निम्बाहेड़ा- मेवाड़ के प्रसिद्ध श्री शेषावतार कल्ला जी वेदपीठ के 21 वें कल्याण महाकुंभ के चतुर्थ दिवस शनिवार को सतरंगी फुलो से सजी वेदपीठ पर विराजित कल्याण नगरी के राजाधिराज ठाकुर जी के श्रीनाथ जी स्वरूप के श्रृगांर ओर उन्ही को अर्पित किये जाने वाले 56 भोग की झांकी ने भक्तो का मन मोह लिया इस अवसर पर बड़ी संख्या में आए दर्शनार्थियों ने अपने आराध्य के अनुपम स्परूप को अपलक निहारते हुए कहा की वास्तव में ठाकुर जी के ठाठ तो वेदपीठ पर ही देखने को मिलते हैं। इससे पूर्व ठाकुर जी का 21 द्रव्यों से महाभिषेक कर वेदपीठ के आचार्यो ओर बटुको द्वारा किये गए अनुपम श्रृगांर की हर भक्त मुक्त कंठ से प्रशंसा करता दिखाई दिया इस बीच सतरंगी फुलो की झांकी से वेदपीठ महक उठी।
*अरणी मथंन के साथ 51 कुण्डीय श्री अतिरूद्र महायज्ञ प्रारंभ*
कल्याण महाकुुंभ के चतुर्थ दिवस 51 कुण्डीय श्री अतिरूद्र महायज्ञ आषाढ़ कृष्णा चतुर्थी को वेदिक मंत्रोउच्चार और ऋग्वेद के अग्निसुक्त ऋचाओ का गान कर ठाकुर जी के गगन भेदी जयकारों के बीच अरणी मथंन से अग्नि देव को प्रकट कर यज्ञकुण्डो में स्थापित करने के साथ ही श्री अतिरूद्र महायज्ञ प्रारंभ हुआ । इस दौरान लगभग 250 युगल यजमानो द्वारा गौघृत्य एंव शाकल्य की आहुतिया देकर महाकुंभ की भव्यता के साथ सर्वत्र खुशहाली और अच्छी वर्षा की कामना की गई प्रारंभ में पुरुष यजमानों का दस विधि हेमाद्रि स्नान कर कर यज्ञशाला मे प्रवेश कराया गया।
*वेदपीठ पर आज जगन्नाथ स्वामी का न्योछावर होगा 56 भोग-*
कल्याण महाकुंभ के पंचम दिवस रविवार को वेदपीठ पर विराजित जन-जन के आराध्य ठाकुर श्री कल्ला जी को भगवान जगन्नाथ स्वामी को धराये जाने वाला 56 भोग न्योछावर किया जाएगा जिसके लिए कल्ला जी वैदिक विश्व विद्यालय परिसर से 56 भोग की सामग्री को बैंड़ बाजो की मधुर धुन ढोल की थाप के साथ बेल गाड़ियो में सुसज्जीत कर वेद पीठ लाया जाएगा।
*भगवान शिव की कृपा प्राप्ति पर मानव का मृत्यु, भय और संकट भी कुछ नहीं बिगाड़ सकते : स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ*
निंबाहेड़ा। 21वें कल्याण महाकुंभ के अंतर्गत नेमीशारण्यम परिसर स्थित विश्वरूपम कथा मंडपम में भानपुरा पीठाधीश्वर शंकराचार्य परम पूज्य स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ महाराज के श्रीमुख से श्री लिंग महापुराण कथा का रसपान कराया जा रहा है। कथा के चतुर्थ दिवस शनिवार को उन्होंने भगवान शिव, नंदी और शिवभक्ति के प्रसंगों के माध्यम से श्रद्धा, शुद्ध आचरण और मंत्रोच्चार की महत्ता पर प्रकाश डाला। स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ ने कहा कि यज्ञ, पूजा और धार्मिक अनुष्ठानों में द्रव्य, क्रिया तथा मंत्र की शुद्धि अनिवार्य है। इनमें थोड़ी भी त्रुटि होने पर विपरीत परिणाम प्राप्त हो सकते हैं। इसलिए प्रत्येक धार्मिक कार्य पूर्ण श्रद्धा और विधि-विधान से संपन्न किया जाना चाहिए। कथा के दौरान महर्षि शिलाद और भगवान शिव के परम भक्त नंदी के अवतार का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने बताया कि भगवान शिव ने नंदी के रूप में अवतार लेकर महर्षि शिलाद को पुत्र सुख प्रदान किया। शिलाद ऋषि ने नंदी को वेदों सहित अनेक विद्याओं का ज्ञान दिया, लेकिन मुनियों ने उनकी अल्पायु होने का संकेत दिया। इससे व्यथित होकर शिलाद ने भगवान त्र्यंबकेश्वर की आराधना की, वहीं नंदी भी रुद्र जप और शिव ध्यान में लीन हो गए। उन्होंने बताया कि नंदी की अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव माता उमा के साथ प्रकट हुए और उन्हें अजर-अमर रहने, अपने गणों का अधिपति बनने तथा सदैव अपने समीप रहने का वरदान दिया। भगवान शिव ने अपने गले की माला पहनाकर नंदी को दिव्य तेज से विभूषित किया। प्रवचन में पंचनद के आध्यात्मिक महत्व का उल्लेख करते हुए स्वामीजी ने कहा कि ये पांच नदियां मानव की पांच ज्ञानेंद्रियों श्रवण, स्पर्श, दृष्टि, रसना और घ्राणकी प्रतीक हैं। इन इंद्रियों का संयम और पवित्रीकरण ही वास्तविक आध्यात्मिक स्नान है, जो मनुष्य को मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर करता है। उन्होंने कहा कि भगवान शिव की कृपा प्राप्त होने पर मृत्यु, भय और संकट भी भक्त का कुछ नहीं बिगाड़ सकते। प्रवचन के अंत में उन्होंने श्रद्धालुओं से भगवान शिव का स्मरण सदैव नमः शिवाय मंत्र के साथ श्रद्धा और नमस्कार भाव से करने का आह्वान करते हुए कहा कि यही शिवत्व और कल्याण का सर्वोत्तम मार्ग है।
वेदपीठ के धार्मिक अनुष्ठान अनुकरणीय एवं प्रशंसनीय- संत दिग्विजयराम
भागवत मर्मज्ञ संत दिग्विजय राम ने कहा कि श्री कल्ला जी वेदपीठ के धार्मिक अनुष्ठान एवं आयोजन प्रायः प्रशंसनीय रहे है इसी कड़ी में 21वा कल्याण महाकुंभ भगवान शिव को समर्पित होने के साथ ही प्रथम बात श्री लिंग महापुराण की कथा का रसास्वादन भानपुरा पीठ के शंकराचार्य स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ के मुखारविंद से श्रवण कराया जा रहा हे जो श्रद्धालुओ के लिए सौभाग्य की बात हे। संत दिग्विजयराम शुक्रवार सायं ठाकुर जी के दर्शन कर कथा मंडप में भक्तों को संबोधित कर रहे थे उन्होंने कहा कि यह वेदपीठ सनातन धर्म की पोषक ओर संवाहक के रूप में निरंतर प्रत्यनशील हे जिसके समस्त भक्तों को इस अनुकरणीय कार्य के लिए असंभव सहयोग करना चाहिए प्रारंभ में वेदपीठ के न्यासी एवं पदाधिकारियों द्वारा व्यासपीठ का पूजन किया गया वही बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने महाआरती की।
अखिल भारतीय विराट कवि सम्मेलन में वीर रस की गूंज, कवियों ने बांधा समां
निम्बाहेड़ा। कल्याण महाकुंभ के तृतीय दिवस शुक्रवार रात्रि को कथा मंडपम में अखिल भारतीय विराट कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। देशभर से आए प्रतिष्ठित कवियों एवं रचनाकारों ने वीर रस, राष्ट्रभक्ति, हास्य, श्रृंगार एवं ओजपूर्ण रचनाओं की प्रस्तुतियों से देर रात तक श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कवियों की प्रस्तुतियों पर श्रोताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट से उत्साहवर्धन किया। कवि सम्मेलन में मुकेश मौलवा इंदौर, राम भदावर (इटावा), प्रियंका राय (वाराणसी), सचिन सारंग (आगरा), सचिन दीक्षित (आगरा), मोहित शौर्य (गाजियाबाद), अंशुमान आजाद, जया धनगर वेदा (कल्याण नगरी) सहित अनेक कवियों ने अपनी रचनाओं की प्रस्तुति दी। सभी कवियों ने राष्ट्रभक्ति, सामाजिक समरसता, भारतीय संस्कृति, वीरता, हास्य और श्रृंगार से जुड़ी रचनाओं से श्रोताओं को बांधे रखा।
इस दौरान दीपक पारीक ने मेवाड़ के शौर्य का वर्णन करते हुए कहा, ये मत भूलो कि पुरखों का सम्मान बचाना आता है, मेवाड़ धरा के वीरों को तलवार चलाना आता है। सचिन सारंग ने सामाजिक एकता का संदेश देते हुए कहा, उठो हिंदुओं, तोड़ो जाति, खुद को पहले एक करो, बहुत बंट गए और कट गए, बच्चों को तो सेफ करो। वहीं अंशुमान आजाद ने राजस्थान की वीर परंपरा और बलिदान का ओजपूर्ण वर्णन किया। प्रियंका राय ने वीर कल्लाजी के अदम्य साहस और स्वाभिमान पर आधारित रचना प्रस्तुत कर खूब सराहना बटोरी। मोहित शौर्य की ओजपूर्ण प्रस्तुति को भी श्रोताओं ने खूब सराहा। देर रात तक चले इस विराट कवि सम्मेलन में उपस्थित श्रद्धालु और श्रोता पूरी तन्मयता से कवियों की प्रस्तुतियां सुनते रहे। प्रत्येक प्रस्तुति पर तालियों की गूंज से कथा मंडपम बार-बार गूंज उठा।