डॉ. राजेश कुमार व्यास: जयपुर कला, संस्कृति के विख्यात आलोचक

( 1050 बार पढ़ी गयी)
Published on : 15 Jul, 26 04:07

डॉ. राजेश कुमार व्यास: जयपुर  कला, संस्कृति के विख्यात आलोचक

राजस्थान में जयपुर के रचनाकार डॉ. राजेश कुमार व्यास  साहित्य की विभिन्न विधाओं के साथ - साथ कला, संस्कृति और पर्यटन पर पिछले कई वर्षों से निरंतर लिख रहे हैं। अपने कला और संस्कृति के प्रबल आलोचक के रूप में विशेष पहचान बनाई है। पेशे से ये राजस्थान सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग में सेवारत हैं। डॉ. राजेश कुमार व्यास का जन्म 14 सितम्बर 1973 को पिता स्व. प्रेमस्वरूप व्यास एवं माता श्रीमती शांति व्यास के परिवार में बीकानेर में हुआ। आपने पीएच.डी. (पर्यटन प्रबंधन), एमबीए, एमजेएमसी, पीजीडीसीए की शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी, राजस्थानी एवं अंग्रेजी भाषाओं के ज्ञाता हैं और गद्य - पद्य विधाओं में कविता, यात्रावृतांत, आलोचना, ललित निबंध आदि साहित्य की सभी विधाओं में लिखते हैं। आपने एक हजार से अधिक शोध पत्र लिखें हैं। अनेक राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठियों में भाग ले कर शोध पत्र पढ़े, बीज वक्तव्य एवं विशेष व्याख्यान दिए हैं।
    अतिमहत्वपूर्ण अकादमिक उपलब्धियों  के अंतर्गत 'डॉ. राजेश कुमार व्यास के वृतांतों में संस्कृति बोध' पर पीएच.डी.और बहुत से शोध प्रबंध किए गए हैं। महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी ऑफ बड़ौदा, मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय आदि के पाठ्यक्रम में इनकी पुस्तकें शामिल हैं। दूरदर्शन के लिए 'डेजर्ट कॉलिंग' धारावाहिक का लेखन किया है। साहित्य अकादेमी के लिए ख्यातनाम साहित्यकार और राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के अध्यक्ष रहे प्रो. अर्जुनदेव चारण पर वृत्त चित्र 'घर तो नाम है भरोसे का' का निर्देशन-लेखन किया। दूरदर्शन के लोकप्रिय कार्यक्रम 'संवाद' का पांच वर्ष तक संयोजन-प्रस्तुति। राजस्थानी कार्यक्रम 'मरुधरा' का एक दशक तक संचालन। दूरर्शन के लिए दो दर्जन से अधिक वृत्तचित्रोंका लेखन, आकाशवाणी के लिए एक दर्जन से अधिक रूपकों का लेखन। डेली न्यूज, न्यूज टुडे, दैनिक भास्कर, नवभारत टाइम्स, हिन्दुस्तान आदि के लिए कॉलम लेखन। राजस्थान पत्रिका में पिछले एक दशक से 'आर्ट एण्ड कल्चर' कॉलम लिख रहे हैं।
    आप राजस्थान विधानसभा, संग्रहालय शोध एवं विकास समिति सदस्य है। केन्द्रीय साहित्य अकादेमी, राजस्थानी भाषा सलाहकार मंडल के तथा केन्द्रीय ललित कला अकादेमी, रिसर्च एडवाईजरी कमेटी के भी सदस्य रहे हैं। राजस्थान पाठ्यपुस्तक मंडल, राजस्थान सरकार और राजस्थान मदरसा बोर्ड, राजस्थान सरकार के शाषी परिषद रहे हैं। राजस्थान सरकार की उच्च स्तरीय समिति, जीवन कौशल शिक्षा पाठ्यक्रम के भी वह सदस्य रहे हैं। हरिदेव जोशी पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, जयपुर में एकेडमिक काउन्सिल मेम्बर, देशभर के एक दर्जन से अधिक विश्वविद्यालयों में बोर्ड आफ स्टडी मेम्बर, विजिटिंग प्रोफसर, अकादमिक कोर्स सलाहकार, पाठ्यपुस्तक लेखक हैं। फ्रांस, जर्मनी एवं नेपाल की यात्रा कर चुके हैं। 
    आपकी विविध विद्याओं पर अब तक 28  मौलिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। इनमें कश्मीर से कन्याकुमारी, नर्मदे हर, आंख भर उमंग (यात्रा वृतांत), झरने लगते हैं शब्द, कविता देती है दृष्टि, जी रैयो मिनख, कविता देवै दीठ, दीठ रै पार (कविता संग्रह), ललितादित्य (उपन्यास), बु‌द्धि से विजय, ऐसे बरसते हैं बादल (बाल कथाएं), कलाओं की अंतर्दृष्टि, कला- मन, रस निरंजन, भारतीय कला, रंग नाद, सुर जो सजे, सौंदर्य के सत्यान्वेषी, कलावाक् (ललित निबंध एवं आलोचना), सांस्कृतिक पर्यटन, राजस्थान में पर्यटन प्रबंध, पर्यटन उ‌द्भव एवं विकास, भारत में पर्यटन, वैश्विक पर्यटन, पर्यटन अवधारणाएं भाग एक और भाग दो, राजस्थान में पर्यटन, भाग एक एवं भाग दो (पर्यटन पर एकाग्र) शामिल हैं। संपादित कृति - नाट्यशास्त्र: पंचम वेद पर एकाग्र, राजस्थानी कालजयी कहानियां, आंचल का दीप एकांकी संग्रह तथा अनुवादित कृति -- नेशनल बुक ट्रस्ट से प्रकाशित यात्रावृतांत-नर्मदे हर और साहित्य अकादेमी से प्रकाशित कविता संग्रह-कविता देवै दीठ हैं।
  देश की विभिन्न संस्थाओं द्वारा आपको अनेक पुरस्कार और सम्मान प्राप्त हुए हैं। प्रमुख सम्मान साहित्य अकादेमी का सर्वोच्च सम्मान, मध्यप्रदेश सरकार का अखिल भारतीय आचार्य रामचन्द्र शुक्ल आलोचना अवार्ड, भारत सरकार द्वारा प्रतिष्ठित 'राहुल सांकृत्यायन' पुरस्कार, लोक कलाओं में विशिष्ट योगदान के लिए संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार-पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, उदयपुर का प्रतिष्ठित कोमल कोठारी लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड, भाषा एवं पुस्तकालय विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा 'हिन्दी सेवा पुरस्कार, राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादेमी का 'सूर्यमल्ल  मिश्रण शिखर' और "गणेशीलाल व्यास उस्ताद पद्म पुरस्कार" तथा 'भाषा सेवी सम्मान', राजस्थान सरकार द्वारा 'उत्कृष्ट लेखक' पुरस्कार, जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर द्वारा शताब्दी भाषा गौरव पुरस्कार, श्रीगोपाल पुरोहित सांस्कृतिक पत्रकारिता पुरस्कार, राजस्थान गौरव, पत्रकारिता का 'माणक' अलंकरण आदि बहुत से सम्मान और पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। 
     आप वर्तमान में राजस्थान के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग में राज्यपाल महोदय कार्यालय में अतिरिक्त निदेशक जनसंपर्क के रूप में सेवारत हैं और लेखन में निरंतर सक्रिय हैं। संपर्क : शंकर विहार-ई, 28, ए, सिद्धार्थ नगर, जयपुर-302017 राजस्थान
मो. 9829102862
-----------
डॉ. प्रभात कुमार सिंघल
लेखक एवं पत्रकार, कोटा


साभार :


© CopyRight Pressnote.in | A Avid Web Solutions Venture.