बीमारी ₹2,000 की सीमा देखकर नहीं आती, RGHS का प्री-ऑथराइजेशन आदेश वापस ले सरकार

( 1503 बार पढ़ी गयी)
Published on : 12 Jul, 26 10:07

राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय पेंशनर्स महासंघ का विरोध, मुख्यमंत्री एवं चिकित्सा मंत्री को तथ्यात्मक ज्ञापन भेजकर तत्काल आदेश निरस्त करने की मांग

बीमारी ₹2,000 की सीमा देखकर नहीं आती, RGHS का प्री-ऑथराइजेशन आदेश वापस ले सरकार

उदयपुर, राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय पेंशनर्स महासंघ ने राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) के तहत ₹2,000 से अधिक की OPD जांचों के लिए 13 जुलाई 2026 से लागू की जा रही प्री-ऑथराइजेशन व्यवस्था का कड़ा विरोध किया है। महासंघ ने मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा एवं चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह खींवसर को तथ्यात्मक ज्ञापन भेजकर इस व्यवस्था को तत्काल वापस लेने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि आदेश वापस नहीं लिया गया तो प्रदेशभर के पेंशनर्स लोकतांत्रिक आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष इंजी. वीरेन्द्र सिंह सोलंकी एवं प्रदेश महामंत्री इंजी. अरविंद कौशल (कोटा) ने कहा कि "बीमारी ₹2,000 की सीमा देखकर नहीं आती और न ही डॉक्टर मरीज की जांच उसकी कीमत देखकर लिखता है। जब किसी योग्य चिकित्सक ने जांच को आवश्यक माना है, तो फिर मरीज को TPA की अनुमति का इंतजार क्यों कराया जाए?" उन्होंने कहा कि बुजुर्ग पेंशनर्स को एक से तीन घंटे तक अनुमति के इंतजार में बैठाना RGHS की कैशलेस एवं सुगम चिकित्सा व्यवस्था की मूल भावना के विपरीत है।

प्रदेश अध्यक्ष सोलंकी ने इस नई व्यवस्था को "तुगलकी आदेश" बताते हुए कहा कि यदि सरकार को कुछ अस्पतालों या डायग्नोस्टिक सेंटरों द्वारा अनावश्यक जांच अथवा फर्जी बिलिंग की आशंका है तो दोषी संस्थानों का ऑडिट कर उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। कुछ संस्थानों की संभावित अनियमितताओं का खामियाजा लाखों ईमानदार कर्मचारियों एवं पेंशनर्स को भुगतने के लिए मजबूर करना न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने कहा कि RGHS एक स्वास्थ्य सुरक्षा योजना है, न कि "अनुमति राज" की व्यवस्था।

महासंघ के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. सुरेंद्र कुमार भटनागर (उदयपुर), डॉ. राजेंद्र सिंह चावड़ा (जोधपुर), मानफूल मंगलिया (बीकानेर), मूलचंद जाट (जोबनेर) एवं डॉ. अरुण कुमार शर्मा (कोटा) ने कहा कि डॉक्टर द्वारा आवश्यक बताई गई जांच के बीच पोर्टल, दस्तावेज और TPA की अनुमति जैसी अतिरिक्त औपचारिकताएं खड़ी करना मरीजों, विशेषकर बुजुर्ग पेंशनर्स, के लिए अनावश्यक परेशानी तथा उपचार में विलंब का कारण बनेगा।

प्रदेश मंत्री डॉ. भारत सिंह भीमावत (जोधपुर), डॉ. भूपेंद्र उपाध्याय (उदयपुर), इंजी. मोहन लाल चांगवाल (जोबनेर), नेमाराम जाट (बीकानेर) तथा महावीर शर्मा (कोटा) ने कहा कि सरकार को मरीजों पर प्रतिबंध लगाने के बजाय संदिग्ध अस्पतालों एवं जांच केंद्रों की पहचान कर रियल-टाइम ऑडिट, डेटा एनालिटिक्स तथा कठोर कार्रवाई के माध्यम से अनियमितताओं पर रोक लगानी चाहिए।

महासंघ के संगठन मंत्री इंजी. सुरेंद्र भूषण सहाय (उदयपुर) ने कहा कि यदि सरकार ने इस पेंशनर-विरोधी व्यवस्था को तत्काल निरस्त नहीं किया तो प्रदेश के पांचों कृषि विश्वविद्यालयों के पेंशनर्स से विचार-विमर्श कर लोकतांत्रिक आंदोलन की आगामी रणनीति तय की जाएगी।

महासंघ ने मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा एवं चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह खींवसर से स्पष्ट मांग की है कि डॉक्टर द्वारा लिखी गई ₹2,000 से अधिक की आवश्यक OPD जांचों पर प्री-ऑथराइजेशन की अनिवार्यता वाला यह आदेश तत्काल वापस लिया जाए।

प्रदेश अध्यक्ष इंजी. वीरेन्द्र सिंह सोलंकी ने कहा, "डॉक्टर द्वारा लिखी गई जांच पर ₹2,000 की प्रशासनिक लक्ष्मण रेखा पेंशनर्स को स्वीकार नहीं है। पेंशनर्स के स्वास्थ्य और सम्मान से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। यदि सरकार ने यह आदेश वापस नहीं लिया तो प्रदेश के पांचों कृषि विश्वविद्यालयों के पेंशनर्स एकजुट होकर लोकतांत्रिक आंदोलन करेंगे।"


साभार :


© CopyRight Pressnote.in | A Avid Web Solutions Venture.