सतरंगी फूलों की झांकी के बीच कल्कि स्वरूप में ठाकुर जी के दर्शन ने किया भक्तों को अभिभूत

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Published on : 07 Jul, 26 16:07

सतरंगी फूलों की झांकी के बीच कल्कि स्वरूप में ठाकुर जी के दर्शन ने किया भक्तों को अभिभूत

निंबाहेडा । मेवाड़ के प्रसिद्ध श्री शेषावतार कल्ला जी वेदपीठ के 21 वे कल्याण महाकुंभ के सप्तम दिवस मंगलवार को सतरंगी फूलों की झांकी के बीच कल्कि स्वरूप में ठाकुर जी के मनभाव श्रृंगार ने भक्तों को अभिभूत कर दिया । बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने ठाकुर जी के नित नए श्रृंगार और मनमोहक स्वरूप की प्रशंसा करते हुए कहा कि वेदपीठ के आचार्यों द्वारा किए जा रहे श्रृंगार और मनमोहक स्वरूप हर दर्शक को अपलक निहारने को विवश कर देते है । इस दौरान ठाकुर जी को 101 थाल में मेसुरपाक मिष्ठान का भोग धराया गया जिसकी झांकी ने वेदपीठ को द्विगुणित आकर्षक स्वरूप प्रदान कर दिया।

*श्री अतिरुद्र महायज्ञ का चतुर्थ दिवस रेबारी समाज के नाम रहा*

महाकुंभ के तहत आयोजित 51 कुण्डीय पंच दिवसीय श्री अतिरुद्र महायज्ञ मंगलवार को रेबारी समाज के नाम रहा जिसमें बड़ी संख्या में ठाकुर जी को अपना इष्ट देव मानने वाले रेबारी समाज सहित अन्य भक्तों के साथ 300 से अधिक युगल यजमानों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ गोघृत्य एवं शाकाल्य की आहुतियां देते हुए भगवान शिव सहित ब्रह्मांड के समस्त देवी देवताओं की कृपा प्राप्ति का जतन किया ।

*षोडश मातृकाओ का किया पूजन*

यज्ञ मंडप के मुख्य कुंड पर मंगलवार को वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मां भगवती एवं समस्त देवियों की कृपा प्राप्ति के लिए नन्ही वीरांगनाओं को विराजित कर षोडश मातृकाओ के रूप में उनकी पूजा अर्चना की गई । आचार्यों ओर बटुकों के मंत्रोच्चार के बीच हुई पूजा से संपूर्ण वातावरण शक्ति स्वरूप बन गया । 

*सैकड़ों भक्तों ने की यज्ञ परिक्रमा*

श्री अतिरुद्र महायज्ञ की महत्ता को अंगीकार करते हुए सैकड़ों  यजमानों के साथ बड़ी संख्या में नगर के श्रद्धालु नर नारियों ने 51 कुण्डीय यज्ञ शाला की 01 से लेकर 108 तक परिक्रमा कर स्वयं को धन्य किया । 

*ठाकुर जी की संध्या महाआरती में उमड़ रही भक्तों की भीड़*

कल्याण महाकुंभ के दौरान कल्याण नगरी के राजधिराज ठाकुर श्री कल्ला जी सहित पंच देवों की संध्या महाआरती में भागीदारी निभाने के लिए नगरवासियों सहित आस पास के क्षेत्रों से भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही हे । आगंतुक भक्त अपने आराध्य की महाआरती में सहभागिता निभाते हुए घर परिवार देश ओर प्रदेश में खुशहाली और अच्छी वर्षा की कामना कर रहे हे।

*कल्याण महाकुंभ का अंतिम ओर मुख्य दिवस आज*

वेदपीठ के अष्ट दिवसीय 21वे कल्याण महाकुंभ का आज अंतिम दिवस होने के साथ ही कई मुख्य आकर्षण होंगे । प्रातः 07:30 बजे पंच दिवसीय श्री अतिरुद्र महायज्ञ की पूर्णाहुति की जाएगी वहीं वेदपीठ की अनूठी परंपरा अनुरूप प्रातः 09 बजे विशाल कथा मंडप में मातृ पितृ पूजन किया जाएगा जिसमें 500 से अधिक यजमान युगलों के साथ बड़ी संख्या में नगरवासी भी मातृ पितृ पूजन में भागीदारी निभाते हुए भारतीय संस्कृति की विरासत को आक्षुण्य बनाने का जतन करेंगे । दूर दराज के कल्याण भक्तों के लिए वेदपीठ के मातृ पितृ पूजन की व्यवस्था को वर्तमान परिपेक्ष्य में अनुकरणीय बताते हुए इसमें भागीदारी निभाएंगे ।

*शंखनाद के साथ ध्वजारोहण*

वेदपीठ पर प्रातः 11 बजे शंखनाद के साथ जगन्नाथ पूरी से लाए गए पवित्र ध्वज का मंदिर पर ध्वजारोहण किया जाएगा l

*प्राकट् यो उत्सव एवं दिव्य दर्शन में उमड़ेगी भारी भीड़*


कल्याण महाकुंभ के अंतिम दिवस आषाढ़ कृष्णा अष्टमी बुधवार को आयोजित प्राकट् योत्सव महाआरती एवं दिव्य दर्शन में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ेगी । ढोल नगाड़ों के साथ सतरंगी आतिशबाजी और ठाकुर जी के गगन भेदी जयघोष के बीच दोपहर ठीक 12:32 बजे  जब ठाकुर जी के गर्भ गृह के पट खुलेंगे तो हर भक्त अपने आराध्य की एक झलक पाने को आतुर दिखाई देगा । ठाकुर जी के दिव्य दर्शन के लिए मेवाड़, मालवा, मारवाड़ ,हाड़ौती वागड़, गुजरात सहित  देश के विभिन्न क्षेत्रों से हजारों कल्याण भक्त पहुंचकर अपने आराध्य के दिव्य दर्शन करेंगे इसकी सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हे ।

*अहंकार विनाश का कारण, भक्ति और संस्कार ही कल्याण का मार्ग- शंकराचार्य स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ महाराज*

21वें कल्याण महाकुंभ में आयोजित श्री लिंग महापुराण कथा के सप्तम दिवस मंगलवार को भानपुरा पीठाधीश्वर शंकराचार्य परम पूज्य स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ महाराज ने कहा कि लिंग महापुराण केवल कथा नहीं, बल्कि धर्म, संस्कार, भक्ति और लोककल्याण का शाश्वत मार्गदर्शक ग्रंथ है। उन्होंने बताया कि भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपूर्ण सृष्टि के लिए आदर्श वैदिक संस्कार का प्रतीक है। स्वयं देवाधिदेव महादेव ने वैदिक रीति-रिवाजों, हवन, सप्तपदी और सभी धार्मिक विधानों का पालन कर यह संदेश दिया कि प्रत्येक मनुष्य को अपने जीवन में संस्कारों और धर्माचरण का पालन करना चाहिए। स्वामीजी ने कहा कि इस दिव्य विवाह में ब्रह्मा, विष्णु, इंद्र, ऋषि-मुनि, सिद्ध, गंधर्व, यक्ष, किन्नर, अप्सराएं तथा अनगिनत शिवगण उपस्थित हुए और समस्त देवशक्तियों ने माता पार्वती को आशीर्वाद दिया। यह प्रसंग बताता है कि जब जीवन धर्म और मर्यादा पर आधारित होता है, तब समस्त शुभ शक्तियां उसका समर्थन करती हैं। उन्होंने दक्ष यज्ञ के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि अहंकार, ईश्वर का अपमान और धर्म से विमुखता अंततः विनाश का कारण बनती है। माता सती के आत्मत्याग के बाद भगवान शिव के क्रोध से उत्पन्न वीरभद्र ने दक्ष के यज्ञ का विध्वंस किया, किंतु अंत में भगवान शिव ने करुणा दिखाते हुए दक्ष सहित सभी देवताओं को पुनर्जीवन प्रदान किया। इससे शिक्षा मिलती है कि शिव न्याय के साथ-साथ करुणा और क्षमा के भी परम प्रतीक हैं। स्वामीजी ने कहा कि भगवान शिव और भगवान विष्णु में कोई भेद नहीं है। दोनों एक ही परम तत्व के स्वरूप हैं। जिस प्रकार पानी में पानी और घी में घी मिलकर एक हो जाते हैं, उसी प्रकार शिव और विष्णु की उपासना भी अंत में एक ही परम सत्य की आराधना है। कथा के अंत में उन्होंने काशी और कैलाश की महिमा बताते हुए कहा कि भगवान के नाम का जप, शिवलिंग का अभिषेक, विनम्रता, भक्ति और सत्कर्म जीवन को मोक्षमार्ग की ओर अग्रसर करते हैं। शिव–पार्वती विवाह का श्रद्धापूर्वक श्रवण और वर्णन व्यक्ति, समाज तथा समस्त लोक के सुख, शांति, समृद्धि और कल्याण का माध्यम बनता है। हर हर महादेव का उद्घोष केवल आस्था नहीं, बल्कि धर्म, सदाचार और लोकमंगल का संकल्प है प्रारंभ में वेदपीठ के पदाधिकारियो ने व्यास पीठ का पूजन किया वही कथा विश्राम पर सामूहिक महाआरती की गई ।

*भजनों की सुरधारा में सराबोर हुआ कल्लाजी धाम, देर रात तक झूमते रहे श्रद्धालु*

सोमवार रात्रि आयोजित भजन संध्या में इंदौर के सुप्रसिद्ध भजन गायक रोहित भूषण मिश्रा एवं उदयपुर की सुप्रसिद्ध गायिका त्रिशा सुथार ने अपनी मधुर प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं को देर रात तक भक्ति रस में सराबोर रखा। त्रिशा सुथार ने  जय-जय राजस्थान, गढ़ मांडफिया में बैठो सांवरो, मारी झोपड़ी आवे रे मारो सेठ सांवरियो, थारी मूरत रो नजारो मनड़े भा गियो, बयां सा बिराजे गढ़ चित्तौड़ तथा चित्तौड़गढ़ री धरती सूं आवे कल्ला राठौड़ जैसे भजनों की प्रस्तुति देकर खूब वाहवाही बटोरी। वहीं रोहित भूषण मिश्रा ने मेरे कल्लाजी महाराज, जब-जब हम पर संकट आया आपने हमें गले लगाया कल्लाजी महाराज, कल्ला जी राठौड़ मेरे कल्ला जी, जय-जय कल्लाजी महाराज, म्हारा कल्लाजी राठौड़, थाने वंदन कल्लाजी महाराज, कल्लाजी रे दरबार में एवं कल्लाजी महाराज की महिमा अपार जैसे भजनों से वातावरण को भक्तिमय बना दिया। दोनों कलाकारों की प्रस्तुतियों पर श्रद्धालु भक्ति भाव से झूम उठे और पूरा पांडाल जयकारों से गूंज उठा। देर रात तक चली भजन संध्या में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर धर्म लाभ अर्जित किया।
 


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