उदयपुर, प्रख्यात वैज्ञानिक एवं शिक्षाविद् डॉ. दौलत सिंह कोठारी की जयंती के अवसर पर "व्यवहार में नैतिकता : उपस्थित चुनौतियों की चाबी" विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। वक्ताओं ने कहा कि भारत ज्ञान की उदयभूमि है, जिसने ज्ञान को कर्म से जोड़कर सर्वकल्याण का मार्ग प्रशस्त किया है। वर्तमान समय में बढ़ते भौतिकवाद और जीवन मूल्यों के बीच संघर्ष के कारण मानवता नैतिक संकट का सामना कर रही है। ऐसे में विज्ञान एवं तकनीक के विकास के साथ आत्मचेतना और नैतिक मूल्यों के विकास को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए।

संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कैलाश डागा ने कहा कि डॉ. दौलत सिंह कोठारी का शिक्षा जगत में योगदान अविस्मरणीय है। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा समन्वय, सहिष्णुता और नैतिकता का संदेश देती है तथा आज इसकी प्रासंगिकता पहले से अधिक बढ़ गई है। उन्होंने आचार्य चाणक्य की आचार संहिता का उल्लेख करते हुए नैतिक प्रशासन की आवश्यकता पर बल दिया।

मुख्य अतिथि उदयपुर नगर विधायक ताराचंद जैन ने कहा कि डॉ. कोठारी राजस्थान के गौरव और भारत के महान मनीषी थे। उन्होंने विज्ञान के साथ-साथ अहिंसा, शांति और मानव कल्याण का मार्ग विश्व को दिखाया। उनके विचार आज भी समाज और शिक्षा जगत का मार्गदर्शन कर रहे हैं।
मुख्य वक्ता प्रो. नीरज शर्मा, अधिष्ठाता, सामाजिक विज्ञान एवं मानविकी महाविद्यालय ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में ज्ञान, विज्ञान, नैतिकता और कर्म का समन्वय ही शिक्षा का मूल उद्देश्य रहा है। उन्होंने कर्म, अकर्म, विकर्म और सद्कर्म की व्याख्या करते हुए कहा कि समग्र चेतना के विकास के बिना शिक्षा अधूरी है।
शांतिपीठ के संस्थापक अनंत गणेश त्रिवेदी ने कहा कि डॉ. कोठारी विज्ञान और मानवीय मूल्यों के बीच कोई विरोध नहीं मानते थे, बल्कि दोनों को एक-दूसरे का पूरक बताते थे। उन्होंने कहा कि बाहरी दुनिया के वैज्ञानिक विकास के साथ आत्मचिंतन और आध्यात्मिक चेतना का विकास भी आवश्यक है, अन्यथा मानवता का अस्तित्व संकट में पड़ सकता है। उन्होंने शिक्षा में उपनिषदों के अध्ययन को शामिल करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
संगोष्ठी में पूर्व नगर निगम आयुक्त एवं कलाविद् दिनेश कोठारी, पूर्व मुख्य अभियंता ज्ञान प्रकाश सोनी, शिक्षाविद् डॉ. परितोष दुग्गर, एडवोकेट समर्थ लाल साहू, डॉ. हेमलता, वन विभाग के पूर्व अधिकारी लक्ष्मीकांत जोशी तथा मांगीलाल मेघवाल सहित अनेक वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए। महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई। कार्यक्रम के प्रारंभ में अतिथियों ने डॉ. दौलत सिंह कोठारी के चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम के दौरान अनंत गणेश त्रिवेदी ने विधायक ताराचंद जैन से शिल्पग्राम के पीछे निर्मित तारामंडल का नाम डॉ. दौलत सिंह कोठारी के नाम पर रखने का आग्रह किया। इस पर विधायक ने आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया।
कार्यक्रम का संचालन एवं आभार प्रदर्शन डॉ. जितेंद्र ने किया।