संस्था की संस्थापिका डॉ. माला मट्ठा को 10 जुलाई 2026 की रात्रि लगभग 10:00 बजे नाथद्वारा से सूचना प्राप्त हुई कि एक वृद्ध मादा गधा गंभीर रूप से घायल अवस्था में सड़क किनारे खड़ा था। उसका एक पैर पूरी तरह टूटा हुआ था और वह असहनीय पीड़ा के बावजूद किसी तरह स्वयं को संभाले हुए था।
जानकारी के अनुसार, वर्षों तक उससे काम लेने के बाद उसके मालिक ने वृद्धावस्था में उसे बेसहारा छोड़ दिया। दर्द से कराहती धरा कई दिनों से उसी अवस्था में खड़ी थी और किसी मदद का इंतजार कर रही थी।
सूचना मिलते ही डॉ. माला मट्ठा ने तत्काल रेस्क्यू अभियान शुरू कराया। संस्था के सदस्य कैलाश भोई, रोड़ीलाल भोई देर रात नाथद्वारा पहुँचे और धरा का सुरक्षित रेस्क्यू किया। लगभग 45 किलोमीटर की दूरी तय कर रात्रि करीब 2:55 बजे उसे उपचार हेतु उदयपुर लाया गया, जहाँ उसका चिकित्सकीय उपचार एवं देखभाल शुरू की गई।
डॉ. माला मट्ठा ने कहा, "जब तक जानवर स्वस्थ और काम करने योग्य रहते हैं, उनका उपयोग किया जाता है, लेकिन वृद्ध या घायल होने पर उन्हें बेसहारा छोड़ देना पशु क्रूरता का सबसे अमानवीय रूप है। ऐसे बेजुबान पशुओं को भी सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार है।"
उन्होंने बताया कि अब धरा का उपचार, पोषण और सुरक्षित जीवन सुनिश्चित करना संस्था की जिम्मेदारी है।
एनिमल प्रोटेक्शन सोसायटी, उदयपुर पिछले कई वर्षों से घायल, बीमार एवं बेसहारा पशुओं के लिए 24 घंटे आपातकालीन रेस्क्यू सेवा संचालित कर रही है। संस्था दिन-रात बिना किसी भेदभाव के बेजुबान पशुओं की सहायता के लिए तत्पर रहती है तथा राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों से प्राप्त शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई कर उन्हें नया जीवन देने का प्रयास करती है।