचीन अरावली पर्वत श्रृंखलाओं से राजस्थान को एक सीधी लाइन से दो भागों में प्राकृतिक रूप से विभाजित करने वाले तथा भौगोलिक दृष्टि से देश के सबसे बड़े प्रदेश राजस्थान की अपनी कई विषम भौगोलिक परिस्थितियां, देश के पश्चिमी क्षेत्र की पाकिस्तान से सटी सबसे बड़ी सीमाओं तथा एशिया के सबसे बड़े थार रेगिस्तान के बड़े भू-भाग के प्रदेश में होने के कारण देश के अन्य प्रदेशों की तुलना में विकास की अधिक लागत आने तथा सतही एवं भूमिगत पानी की भारी कमी तथा उपलब्ध जल की कमजोर गुणवत्ता , वर्षा पर निर्भर खेती, प्रायः सूखा एवं अकाल का सामना करने,आदिवासी और पहाड़ी क्षेत्रों की विभिन्न समस्याओं और घुमंतू जातियों एवं बड़ी आबादी के रोजगार के लिए पडौसी प्रदेशों और अन्यत्र पलायन आदि समस्याओं के कारण राजस्थान आजादी के बाद से ही अपने सर्वांगीण विकास के लिए जूझता रहा है। विशेष कर रेगिस्तान प्रधान पश्चिमी राजस्थान में विकास का सपना किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं रहा है लेकिन पहले विश्व की सबसे बड़ी राजस्थान नहर परियोजना के आने से कृषि और सिंचाई के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तनों के साथ ही औद्योगिक दृष्टि से इसकी तकदीर बदली है और कालांतर में इस अंचल में प्राकृतिक तेल,गैस और जल के अथाह भंडार मिलने के साथ ही सोलर एनर्जी की अनंत संभावनाओं से तथा अब बालोतरा जिले के पचपदरा में तेल रिफाइनरी और पेट्रो काॅम्प्लेक्स आने से राजस्थान के सुनहरे भविष्य की उम्मीदें परवान पर चढ़ती दिखाई दे रही है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शनिवार चार जुलाई को पचपदरा में 79 हजार करोड़ रु की तेल रिफाइनरी और पेट्रो काॅम्प्लेक्स महत्वाकांक्षी परियोजना के साथ ही जोधपुर के नवनिर्मित सिविल एयरपोर्ट का उद्घाटन और राजधानी जयपुर में 13,000 करोड़ की लागत से बनने वाली मेट्रो परियोजना फेज -2 का वर्चुअल शिलान्यास करेंगे। आधुनिक भारत के युग पुरुष माने जाने वाले प्रधानमंत्री मोदी के राजस्थान आने पर प्रदेशवासियों में भारी उत्साह है और पधारो म्हारे देस के उद्घोष से रेगिस्तान के धोरे उछाल मारते हुए कह रहें है कि पधारो म्हारे देस युग पुरुष ... अभी मन भरा नहीं !! विकास पुरुष मोदी जी आपने पिछले एक दशक से भी अधिक समय में राजस्थान को विकास के कई उपहार दिए है और आपके दल की केन्द्र और राज्य की डबल इंजन सरकार राजस्थान में नित नए आयाम भी जोड़ रही है फिर भी विशाल राजस्थान की आठ करोड़ जनता आपसे राजस्थान को पानी और हेरिटेज पर्यटन की दृष्टि से विशेष राज्य का दर्जा प्रदान करने की दरकार के साथ ही राजस्थानी भाषा को संवैधानिक दर्जा देने की गुहार भी कर रही है।
"सबका साथ और सबका विकास" की भावना और "विकसित भारत @ 2047" के लक्ष्यों को प्राप्त करने की दृष्टि से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2014 से लेकर 2026 तक पिछले 12 वर्षों में राजस्थान को आधारभूत ढांचे, परिवहन, ऊर्जा, स्वास्थ्य और औद्योगिक विकास के क्षेत्र में अनेक महत्वपूर्ण परियोजनाओं की सौगात मिली है और अब डबल इंजन सरकार का अतिरिक्त लाभ भी मिल रहा हैं। जिसका ताजा उदाहरण प्रदेश के शेखावाटी अंचल की प्यास बुझाने वाला यमुना जल समझौता है। साथ ही पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना ईआरसीपी पुनर्गठित रामसेतु परियोजना भी मूर्त रूप ले रही है।इन परियोजनाओं से न केवल राज्य की विकास यात्रा को नई गति मिली है, बल्कि राजस्थान देश के पर्यटन, औद्योगिक और ऊर्जा मानचित्र पर और अधिक मजबूती के साथ उभरा है और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्विगुणित ऊर्जा से भरे दिखाई दे रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के पिछले बारह वर्षों का आकलन करें तो राजस्थान उन राज्यों में शामिल है, जहाँ आधारभूत ढाँचे, औद्योगिक निवेश, ऊर्जा, परिवहन, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में अनेक महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को गति मिली है। भौगोलिक दृष्टि से देश का सबसे बड़ा राज्य होने के कारण राजस्थान की विकास आवश्यकताएँ भी बहुत अधिक एवं व्यापक हैं। केंद्र की मोदी सरकार ने इन्हें ध्यान में रखते हुए कई ऐसी परियोजनाओं को स्वीकृति और गति दी है, जिसने राज्य के आर्थिक परिदृश्य को बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इन उपलब्धियों में सबसे बड़ी पहचान पचपदरा में स्थापित एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी एवं पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स है। लगभग 79 हजार करोड़ रुपये की लागत वाली यह महत्वाकांक्षी परियोजना स्वतंत्र भारत में राजस्थान के सबसे बड़े औद्योगिक निवेशों में गिनी जाती है। यह रिफाइनरी केवल पेट्रोलियम उत्पादों के उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके साथ विकसित होने वाला पेट्रोकेमिकल उद्योग पश्चिमी राजस्थान में औद्योगिक क्रांति का आधार बनेगा ऐसी उम्मीद है। इससे हजारों युवाओं को प्रत्यक्ष रोजगार तथा लाखों लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है। स्थानीय उद्योग, परिवहन, व्यापार और सेवा क्षेत्र को भी इसका व्यापक लाभ मिलेगा। पूरा इलाका भारत का दुबई बनेगा। यह कहना भी अतिशयोक्ति नहीं होगा।
परिवहन अवसंरचना के क्षेत्र में भी राजस्थान ने उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं। भारत माला परियोजना, दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे तथा राष्ट्रीय राजमार्गों के विस्तार ने राज्य के अनेक जिलों को आधुनिक सड़क नेटवर्क से जोड़ा है। सीमावर्ती क्षेत्रों तक बेहतर सड़क संपर्क राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ पर्यटन और व्यापार के लिए भी लाभकारी सिद्ध हुआ है। बेहतर सड़कें निवेशकों का विश्वास बढ़ाती हैं और आर्थिक गतिविधियों को नई गति देती हैं।
रेलवे क्षेत्र में भी व्यापक परिवर्तन देखने को मिले हैं। अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत जयपुर, अजमेर, बीकानेर, उदयपुर, अलवर सहित अनेक रेलवे स्टेशनों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है। रेल लाइनों का विद्युतीकरण, दोहरीकरण तथा नई रेल सेवाओं के विस्तार से यात्रियों की सुविधा बढ़ी है और दिल्ली मुम्बई फ्रेट औद्योगिक रेल कॉरिडोर से माल परिवहन अधिक तेज एवं किफायती हुआ है। इससे उद्योगों और कृषि क्षेत्र को भी अप्रत्यक्ष लाभ मिला है।
राजस्थान आज देश की अक्षय ऊर्जा राजधानी बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। जैसलमेर, बीकानेर, जोधपुर और फलोदी जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर सौर एवं पवन ऊर्जा परियोजनाएँ स्थापित हुई हैं। केंद्र सरकार की नीतियों ने निजी निवेश को आकर्षित किया है, जिसके परिणामस्वरूप राजस्थान स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन का प्रमुख केंद्र बनकर उभर रहा है। यह न केवल पर्यावरण संरक्षण बल्कि देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।
स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एम्स जोधपुर का विस्तार, नए मेडिकल कॉलेजों और नर्सिंग संस्थानों की स्थापना तथा स्वास्थ्य अवसंरचना के सुदृढ़ीकरण से प्रदेश के लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध हो रही हैं। शिक्षा के क्षेत्र में आईआईटी जोधपुर जैसे संस्थानों का विस्तार उच्च शिक्षा और अनुसंधान को नई दिशा दे रहा है।
जल प्रबंधन राजस्थान की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक रहा है। केंद्र के सहयोग से पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना ईआरसीपी पुनर्गठित रामसेतु परियोजना तथा अन्य विभिन्न सिंचाई और पेयजल परियोजनाओं को गति मिली है। जल जीवन मिशन के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में नल से जल पहुँचाने का अभियान तेज हुआ है। साथ ही, सिंचाई परियोजनाओं के विस्तार से कृषि क्षेत्र को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
सामाजिक कल्याण की दृष्टि से प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, स्वच्छ भारत मिशन और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना जैसी योजनाओं का लाभ राजस्थान के करोड़ों नागरिकों तक पहुँचा है। इन योजनाओं ने गरीब, किसान, महिलाओं और ग्रामीण परिवारों के जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास किया है। हालाँकि किसी भी सरकार की उपलब्धियों का मूल्यांकन केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन और आम नागरिक तक पहुँचने वाले लाभों से होता है। राजस्थान में कुछ परियोजनाएँ अभी भी निर्माणाधीन हैं और कई योजनाओं के पूर्ण परिणाम आने वाले वर्षों में सामने आएँगे। इसके बावजूद यह कहा जा सकता है कि पिछले बारह वर्षों में राजस्थान में आधारभूत ढाँचे और औद्योगिक विकास की मजबूत नींव रखी गई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में राजस्थान को मिली बड़ी परियोजनाएँ केवल वर्तमान की आवश्यकताओं को पूरा करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे राज्य के दीर्घकालिक आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और औद्योगिक आत्मनिर्भरता का आधार भी बन सकती हैं। यदि इन योजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन और प्रभावी संचालन सुनिश्चित होता है, तो आने वाले वर्षों में राजस्थान देश की सबसे तेज़ी से विकसित होने वाली अर्थव्यवस्थाओं में अपना स्थान और अधिक मजबूत कर सकता है। यही इन बारह वर्षों की सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जा सकती है।
राजस्थान कृतज्ञ है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी राजस्थान के अपने पड़ौसी प्रदेश गुजरात के होने का पड़ौसी धर्म बखूबी निभा रहें हैं।