गोपेन्द्र नाथ भट्ट
ढाई साल पहले दिसम्बर 2023 में जयपुर के सांगानेर विधानसभा क्षेत्र से पहली बार विधायक निर्वाचित होने और राजस्थान के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद कई लोगों को यह सन्देह था कि सत्ता चलाने का अनुभव नहीं होने के कारण भजन लाल शर्मा देश के सबसे बड़े भौगोलिक प्रदेश राजस्थान की सरकार कैसे चलाएंगे लेकिन सत्ता संभालते ही चीते की चाल चलने वाले सरल स्वभाव लेकिन मजबूत और दूरदर्शी इरादे एवं दृढ़ इच्छा शक्ति वाले व्यक्तित्व के धनी भजन लाल शर्मा ने अपेक्षाकृत कम समय में जिस गति से राजस्थान की विकास योजनाओं को धरातल पर उतारने का प्रयास किया है, उसने राज्य की विकास यात्रा को एक नई दशा और दिशा मिली है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनके चाणक्य केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन, भाजपा एवं आरएसएस के शीर्ष नेतृत्व एवं केन्द्र सरकार के सहयोग और ‘डबल इंजन सरकार’ की कार्यशैली ने भजन लाल शर्मा को राजस्थान के चहुमुखी विकास के मार्ग पर चलने की मजबूती दी है। मुख्यमंत्री शर्मा की कार्यशैली की विशेषता यह रही है कि उन्होंने केन्द्र और राज्य के बीच समन्वय को प्राथमिकता दी है और अपने हर नई दिल्ली दौरे में राजस्थान के लिए एक नई सौगात लाये हैं । मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के नेतृत्व में विकसित राजस्थान का सपना अब योजनाओं से आगे बढ़कर धरातल पर आकार लेता दिखाई दे रहा है। यही कारण है कि अनेक राजनीतिक विश्लेषक और आमजन उन्हें राजस्थान के उभरते हुए ‘विकास पुरुष’ के रूप में देख रहे हैं।
अपने कार्यकाल के आधे सफ़र में उनकी पूरी कहानी लगभग 80,000 करोड़ की *पचपदरा रिफाइनरी एवं पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स* का हाल ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हाथों राष्ट्र को समर्पण कराने की निर्णायक पहल से और अधिक मजबूत हुई है। यहां लोकार्पण से पहले ही आगजनी की दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद जिस तेजी से 60 दिनों में इसे प्रधानमंत्री के हाथों उद्घाटन के लिए पुनः तैयार किया गया वह एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। भारत सरकार और राजस्थान सरकार के सयुंक वेंचर की यह महत्वाकांक्षी परियोजना राजस्थान में अब तक की सबसे बड़े निवेश वाली परियोजना है और यह न केवल राजस्थान ही नहीं बल्कि पूरे उत्तर-पश्चिम भारत के औद्योगिक विकास का एक नया अध्याय लिखे जाने वाली परियोजना मानी जा रही है। इससे हजारों प्रत्यक्ष एवं लाखों अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे तथा पेट्रोकेमिकल उद्योगों का विशाल नेटवर्क विकसित होगा।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना के साथ ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा एक लाख करोड़ की अन्य योजनाओं का शुभारंभ और शिलान्यास किया गया। पीएम मोदी ने जोधपुर के नए हवाई अड्डे का उद्घाटन किया गया वहीं 13000 करोड़ रु की लागत से बनने वाली *जयपुर मेट्रो फेज-2*की आधारशिला भी रखी गई है। इससे जयपुर शहर में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को नई गति मिलेगी और तेजी से बढ़ते शहरी विस्तार को आधुनिक यातायात सुविधा प्राप्त होगी।
राजस्थान में *रेल विकास* के नए आयाम स्थापित हो रहें है। विभिन्न रेलवे लाइनों के दोहरीकरण, रेलवें स्टेशनों का पुनर्विकास, नई रेल परियोजनाओं तथा कार्यक्रमों को भी गति मिली है। राजस्थान में ₹57,247 करोड़ कुल 30 रेलवे परियोजनाएँ (11 नई रेल लाइनें,14 दोहरीकरण परियोजनाएँ और 5 गेज परिवर्तन परियोजनाएँ पूरी या आंशिक रूप से पूर्ण हुई है अथवा स्वीकृत होकर प्रगति पर हैं। 2014 के बाद राजस्थान में 3,784 किलोमीटर नई रेलवे लाइन/ट्रैक का निर्माण (नई लाइन, दोहरीकरण आदि सहित) किया गया है।5,143 किलोमीटर से अधिक रेलमार्ग का विद्युतीकरण पूरा किया जा चुका है, जिससे राजस्थान लगभग पूर्ण विद्युतीकृत ब्रॉडगेज नेटवर्क वाला राज्य बन गया है। इसके अतिरिक्त वर्ष 2025-26 के रेल बजट में राजस्थान के लिए ₹9,960 करोड़ का प्रावधान किया गया, जो 2009–14 की औसत वार्षिक राशि (₹682 करोड़) की तुलना में लगभग 15 गुना अधिक है। वर्तमान में ₹12,480 करोड़ नई रेल लाइनें (लगभग 555 किमी), ₹8,204 करोड़ की दोहरीकरण (लगभग 832 किमी) ₹1,716 करोड़ रु गेज परिवर्तन (लगभग 152 किमी) की परियोजनाएँ प्रगति पर हैं
*जल संकट* आजादी से पहले से ही राजस्थान की सबसे बड़ी चुनौती रहा है। मुख्यमंत्री शर्मा ने प्रधानमंत्री मोदी की प्राथमिकताओं के अनुरूप जल संरक्षण और जल प्रबंधन को सर्वोच्च महत्व दिया। पूर्वी राजस्थान की जीवन रेखा मानी जाने वाली 73,000 करोड़ की *पुनर्गठित ईआरसीपी –पीकेसी लिंक परियोजना (रामसेतु परियोजना)* को अमलीजामा पहनाने के लिए चम्बल और अन्य नदियों को जोड़ने वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए उन्होंने भारत सरकार और मध्य प्रदेश सरकार के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए। हाल ही प्रदेश के शेखावाटी अंचल की प्यासी भूमि की प्यास बुझाने केन्द्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह के सहयोग से हरियाणा के साथ किए गए ₹34,102 करोड़ के यमुना जल समझौते को राजस्थान के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है। इस समझौते से शेखावाटी के चूरू, सीकर और झुंझनु आदि जिलों को भविष्य में यमुना का जल उपलब्ध होने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। इस उपलब्धि के बाद मुख्यमंत्री का प्रदेशभर में अभूतपूर्व स्वागत इस बात का प्रमाण है कि जनता इस पहल को विकास के नए युग की शुरुआत मान रही है।
अपनी सरकार के पहले ही वर्ष में उन्होंने *राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट* का आयोजन किया और इसके माध्यम से राज्य में 35 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए जिनमें से ₹7 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव धरातल पर उतर चुके है । इन निवेशों का उद्देश्य केवल बड़े उद्योग स्थापित करना नहीं, बल्कि युवाओं के लिए व्यापक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना रहा है। निवेश प्रक्रिया को सरल बनाने, अनुमतियों की समयबद्ध व्यवस्था तथा उद्योगों के लिए आवश्यक आधारभूत सुविधाओं का विस्तार भजनलाल सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल रहा। औद्योगिक निवेश आकर्षित करने के लिए राज्य सरकार ने निवेश-अनुकूल वातावरण तैयार करने की दिशा में कई कदम उठाए है। साथ ही देश विदेश में बसे प्रवासी राजस्थानियों को अपनी *कर्मभूमि से मातृभूमि*से जोड़ने के लिए मुख्यमंत्री शर्मा ने जयपुर में *प्रथम प्रवासी राजस्थानी दिवस* कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया और देश-विदेश में राजस्थान फाउंडेशन की 26 शाखाएं खोली है जिनमें 14 भारत में और 12 चैप्टर्स विदेशों में खोले गए है ।
प्रदेश में आ रहे विशाल निवेश, आधुनिक आधारभूत संरचना, ऊर्जा परियोजनाएँ, जल प्रबंधन, उद्योग, परिवहन और रोजगार के क्षेत्र में उठाए गए कदम भविष्य के राजस्थान की मजबूत नींव तैयार कर रहे हैं। देश के सबसे बड़े और राजस्थान जैसे विशाल भौगोलिक क्षेत्र वाले राज्य के लिए आधारभूत संरचना का विकास सबसे बड़ी आवश्यकता रही है। मुख्यमंत्री बनने के बाद भजन लाल शर्मा ने सड़क, रेल, मेट्रो, एक्सप्रेस-वे तथा औद्योगिक कॉरिडोर को प्राथमिकता दी और केन्द्र सरकार के सहयोग से अनेक राष्ट्रीय राजमार्गों तथा स्टेट हाई वे के निर्माण और विस्तार को तेज गति से आगे बढ़ाया है । परिणाम स्वरूप जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा, अजमेर, बीकानेर, और भरतपुर संभागों को बेहतर सड़क संपर्क उपलब्ध कराने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य हुए है ।
मुख्यमंत्री शर्मा ने *ऊर्जा क्षेत्र* को आत्मनिर्भर बनाने का भी स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किया है। राजस्थान पहले से ही देश में सौर ऊर्जा का अग्रणी राज्य रहा है, लेकिन नई सरकार ने *सौर, पवन और हरित ऊर्जा* परियोजनाओं को और अधिक प्रोत्साहन दिया। राज्य में ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर, सौर पार्कों का विस्तार तथा ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं पर विशेष बल दिया गया है। कुल मिलाकर राजस्थान में 50 गीगावाट (50,000 मेगावाट) से अधिक की सौर, पवन और हरित ऊर्जा परियोजनाएँ संचालित अथवा निर्माणाधीन हैं जिन पर लगभग ₹4.5 से ₹5 लाख करोड़ के कुल निवेश की संभावना है।इससे राजस्थान देश की ऊर्जा राजधानी बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
*पर्यटन* के क्षेत्र में राजस्थान की विश्व विख्यात ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण तथा धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए भी अनेक परियोजनाएँ प्रारम्भ की गई हैं। विरासत स्थलों के संरक्षण, सड़क संपर्क, सुविधाओं के विस्तार तथा पर्यटन अवसंरचना के विकास से राज्य की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में संचालित विभिन्न राष्ट्रीय कार्यक्रमों जैसे *विकसित भारत@2047, स्वच्छ भारत मिशन,हर घर जल, डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, पीएम सूर्य घर योजना तथा आधारभूत संरचना विकास* आदि को राजस्थान में प्रभावी ढंग से लागू करने का प्रयास कर रहें हैं । उन्होंने *हरियालों राजस्थान* कार्यक्रम के अंतर्गत गत वर्ष राज्य में ग्यारह करोड़ पौधे लगवाये और इस वर्ष भी दस करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है । *स्वच्छता अभियान* को गति देने के लिये मुख्यमंत्री शर्मा बहुत अधिक गंभीर दिखते है।इन्हीं कारणों से मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा को प्रदेशवासी राजस्थान के एक उभरते हुए ‘विकास पुरुष’ के रूप में देखने लगे हैं।
निश्चित रूप से किसी भी सरकार का अंतिम मूल्यांकन उसके पूरे कार्यकाल के बाद ही किया जाता है, किन्तु मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के वर्ष 2023 से अब तक की ढाई वर्षों की अवधि यह संकेत अवश्य देती है कि राजस्थान में विकास की गति तेज हुई है। यदि विकास की यह गति और समन्वय आगे भी बना रहेगा तो राजस्थान केवल मरुस्थलीय राज्य की पहचान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उद्योग, ऊर्जा, पर्यटन और आधारभूत संरचना,शिक्षा,ग्रामीण विकास,कृषि और संबद्ध क्षेत्रों आदि में देश के अग्रणी राज्यों में अपना स्थान बनाएगा इसमें कोई संदेह नहीं है।