उदयपुर | महाराणा प्रताप का मेवाड़ तभी महत्वपूर्ण बना रहेगा जब पानी,पेड़ और पहाड़ बचे रहेंगे उक्त विचार मुख्य अतिथि एवं इतिहासकार डॉ श्रीकृष्ण जुगुनू ने अभिनव संसथान द्वारा आयोजित वनोत्सव कार्यक्रम में व्यक्त किये। डॉ जुगनू ने कहा कि यहाँ सच्चा वैभव वन,वृष्टि और वायु है ,यह सदैव स्वच्छ और सुंदर रहे,ऐसे हमारे संकल्प हो। भविष्य की सुरक्षा नदी और हरेभरे पहाड़ो से ही सम्भव है। विशिष्ठ अतिथि झील संरक्षण समिति सहसचिव एवं जल विशेषज्ञ अनिल मेहता ने कहा कि भारत में प्रतिव्यक्ति पेड़ो का औसत बहुत कम है जिसे तत्काल बढ़ाने की जरूरत बतलाते हुए कहा इसे सर्वोच्च प्राथमिकता देने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए राजस्थान भाजपा की उपाध्यक्ष अलका मूंदड़ा ने कहा कि माँ के नाम पेड़ लगाना हमारा धर्म है और पर्यावरण को शुद्ध बनाये रखना हम सभी का नागरिक दायित्व है.
कार्यक्रम के प्रारम्भ में अभिनव संस्थान के प्राचार्य कुशल रावल ने अतिथियों का स्वागत करते हुए बतलाया कि विगत पांच वर्षो में विधालयी छात्रों ने रकमपुरा की सेगरा धुनि वाले पहाड़ पर दो हज़ार से अधिक पौधो का रोपण किया है तथा प्रतिवर्ष वर्षाकाल में बीजारोपण किया जा रहा है। बालको को प्रकृति संरक्षण के मद्देनज़र झील सफाई एवं एवं पर्यावरण संरक्षण के कार्यो के साथ लगातार जोड़े रखा जाता है।
कार्यक्रम में झील प्रेमी तेजशंकर पालीवाल ने वृक्षारोपण एवं पानी बचने का आव्हान किया। समाज सेवी हरीश चौधरी ने अभिनव स्कुल द्वारा पर्यावरण संरक्षण के कार्यो की प्रशंसा की। समारोह की शुरुआत में एनसीसी केडेट्स और स्काउट के बालको ने गार्ड ऑफ़ ऑनर दिया गया । कार्यक्रम में मनीष मेघवाल, डॉ हिमरिषि रावल, विनोद कुमावत, उपाचार्य शुभ मंगला, सहित विभिन्न संस्थाओ के प्रतिनिधि,शिक्षाविद, पर्यावरण कार्यकर्त्ता उपस्थित रहे। समारोह स्थल पर वृक्षारोपण के उपकरण, बीज, विभिन्न प्रजाति के पौधे एवं देशी खाद का प्रदर्शन भी किया गया।
अतिथियों द्वार सरस्वती मंदिर के प्रांगण में केले के दो पौधे लगाकर वृक्षारोपण एवं बीजारोपण के वनोत्सव का उद्घाटन किया। रकमपुरा सेगरा धुनि के पहाड़ पर स्कूली छात्र छात्रों व स्थानीय नागरिको द्वारा पोधो का रोपण एवं बीजारोपण किया गया। कार्यक्रम का समापन एक पौधा हमारी जिम्मेदारी के साथ सम्पन्न हुआ।