नेहरू नगर के निर्माणाधीन नाले में भ्रष्टाचार के आरोप, घटिया निर्माण से भड़का वाल्मीकि समाज, जांच की उठी मांग

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Published on : 05 Jul, 26 16:07

के. डी. अब्बासी

नेहरू नगर के निर्माणाधीन नाले में भ्रष्टाचार के आरोप, घटिया निर्माण से भड़का वाल्मीकि समाज, जांच की उठी मांग

कोटा। कोटा नगर निगम क्षेत्र के भीमगंजमंडी थाना इलाके में स्थित नेहरू नगर चंबल रोड की वाल्मीकि बस्ती में निर्माणाधीन नाले को लेकर स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है। बस्तीवासियों ने नाले के निर्माण कार्य में गंभीर अनियमितताओं, घटिया निर्माण सामग्री के उपयोग तथा तकनीकी मानकों की अनदेखी का आरोप लगाया है। लोगों का कहना है कि जिस नाले का निर्माण वर्षों पुरानी जलभराव की समस्या का समाधान करने के लिए कराया जा रहा है, वही नाला भविष्य में नई परेशानी का कारण बन सकता है।
स्थानीय नागरिकों के अनुसार करीब एक हजार से अधिक परिवारों की आबादी वाली वाल्मीकि बस्ती लंबे समय से बरसात के दौरान जलभराव की गंभीर समस्या से जूझ रही है। हर वर्ष बारिश के दौरान कई घरों में दो से चार फीट तक पानी भर जाता है, जिससे लोगों को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है। इसी समस्या के स्थायी समाधान के लिए नगर निगम द्वारा नाले के निर्माण का कार्य स्वीकृत किया गया था।
तीन महीने से अधूरा पड़ा निर्माण कार्य
बस्तीवासियों का कहना है कि नाले का निर्माण कार्य लगभग तीन-चार माह पहले शुरू हुआ था, लेकिन आज तक कार्य पूरा नहीं हो सका है। बरसात का मौसम शुरू होने के बावजूद निर्माण कार्य की धीमी गति लोगों की चिंता बढ़ा रही है। कई स्थानों पर नाला अधूरा पड़ा है, जिससे आवाजाही भी प्रभावित हो रही है और दुर्घटना की आशंका बनी हुई है।
सड़क से ऊंचा बनाया जा रहा नाला
स्थानीय लोगों का आरोप है कि नाले का निर्माण सड़क की ऊंचाई से ऊपर किया जा रहा है। यदि नाला सड़क से ऊंचा रहेगा तो घरों और गलियों का पानी उसमें कैसे पहुंचेगा। इससे बरसात के दौरान पानी की निकासी प्रभावित होगी और पहले की तरह घरों में पानी भरने की समस्या बनी रहेगी।
घटिया सामग्री के उपयोग का आरोप
बस्तीवासियों ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा जा रहा है। उनका कहना है कि नाले में 8 एमएम सरिए का उपयोग किया जा रहा है, जबकि तकनीकी मानकों के अनुसार 10 एमएम सरिया लगाया जाना चाहिए। इसके अलावा सरियों के बीच लगभग एक-एक फीट का अंतर छोड़ा जा रहा है, जबकि यह दूरी लगभग 6 इंच होनी चाहिए। लोगों का यह भी आरोप है कि नाले के ऊपर लगाए जाने वाले ढक्कनों में मजबूत आरसीसी स्लैब के बजाय पतली और कमजोर पत्थर की पट्टियों का उपयोग किया जा रहा है, जो कुछ ही समय में टूट सकती हैं और हादसों का कारण बन सकती हैं।
इंजीनियरों और ठेकेदार की मिलीभगत का आरोप
स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य में हो रही अनियमितताओं की शिकायत संबंधित अधिकारियों और इंजीनियरों से कई बार की जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। लोगों ने आरोप लगाया कि यदि समय रहते निर्माण की गुणवत्ता की जांच कराई जाए तो बड़े स्तर पर अनियमितताएं सामने आ सकती हैं। उन्होंने ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच की मांग की है।
जनप्रतिनिधियों से हस्तक्षेप की मांग
वाल्मीकि समाज के लोगों ने नगर निगम प्रशासन, जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए। यदि निर्माण में मानकों की अनदेखी या भ्रष्टाचार पाया जाता है तो संबंधित ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए तथा नाले का निर्माण निर्धारित गुणवत्ता और तकनीकी मानकों के अनुसार कराया जाए।
बस्तीवासियों की चेतावनी
स्थानीय नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया और घटिया निर्माण कार्य नहीं रोका गया तो वाल्मीकि समाज आंदोलन करने के लिए मजबूर होगा। उनका कहना है कि सरकारी धन का दुरुपयोग किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर जिला प्रशासन से लेकर राज्य सरकार तक शिकायत की जाएगी।


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