सिगरेट गेटवे ऑफ़ एडिक्शन 

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Published on : 07 Jul, 26 11:07

सिगरेट गेटवे ऑफ़ एडिक्शन 

खेमपुरा स्थित राजकीय महात्मा गांधी स्कूल में भारत विकास परिषद "सुभाष" द्वारा आयोजित नशा मुक्ति कार्यक्रम में वरिष्ठ चिकित्सक  डॉक्टर पी सी जैन ने सिगरेट को गेटवे ऑफ़ एडिक्शन( नशे का प्रवेश द्वार) बताया क्योंकि इसके माध्यम से गांजा, ब्राउन शुगर, तंबाकू, चरस इत्यादि नशे लिए जा सकते हैं। गुटखा और तंबाकू एक तरह का "दीमक नशा" है जिससे गाल किस तरह से गल जाते हैं यह उन्होंने अपने वीडियो में दिखाया। गुटका और तंबाकू का पता करने के लिए सभी से "फोर फिंगर" टेस्ट करवाया जिससे गुटखा और तंबाकू  को लेने वाले का आसानी से पता लगा सकता है। नेल पॉलिश नेल, पॉलिश रिमूवर, व्हाइटनर पेट्रोल, साइकिल पंचर सॉल्यूशन यह "वोलेटाइल नशे" सुंगने पर तुरंत मस्तिष्क में पहुंच जाते हैं और अपना कुप्रभाव दिखाने लगते हैं। शराब लड़कों की अपेक्षा लड़कियों पर 10 गुना ज्यादा नुकसान  पहुँचाती है। यह उनकी शारीरिक मानसिक एवं हार्मोनल रचना के कारण होता है। शराबी परिवार की वास्तविक घटना में उन्होंने बताया कि किस तरह से एक शराबी अपने नन्हे मुन्ने बच्चे एवं पत्नी को भरी ठंड में घर से बाहर  निकॉल कर अंदर से बंद कर लेता है। स्क्रीन

एडिक्शन आधुनिक युग का अभिशाप बन गया है, आंख में मायोपिया, गर्दन में सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस, पेट में मोटापा, मस्तिष्क में स्मृति लोप बढ़ते स्क्रीन एडिक्शन की वजह से है। इस हेतु  उन्होंने "डिजिटल फास्ट" और सारे परिवार का दिन भर में  स्क्रीन बिना एक साथ बैठना उपाय बताया। अंत में  छात्राओं ने मिलकर नशा गीत गाते हुए "नशा गरबा" किया। प्रिंसिपल नीलम पोडिया ने स्वागत एवं धन्यवाद ज्ञापित किया ।परिषद अध्यक्ष आर ऐल जैन और सचिव शोभा लाल दशोरा ने भी नशा मुक्ति का संदेश दिया और सभी को नशा न करने और नशा छुड़ाने की शपथ दिलाई। कैलाश मीणा, नरेंद्र गवारिया, निर्मल पुष्करणा, सुनीता सुथार अध्यापक भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।


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