उदयपुर, कुंडा गांव में पिछले दो दिनों से गंभीर रूप से बीमार एवं लावारिस अवस्था में पड़ी ऊँटनी "वसुधा" को आखिरकार नया जीवन मिलने की उम्मीद जगी है। बताया गया कि उसका मालिक उसे बीमार हालत में बेसहारा छोड़कर चला गया था, जिसके बाद स्थानीय निवासी दीपक कुमार बरिया ने इसकी सूचना समाजसेवियों को दी।
सूचना मिलते ही समाजसेवी कैलाश वैष्णव ने तत्काल पहल करते हुए पिछले दो दिनों से ऊँटनी के उपचार एवं बचाव की व्यवस्था में लगातार प्रयास किए। शनिवार को एनिमल प्रोटेक्शन सोसाइटी की संस्थापक डॉ. माला मट्ठा के नेतृत्व में ऊँटनी को बेहतर एवं विशेष उपचार के लिए महावीर कैमल सेंक्चुरी, सिरोही भेजा गया। यह कदम उसके जीवन को बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।
रेस्क्यू अभियान में अपना घर गौशाला के हार्दिक मेनारिया तथा माँ हिंगलाज गौसेवा समिति के सदस्य दिव्य प्रकाश रावल, गोवर्धन सिंह भाटी, साहिल सालवी, राजेश रावल, देवेंद्र पालीवाल एवं नारायण सिंह कुमावत ने सक्रिय सहयोग दिया। सभी के संयुक्त प्रयासों से वसुधा को सुरक्षित रूप से सिरोही स्थित महावीर कैमल सेंक्चुरी के लिए रवाना किया गया।
इस अवसर पर डॉ. माला मट्ठा ने कहा कि ऊँट राजस्थान का राज्य पशु है, इसलिए उसके संरक्षण एवं कल्याण के लिए सरकार को और अधिक प्रभावी एवं सख्त नियम बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि कई बार पशु मालिक बीमार या घायल ऊँटों को सड़क पर लावारिस छोड़ देते हैं, जिससे वे तड़प-तड़प कर दम तोड़ देते हैं। ऐसे मामलों में पशु मालिकों की जवाबदेही तय होनी चाहिए तथा दोषियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई का प्रावधान होना चाहिए।
उन्होंने आमजन से भी अपील की कि यदि कहीं कोई घायल, बीमार या लावारिस पशु दिखाई दे तो उसकी सूचना तुरंत संबंधित पशु कल्याण संस्था या प्रशासन को दें, ताकि समय रहते उसका उपचार कर उसकी जान बचाई जा सके।
वसुधा का यह रेस्क्यू अभियान न केवल एक पशु के जीवन को बचाने का प्रयास है, बल्कि समाज में पशु संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता, सामूहिक जिम्मेदारी और मानवीय सरोकारों का भी प्रेरक उदाहरण है।