चित्तौड़गढ़ से शुरू हुआ 'सृजन रविवार', युवाओं को साहित्य और भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ने की पहल

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Published on : 06 Jul, 26 16:07

चित्तौड़गढ़ से शुरू हुआ 'सृजन रविवार', युवाओं को साहित्य और भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ने की पहल

चित्तौड़गढ़। 21वीं सदी के राजस्थान साहित्यिक आंदोलन के अंतर्गत साहित्य, संस्कृति और भारतीय ज्ञान परंपरा को समाज से जोड़ने की दिशा में एक नई पहल के रूप में रविवार को चित्तौड़गढ़ में 'सृजन रविवार – चाय के साथ साहित्यिक संवाद' का शुभारंभ किया गया। रितुराज वाटिका में आयोजित प्रथम बैठक में साहित्यकारों, शिक्षाविदों, कलाकारों और युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए नियमित साहित्यिक संवाद की इस नई श्रृंखला का स्वागत किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ वरिष्ठ साहित्यकार शिव मृदुल के मुख्य आतिथ्य तथा आंदोलन के संस्थापक वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार अनिल सक्सेना 'ललकार' की अध्यक्षता में माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। वैदिक मंत्रोच्चारण पंडित कन्हैयालाल शर्मा ने किया। इस अवसर पर अतिथियों एवं उपस्थित साहित्यकारों का उपरणा पहनाकर सम्मान किया गया।

अध्यक्षीय उद्बोधन में अनिल सक्सेना 'ललकार' ने कहा कि समाज में साहित्यिक चेतना का विस्तार समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि 'सृजन रविवार' केवल साहित्यिक गोष्ठी नहीं, बल्कि साहित्य, संस्कृति और भारतीय ज्ञान परंपरा को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाने का सतत अभियान है। उन्होंने बताया कि यह पहल नियमित रूप से जारी रहेगी तथा चरणबद्ध रूप से राजस्थान के प्रत्येक जिले तक पहुँचाई जाएगी।

मुख्य अतिथि शिव मृदुल ने साहित्य के माध्यम से समाज में संवेदनशीलता, मानवीय मूल्यों और सकारात्मक सोच को मजबूत बनाने पर बल दिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. रमेश मयंक ने किया। बैठक में "युवाओं को भारतीय संस्कृति, साहित्य एवं ज्ञान परंपरा से कैसे जोड़ा जाए" विषय पर खुला संवाद आयोजित किया गया, जिसमें साहित्यकारों, शिक्षाविदों और युवाओं ने अपने विचार एवं सुझाव प्रस्तुत किए।

इसके पश्चात कार्यक्रम समन्वयक अखिलेश श्रीवास्तव ने 'सृजन रविवार' की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि यह आयोजन प्रत्येक माह के प्रथम रविवार को नियमित रूप से आयोजित किया जाएगा। इसका उद्देश्य साहित्यकारों, कलाकारों, शिक्षाविदों, विद्यार्थियों एवं संस्कृति प्रेमियों को एक साझा मंच प्रदान करना, युवाओं को भारतीय संस्कृति, साहित्य एवं ज्ञान परंपरा से जोड़ना तथा विभिन्न विचारधाराओं के बीच सकारात्मक और रचनात्मक संवाद को बढ़ावा देना है।

बैठक में निर्णय लिया गया कि प्रत्येक माह साहित्यिक संवाद के साथ पुस्तक परिचर्चा, समीक्षा एवं विमोचन, युवा रचनाकारों की प्रस्तुतियाँ, साहित्यकार सम्मान, भारतीय ज्ञान परंपरा पर विमर्श तथा लोक साहित्य और लोक कलाकारों को भी मंच प्रदान किया जाएगा। इसके साथ ही साहित्य उत्सव, पुस्तक मेले, लेखन कार्यशालाएँ, युवा रचनाकार शिविर तथा विद्यालय एवं महाविद्यालय स्तर की साहित्यिक गतिविधियों को भी इस अभियान से जोड़ा जाएगा। नई प्रतिभाओं की खोज, मार्गदर्शन और सम्मान के लिए भी विशेष प्रयास किए जाएंगे।

बैठक के अंत में सभी प्रतिभागियों ने साहित्य, कला एवं संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन और प्रसार के लिए निरंतर कार्य करने तथा युवाओं को भारतीय संस्कृति, साहित्य एवं ज्ञान परंपरा से जोड़ने का सामूहिक संकल्प लिया।

कार्यक्रम में शिव मृदुल, डॉ. रमेश मयंक, मुन्नालाल डाकोत, आर.एन. डाड, लक्ष्मीनारायण भारद्वाज, लक्ष्मण व्यास, प्रो. कल्याणी दीक्षित, नटवर त्रिपाठी, पंडित नन्द किशोर निर्झर, सुनील कुमार बाटू, डॉ. माणिक, नवीन शर्मा, पुष्कर, भरत व्यास, रामराज 'राजस्थानी', लक्ष्मीनारायण रावल, अमृतलाल चंगेरिया, शिवशंकर व्यास, संदीप शाह, अंकित श्रीवास्तव, जीतेश श्रीवास्तव, उपेंद्र भटनागर, महेंद्र दमामी, अंकिता श्रीवास्तव, कृष्णा सिन्हा, विदुषी बिल्लू, इंद्रा सुखवाल, मधु पारीक सहित अनेक साहित्यकार, कलाकार, शिक्षाविद एवं युवा उपस्थित रहे।
 


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