उदयपुर। संगिनी अर्हम द्वारा "संस्कार का बीजारोपण" विषय पर एक प्रेरणादायी संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें समाज में नैतिक मूल्यों और पारिवारिक संस्कारों के महत्व पर विस्तार से चर्चा हुई।
संगिनी अर्हम की अध्यक्ष रश्मि पगारिया ने अपने संबोधन में कहा कि आज प्रेम संबंधों से जुड़ी दुखद घटनाएं, जैसे हाल ही में सामने आया सिया, चेतन और केतन का मामला, पूरे समाज को झकझोर देती हैं। उन्होंने कहा कि केतन की कोई गलती न होने के बावजूद उसकी जान चली गई, जिससे प्रत्येक संवेदनशील व्यक्ति का हृदय व्यथित होता है। ऐसे में सहज ही यह विचार आता है कि उस परिवार, विशेषकर उन माता-पिता पर क्या बीती होगी, जिन्होंने अपना इकलौता पुत्र खो दिया।
उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं केवल एक परिवार का नहीं, बल्कि पूरे समाज का दर्द हैं। इसलिए प्रत्येक अभिभावक का नैतिक दायित्व है कि वह बच्चों में बचपन से ही अच्छे संस्कार, नैतिक मूल्य, संवेदनशीलता, संयम, सही-गलत की पहचान तथा परिवार और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करे।
रश्मि पगारिया ने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे बच्चों के साथ गुणवत्तापूर्ण समय बिताएं, उनसे खुलकर संवाद करें, उनकी भावनाओं को समझें तथा जीवन के प्रत्येक निर्णय में विवेक, धैर्य और मर्यादा का महत्व समझाएं। उन्होंने कहा कि संस्कार ही वह मजबूत आधार हैं, जो बच्चों को जिम्मेदार, संवेदनशील और आदर्श नागरिक बनाते हैं।
संगोष्ठी में उपस्थित सभी सदस्यों ने समाज में संस्कारयुक्त वातावरण के निर्माण तथा नई पीढ़ी को सही दिशा देने का सामूहिक संकल्प लिया।
इस अवसर पर कविता खिमावत, ममता बोहरा, मंजु जैन, रंजना खातोड़ एवं कुसुम सांखला ने भी विषय पर अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित स्किल डेवलपमेंट प्रतियोगिता में मोनिका कोठारी, कविता सुराना, वनिता एवं ज्योति कच्छारा विजेता रहीं।
इस अवसर पर रश्मि पगारिया, कविता खिमावत, सीमा बाबेल, सुमन डागलिया, शशि मेहता, सीमा कच्छारा, प्रियंका हिरन, करिश्मा, डिम्पल सिंघटवाड़िया, पायल पोरवाल, ममता बोहरा, इशिता मेहता, अनिता बाबेल, सुनीता श्रीमाल, सीमा मांडोत, आशा हरकावत, कीर्ति पगारिया, सीमा सेठ, कुसुम सांखला, मंजु जैन, कविता सुराना, संगीता चपलोत, वनिता, ज्योति कच्छारा, कशिश पोरवाल, मोनिका कोठारी एवं रंजना खातोड़ सहित सभी सदस्यों ने सामूहिक प्रस्तुतियां देकर कार्यक्रम को सफल बनाया।