प्रभात संगीत: आशावाद की नवचेतना" विषय पर ऑनलाइन विवेचना

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Published on : 07 Jul, 26 07:07

प्रभात संगीत: आशावाद की नवचेतना" विषय पर ऑनलाइन विवेचना

लोकबात यूट्यूब चैनल, नई दिल्ली द्वारा शनिवार 4 जुलाई 2026 को सोसाइटी फॉर माइक्रोवाइटा रिसर्च एंड इंटीग्रेटेड मेडिसिन (स्मरिम), उदयपुर की सचिव डॉ. वर्तिका जैन को "प्रभात संगीत: आशावाद की नवचेतना" विषय पर ऑनलाइन विवेचना हेतु आमंत्रित किया गया. ज़ूम प्लेटफार्म पर आयोजित हुए इस लाइव कार्यक्रम में डॉ. वर्तिका ने संगीत को परिभाषित करते हुए प्रभात संगीत के बारे में विस्तृत जानकारी दी. उन्होंने बताया की माइक्रोवाइटा सिद्धांत तथा प्रभात संगीत के प्रवर्तक श्री प्रभात रंजन सरकार हैं, जिन्होंने आठ वर्षों के अल्प समय में 5018 प्रभात संगीत का एक अनुपम अवदान मानवता को दिया. प्रभात संगीत आठ विभिन्न भाषाओं जैसे बंगाली, संस्कृत, हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, मैथिली, अंगिका तथा मगही में दिए गए हैं. प्रथम गीत श्री सरकार ने "बंधु हे निये चलो" दिनांक 14 सितम्बर, 1982 को बिहार हाल झारखण्ड के देवघर में दिया था. इसमें जीवन के विविध आयाम और मनोभाव पर आधारित गीत हैं, हर ऋतू , त्यौहार, सामाजिक अनुष्ठान, नव्यमानवतावाद साथ ही शिव और कृष्ण स्तुति से सम्बंधित गीत भी हैं. डॉ. वर्तिका ने माइक्रोवाइटा तथा प्रभात संगीत के सम्बन्ध पर बताया की धनात्मक माइक्रोवाइटा का एक प्रकार 'गन्धर्व माइक्रोवाइटा' है जो मानव को ललित कलाओं के प्रति आकर्षित करते हैं. प्रभात संगीत गायन द्वारा धनात्मक माइक्रोवाइटा वातावरण में एकत्रित होकर मानसाध्यात्मिक साधना के लिए अनुकूल परिवेश बनाते हैं. प्रभात संगीत की आध्यात्मिक महत्ता बताते हुए उन्होंने कहा कि प्रभात संगीत द्वारा मानव अपने जीवन के परम लक्ष्य को पाने की और अग्रसर हो सकता हैं.

उन्होंने बताया की प्रभात संगीत, संगीत के क्षेत्र में एक नया घराना है जिसमें शोध की अपार संभावनाएं हैं. इस पर हुए लोक-जैववैज्ञानिक अनुसन्धान में बड़े रोचक तथ्य सामने आये हैं , जैसे इनमें 1081 प्रभात संगीत में 83 विभिन्न प्रकार के पौधों का उल्लेख है तथा 755 प्रभात संगीत में 57 विभिन्न जंतुओं का उल्लेख है. प्रथम बार हुए यह दोनों शोधकार्य अंतर्राष्ट्रीय शोधपत्रिका बुलेटिन ऑन माइक्रोवाइटा रिसर्च एंड इंटीग्रेटेड मेडिसिन (बोमरिम) में प्रकाशित हुए है. इसमें कई नवीन रागों पर आधारित गीत भी हैं जिनका नामकरण अभी तक नहीं हुआ है तथा कई अतीत में विलुप्त हो चुकी राग-रागिनियों को भी इसमें पुनर्जीवित किया गया है. इसके साथ ही प्रभात संगीत द्वारा कई शारीरिक और मानसिक व्याधियाँ जैसे गठिया, केश झड़ना, मिर्गी, उदासी, अवसाद इत्यादि दूर हो जाती हैं.

आज के तकनीकी युग में युवा वर्ग के लिए डॉ. वर्तिका ने आशावाद से भरपूर प्रभात संगीत के श्रवण और गायन की ओर इंगित किया जो जीवन में नए प्रभात का सूत्रपात करता है तथा सन्देश दिया की इसके साथ ही एक उपयुक्त मानसाध्यात्मिक साधना को सीख कर युवा वर्ग अपने जीवन से निराशा को समाप्त कर विश्व निर्माण में अपना शत-प्रतिशत योगदान दे सकता है. आयोजनकर्ताओं के आग्रह पर अंत में प्रभात संगीत संख्या 4166 'मुसाफिर आगे बढ़ते जाना' को सुनाया गया जिस पर सभी श्रोताओं ने माना की प्रभात संगीत वास्तव में आशावाद की नवचेतना का सन्देश है जो एक अद्भुत माधुर्य से परिपूर्ण है तथा इसे सुनने के बाद में श्रोता आकर्षित हुए बिना नहीं रह सकता है. वास्तव में प्रभात संगीत, एक व्यक्ति को नंदन विज्ञान से शुरू होकर मोहन विज्ञान तक ले जाते हुए समस्त नकारात्मकता को दूर कर आध्यात्मिक सीमा तक पहुंचा देता है. एक घंटे से अधिक चले इस कार्यक्रम का ऑनलाइन प्रसारण लोकबात के यूट्यूब तथा फेसबुक पेज पर भी किया गया.

 


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