आजकल बाल साहित्य ख़ूब लिखा जा रहा है। यह एक अच्छा संकेत है आज के मशीनी युग में। जब हम मोबाइल पर पूरा दिन व्यर्थ कर देते हैं ;तब ऐसी पुस्तकें बाल मन में जिज्ञासा और रोमांच भर देतीं हैं!
चूंकि बच्चों में हमेशा कुछ नया जानने की, सीखने की ललक होती है और बात अगर घूमकर सीखने की हो, तब तो कहना ही क्या !! घूमना अगर घर बैठे ही हो जाए तो सोने पर सुहागा। अपनी आन- बान -शान के लिए जग विख्यात राजस्थ सदैव ही पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है।

बालक हमारी धरोहर हैं और देश के भावी कर्णधार भी। यदि बचपन से ही उनमें अपनी संस्कृति और इतिहास के प्रति जिज्ञासा का भाव पैदा कर दिया जाए, तो वही पौध आगे चलकर वटवृक्ष बन सकती है। अपनी ऐतिहासिक धरोहरों ,संस्कृति संरक्षण के प्रति जागरूक हो सकती है । डॉक्टर प्रभात कुमार सिंहल की पुस्तक ऐसी ही उम्दा पुस्तक है, जो बालकों में राजस्थान प्रान्त के प्रति न सिर्फ़ जिज्ञासा भाव पैदा करती है , वरन् उनका शमन भी करती है।
पुस्तक में कुल 24 छोटे- छोटे लेख हैं, जो सहज सरल भाषा में लिखे गए हैं। लेखों के साथ दिए गए रेखाचित्र पुस्तक को और अधिक आकर्षक बनाते हैं। लेखक पर्यटन स्थलों की बारीक से बारीक जानकारी सहजता से उपलब्ध कराते चलते हैं। आमेर का शीश महल, जयगढ़ पैलेस , नाहर गढ़, मेहरानगढ़ हो ,उम्मेद पैलेस ,कुंभलगढ़ की विशाल दीवार , चित्तौड़गढ़ , रणथंभौर रणकपुर का जैन मंदिर ,लेखक की पारखी दृष्टि से कुछ भी छूट नहीं पाया है।शहरों, दुर्गों कलात्मक महलों, किलो, संग्रहालयों, स्मारकों, हवेलियों, खम्भों, छतरियों, झीलों, तालाबों, चंबल रिवर फ्रंट आदि की कलात्मकता को वर्णित करने का ढंग प्रशंसनीय है ।
ऐतिहासिक तथ्यों की प्रामाणिक जानकारी के बिना आप उत्कृष्ट पुस्तक लिख नहीं सकते, उसके लिए गहन शोध, एकाग्रता, लगन , समर्पण भाव और सूक्ष्म दृष्टि होनी चाहिए। जो पुस्तक के अध्ययन से दृष्टिगोचर होती है।
राजस्थान के राजा-महाराजाओं के शौर्य ,पराक्रम और वीरता के किस्से व्यक्ति के हृदय में देशभक्ति का भाव भरते हैं , इसके अनगिनत उदाहरण आज भी यहां के किलो में प्रत्यक्ष रूप में विद्यमान हैं, चाहे वह चित्तौड़गढ़ हो , रणथंभौर हो या कुंभलगढ़ हो , हल्दी घाटी हो रक्त तलाई , चेतक का स्मारक, महाराणा प्रताप के शौर्य और स्वाभिमान को जीवंत करती झांकी हो, सब का यथा तथ्य वर्णन रोचकता के साथ किया गया है पन्नाधाय जैसी देशभक्त, स्वामिभक्त, कर्तव्यनिष्ठ और त्यागी महिलाएं हुईं,जिन्होंने अपने पुत्र चंदन की बलि देकर राजकुमार उदय सिंह के प्राणों की रक्षा की। आज की पीढ़ी को भले ही यह कथा या कल्पना लगे, पर सत्य है। उन्हीं राजकुमार उदयसिंह के नाम पर उदयपुर शहर बसाया गया है।
राजस्थान की भूमि शौर्य के साथ भक्ति के लिए भी जानी जाती हैं। मीराबाई जैसी भक्तिमयी स्त्रियां भी यहां हुईं ,जिन्होंने जीते जी भगवान कृष्ण को प्राप्त किया । उनका मंदिर आज भी चित्तौड़ के दुर्ग में बना है ।गोविंद देव जी,खाटू श्याम जी, पुष्कर , माउंट आबू, तनोट माता का मन्दिर,रणकपुर का जैन मन्दिर,ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह आदि अनेक धार्मिक स्थल हैं; जिन्हें लेखक ने श्रद्धा से पुस्तक में संजोया है ।
लेखों के शीर्षक हृदयग्राही और अनोखे हैं कि उन्हें पढ़ते ही पूरा दृश्य आँखों के सामने किसी चलचित्र की तरह घूमने लगता है। शीर्षक पौराणिक आख्यानों, लोक कथाओं, शौर्य गाथाओं, ऐतिहासिक तथ्यों, प्राकृतिक परिवेश से जुड़े हैं । जैसे शिव के अंगूठे पर टिका आबू, ब्रम्हा जी के हाथ से गिरा नीलकमल, साहसी हम्मीर और बाघ, रेगिस्तान का गुलाब , विशाल गंगाजली कलश आदि। पुस्तक का आवरण पृष्ठ और शीर्षक दोनों ही बहुत खूबसूरत हैं । लोक संस्कृति और लोक कलाओं का मनोहारी वर्णन पठनीय है। जैसे- कठपुतलियों का मनमोहक नृत्य, लोक संगीत की स्वर लहरियां, हाथी की मजेदार सवारी, वोटिंग, पक्षियों का कलरव, पर्वतों के मनोरम दृश्य , रेगिस्तान के धोरे, मंदिरों की नक्काशी, महलों के ठाठ- वाट, प्राचीन दुर्लभ वस्तुओं का संग्रहालय, मछलियों के रंग-बिरंगा संसार, आकाश में तैरते गुब्बारे, शिल्पग्राम, ऊंट की सवारी, जीप सफारी, जंतर मंतर , ज्योतिषीय यन्त्रों की जानकारीआदि ।
सारांश रूप में कहा जाए तो पुस्तक संग्रहणीय है और राजस्थान के विषय में गहन जानकारी प्रदान करती है। पुस्तक पर अभिमत कोटा नगर की जानी-मानी बाल साहित्यकार डॉ कृष्णा कुमारी जी ने और भूमिका श्री विजय जोशी जी ने लिखी है अपनी बात में लेखक ने इस पुस्तक को लिखने का मंतव्य जाहिर किया है । लेखक के अनुपम प्रयास के लिए हार्दिक शुभकामनाएं, बधाई।
पुस्तक : आओ बच्चों घूमें अलबेला राजस्थान
लेखक -डॉक्टर प्रभात कुमार सिंहल
प्रकाशक -साहित्यागार, जयपुर
विधा : बाल साहित्य - पर्यटन
प्रकाशन वर्ष -2026
मूल्य : 200₹