उदयपुर के युवा लेखक निखिल रावल ने भारतीय पौराणिक कथाओं को दिया आधुनिक फैंटेसी का नया आयाम

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Published on : 11 Jul, 26 16:07

भारतीय महाकाव्यों की विरासत और आधुनिक फैंटेसी का अनूठा संगम है उपन्यास 'कालचक्र: द कर्स्ड प्रोफेसी'

उदयपुर के युवा लेखक निखिल रावल ने भारतीय पौराणिक कथाओं को दिया आधुनिक फैंटेसी का नया आयाम

उदयपुर । भारतीय पौराणिक कथाओं और आधुनिक फैंटेसी का अनूठा संगम प्रस्तुत करने वाले उदयपुर के युवा लेखक निखिल रावल का प्रथम उपन्यास 'कालचक्र: द कर्स्ड प्रोफेसी' भारतीय पौराणिक कथाओं को आधुनिक फैंटेसी के साथ प्रस्तुत करने के अपने प्रयास के कारण चर्चा में है। भारतीय संस्कृति, दर्शन और पौराणिक विरासत से प्रेरित यह उपन्यास प्राचीन कथाओं को आधुनिक कहानी कहने के अंदाज़ में पुनर्कल्पित करता है।
निखिल ने इस उपन्यास की परिकल्पना अपने छात्र जीवन के दौरान की थी। शिक्षा के साथ-साथ उन्होंने इसकी कहानी पर काम शुरू किया और बाद में अपने पेशेवर जीवन की जिम्मेदारियों के बीच भी लेखन का यह सफर जारी रखा। वर्षों तक चले शोध, लेखन और पुनर्लेखन के बाद यह उपन्यास अपने वर्तमान स्वरूप में प्रकाशित हुआ।
लेखक के अनुसार इस उपन्यास की प्रेरणा रामायण और महाभारत जैसे भारतीय महाकाव्यों से मिली। वहीं, Marvel Cinematic Universe (MCU) के विस्तृत और आपस में जुड़े कथानकों ने भी उन्हें प्रभावित किया। इन दोनों प्रेरणाओं को साथ लेकर उन्होंने एक ऐसी काल्पनिक दुनिया की रचना की है, जिसमें भारतीय पौराणिक विरासत और आधुनिक फैंटेसी का संतुलित समावेश देखने को मिलता है।
'कालचक्र: द कर्स्ड प्रोफेसी' एक भारतीय पौराणिक फैंटेसी उपन्यास है, जिसमें रहस्य, रोमांच, दर्शन और मानवीय मूल्यों का प्रभावशाली समावेश है। कहानी अच्छाई और बुराई के शाश्वत संघर्ष, नियति, आत्मबोध और मानवता जैसे विषयों को आधुनिक कथानक के माध्यम से प्रस्तुत करती है।
पेशे से बिजनेस एनालिस्ट निखिल रावल का मानना है कि भारतीय महाकाव्यों और पुराणों की कहानियां समय के साथ पुरानी नहीं होतीं, बल्कि हर पीढ़ी उन्हें अपने नज़रिए से समझती है। इसी विचार ने उन्हें भारतीय पौराणिक कथाओं और आधुनिक फैंटेसी को एक साथ जोड़ते हुए 'कालचक्र' की रचना करने के लिए प्रेरित किया।
राष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित 'कालचक्र: द कर्स्ड प्रोफेसी' प्रमुख ऑनलाइन बुकस्टोर्स पर उपलब्ध है और पाठकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया प्राप्त कर रही है। उदयपुर के युवा लेखक के रूप में निखिल रावल की यह उपलब्धि शहर की उभरती साहित्यिक प्रतिभा का परिचायक है। भारतीय पौराणिक कथाओं को आधुनिक फैंटेसी के साथ प्रस्तुत करने का उनका यह प्रयास समकालीन भारतीय साहित्य में नए विषयों और नए दृष्टिकोण के साथ रचनात्मक संभावनाओं को भी रेखांकित करता है।
 


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