मनोज कुमार की 89वीं जयंती पर ज़ी क्लासिक का खास सलाम

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Published on : 18 Jul, 26 09:07

पूरे हफ्ते प्रसारित होंगी भारतीय सिनेमा के इस महान कलाकार की यादगार फिल्में

मनोज कुमार की 89वीं जयंती पर ज़ी क्लासिक का खास सलाम

मुंबई, कुछ कलाकार सिर्फ मनोरंजन करते हैं, कुछ फिल्में बनाकर यादें छोड़ जाते हैं, लेकिन मनोज कुमार जैसे दिग्गज कलाकार पीढ़ियों के दिलों में हमेशा के लिए बस जाते हैं। 'भारत कुमार' के नाम से मशहूर मनोज कुमार ने देशभक्ति को सिर्फ पर्दे तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे हर भारतीय के दिल का जज़्बा बना दिया। उनकी फिल्मों में सिर्फ देश ही नहीं, बल्कि यहाँ के लोग, उनके संघर्ष, उनके सपने, उनका त्याग और उनका अटूट हौंसला भी नजर आता था।

इस जुलाई, जब महान अभिनेता, लेखक और निर्देशक मनोज कुमार की 89वीं जयंती है, तब ज़ी क्लासिक उनके शानदार सफर को याद करते हुए एक खास फिल्म फेस्टिवल लेकर आ रहा है। 19 जुलाई से 24 जुलाई तक दर्शकों को उनकी कुछ सबसे यादगार और सुपरहिट फिल्में देखने का मौका मिलेगा। ये वही फिल्में हैं, जिन्होंने मनोज कुमार को भारतीय सिनेमा का अमर सितारा बनाया और जो आज भी दर्शकों को उतनी ही पसंद आती हैं।

चार दशक से भी ज्यादा लंबे करियर में मनोज कुमार ने हिंदी सिनेमा को एक नई सोच दी। उस दौर में जब ज्यादातर फिल्में सिर्फ रोमांस और मनोरंजन पर आधारित होती थीं, तब उन्होंने आम आदमी, समाज और देश से जुड़ी कहानियों को बड़े पर्दे पर उतारा। एक अभिनेता के साथ साथ उन्होंने लेखक और निर्देशक के रूप में भी ऐसी फिल्में बनाईं, जो अपनी दमदार कहानी, शानदार संगीत और हमेशा याद रहने वाले संदेश की वजह से आज भी मिसाल मानी जाती हैं।

इस खास फिल्म फेस्टिवल में मनोज कुमार के सफर की छह शानदार फिल्में दिखाई जाएँगी। शुरुआत होगी ‘रोटी कपड़ा और मकान’ से, जिसमें आम आदमी के संघर्ष और उसके सपनों को बेहद असरदार तरीके से दिखाया गया है। इसके बाद आएगी ‘उपकार’, जिसने उन्हें हमेशा के लिए ‘भारत कुमार’ की पहचान दिलाई। देश के किसान और जवान को समर्पित यह फिल्म आज भी उतनी ही प्रेरणादायक मानी जाती है। इसके बाद ‘पूरब और पश्चिम’ भारतीय संस्कृति और संस्कारों की खूबसूरती को दिखाएगी। ‘शोर’ प्यार, बिछड़ने के दर्द और पिता के जज़्बात की ऐसी कहानी है, जो आज भी दिल को छू जाती है। ‘शहीद’ में मनोज कुमार ने भगत सिंह के किरदार को जिस दमदार अंदाज में निभाया, वो भारतीय सिनेमा की सबसे यादगार परफॉर्मेंस में गिना जाता है। इस खास सफर का समापन 24 जुलाई को उनकी भव्य फिल्म ‘क्रांति’ के साथ होगा। शानदार कलाकारों से सजी इस फिल्म ने एक बार फिर साबित किया कि मनोज कुमार बड़े कैनवास पर देशभक्ति, त्याग और इंसानियत की कहानियाँ कहने में बेमिसाल थे।

इस खास मौके पर उनके साथ काम कर चुके कई कलाकारों और करीबी दोस्तों ने भी उन्हें याद किया।

शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा, “जब भी मैं मनोज कुमार जी को याद करता हूँ, तो सिर्फ एक शानदार अभिनेता या निर्देशक याद नहीं आता, बल्कि एक ऐसा इंसान याद आता है, जो अपनी हर फिल्म को पूरी तरह जीता था। उनके लिए सिनेमा सिर्फ मनोरंजन नहीं था। हर कहानी का एक मकसद होता था और हर किरदार कुछ बड़ा कहता था। मुझे आज भी याद है कि शूटिंग शुरू होने से पहले वो सेट की हर छोटी से छोटी बात को बड़े ध्यान से देखते थे। उनके अंदर एक अलग ही सुकून था, लेकिन साथ ही उन्हें हमेशा साफ पता होता था कि उन्हें क्या चाहिए। उनके साथ काम करके मैंने सीखा कि किसी भी कलाकार की सबसे बड़ी ताकत उसकी सच्चाई होती है। पूरी इंडस्ट्री उन्हें 'भारत कुमार' कहती थी, लेकिन हमारे लिए वो हमेशा मनोज जी ही रहे, एक बेहद सादगी पसंद, गरिमामय और अपने देश से बेइंतहा प्यार करने वाले इंसान।”

हेमा मालिनी ने कहा, “मनोज जी के साथ काम करने की मेरी कई खूबसूरत यादें हैं। उनके सेट पर हर दिन कुछ नया सीखने को मिलता था। वो अपने कलाकारों को बहुत प्यार और धैर्य से समझाते थे और हमेशा कहते थे कि अभिनय में सच्चाई दिखनी चाहिए, सिर्फ ड्रामा नहीं। सबसे अच्छी बात यह थी कि वो हर इंसान का बराबर सम्मान करते थे, चाहे वो बड़ा कलाकार हो या फिर तकनीकी टीम का सदस्य। उनकी फिल्मों में इतना दिल इसलिए होता था, क्योंकि वो खुद भी बेहद संवेदनशील और गहराई से सोचने वाले इंसान थे। आज भी जब मैं उनकी फिल्में देखती हूँ, तो हर फ्रेम में उनकी मेहनत, जुनून और अनुशासन साफ नजर आता है। उनके साथ काम करना मेरे लिए हमेशा गर्व की बात रहेगी।”

प्यारेलाल ने कहा, “मनोज कुमार जी के लिए संगीत बहुत मायने रखता था। जब भी हम साथ काम करते थे, वे घंटों हमारे साथ बैठकर सिर्फ धुन ही नहीं, बल्कि हर गीत के जज़्बात पर भी बात करते थे। संगीत की उनकी समझ कमाल की थी। उन्हें पता था कि एक गीत सिर्फ फिल्म का हिस्सा नहीं होता, बल्कि पूरी कहानी की धड़कन होता है। शायद यही वजह है कि उनकी फिल्मों के गाने आज भी लोगों की जुबान पर हैं। उनके साथ काम करना हमेशा एक यादगार अनुभव रहा, क्योंकि वे हर बार हमें अपना सर्वश्रेष्ठ देने की प्रेरणा देते थे।”

प्रेम चोपड़ा ने कहा, “मनोज और मैंने सिर्फ फिल्मों में साथ काम नहीं किया, बल्कि ज़िंदगी के भी कई खूबसूरत पल साथ बिताए। कैमरे के सामने और पीछे वो बेहद अनुशासित, मेहनती और अपने काम के प्रति पूरी तरह समर्पित रहते थे। लेकिन, शूटिंग खत्म होते ही वे बेहद मिलनसार, स्नेही और हँसमुख इंसान बन जाते थे। वे हमेशा अपने आसपास के लोगों का ख्याल रखते थे और हर किसी को अहमियत देते थे। मुझे उनकी सबसे बड़ी बात यह लगती थी कि उन्होंने कभी अपने विचारों से समझौता नहीं किया। देश, रिश्तों और इंसानियत पर फिल्में बनाना उनका विश्वास था और उन्होंने इसे हमेशा निभाया। मैं खुद को खुशकिस्मत मानता हूँ कि मुझे उनके साथ काम करने और उन्हें करीब से जानने का मौका मिला।”

ज़ी क्लासिक का यह खास फिल्म फेस्टिवल सिर्फ मनोज कुमार को श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा के उस सुनहरे दौर का जश्न भी है, जिसने कई पीढ़ियों को प्रेरित किया। जिन्होंने उनकी फिल्में देखी हैं, वे एक बार फिर पुरानी यादों को ताजा कर सकेंगे और जिन्होंने नहीं देखीं, उन्हें भारतीय सिनेमा की कुछ बेहतरीन फिल्मों से रूबरू होने का मौका मिलेगा। क्योंकि वक्त बदल सकता है, लेकिन बेहतरीन फिल्में और उन्हें बनाने वाले कलाकार हमेशा अमर रहते हैं।

मनोज कुमार की 89वीं जयंती पर 19 जुलाई से 24 जुलाई तक हर शाम 7 बजे देखिए ज़ी क्लासिक का खास फिल्म फेस्टिवल। 24 जुलाई को उनकी जयंती के मौके पर होगी भव्य फिल्म ‘क्रांति’ की खास प्रस्तुति, सिर्फ ज़ी क्लासिक पर।


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