मरु क्षेत्र की लोक संस्कृति, इतिहास, स्थापत्य कला एवं विरासत बेजोड़ है — अनुपमा जोरवाल
जैसलमेर। दी थार हेरिटेज म्यूजियम में लोक कला एवं संस्कृति विशेषज्ञ लक्ष्मी नारायण खत्री द्वारा रचित पुस्तक "जैसलमेर की सांस्कृतिक सुरम" का लोकार्पण जिला कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट अनुपमा जोरवाल के कर-कमलों द्वारा संपन्न हुआ।
इस अवसर पर कलेक्टर अनुपमा जोरवाल ने कहा कि मरु क्षेत्र जैसलमेर की लोक संस्कृति, इतिहास, स्थापत्य कला एवं सांस्कृतिक विरासत विश्व में अद्वितीय और बेजोड़ है। यहां के कण-कण में लोक कला और सांस्कृतिक विरासत की अमूल्य छाप दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि आधुनिकता की अंधी दौड़ में हमारी लोक संस्कृति और परंपराएं धीरे-धीरे लुप्त होती जा रही हैं। ऐसे समय में इनके संरक्षण तथा इस दिशा में गंभीर शोध कार्यों को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। उन्होंने नई पीढ़ी से अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति सजग एवं संवेदनशील रहने का आह्वान करते हुए कहा कि जिला प्रशासन साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर प्रयासरत रहेगा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए समाजसेवी सुशील व्यास ने खत्री की पुस्तक को जैसलमेर के इतिहास, लोक संस्कृति एवं विरासत का महत्वपूर्ण दस्तावेज बताया। उन्होंने कहा कि जैसलमेर में शिक्षा के क्षेत्र में आए परिवर्तनों पर भी व्यापक शोध एवं लेखन किया जाना चाहिए।
पूर्व जिला प्रमुख अंजना मेघवाल ने कहा कि इतिहासकार लक्ष्मी नारायण खत्री का लेखन सदियों तक सारस्वत धरोहर के रूप में जीवंत रहेगा तथा आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा प्रदान करता रहेगा। उन्होंने कहा कि मरु प्रदेश की लोक संस्कृति अत्यंत अद्भुत, समृद्ध एवं दर्शनीय है।
जिले में ओरण भूमि संरक्षण अभियान के प्रमुख कार्यकर्ता सुमेर सिंह भाटी ने कहा कि जैसलमेर की प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की आज अत्यंत आवश्यकता है।
समाजसेवी मुरलीधर खत्री ने लेखक लक्ष्मी नारायण खत्री के संघर्षपूर्ण जीवन एवं उनकी सांस्कृतिक साधना का परिचय प्रस्तुत किया।
इतिहासकार एवं व्याख्याता तन सिंह सोढ़ा ने पुस्तक की विस्तृत समीक्षा प्रस्तुत करते हुए बताया कि इसमें कुल 37 शोधपरक लेख प्रकाशित किए गए हैं, जो जैसलमेर की संस्कृति एवं विरासत का अमूल्य खजाना हैं।
पर्यावरणविद् पार्थ जगानी ने कहा कि जैसलमेर प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र है, जिसके संरक्षण की जिम्मेदारी हम सभी की है।
इस अवसर पर पुस्तक के लेखक लक्ष्मी नारायण खत्री ने अपने लेखन जीवन की यात्रा का वर्णन करते हुए विरासत संरक्षण के क्षेत्र में आने वाली चुनौतियों पर प्रकाश डाला तथा अपनी पुस्तक का विस्तृत परिचय प्रस्तुत किया।
समाजसेवी शैतान सिंह पूनमनगर ने मरु प्रदेश की समृद्ध माड़ संस्कृति की विशेषताओं पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम से पूर्व जिला कलेक्टर अनुपमा जोरवाल ने दी थार हेरिटेज म्यूजियम का अवलोकन किया तथा वहां संरक्षित लोक कला, लोक जीवन एवं सांस्कृतिक विरासत से संबंधित दुर्लभ कलाकृतियों की जानकारी संग्रहालय के संस्थापक लक्ष्मी नारायण खत्री से प्राप्त की।
कार्यक्रम का शुभारंभ सभी अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।
कार्यक्रम का प्रभावी एवं गरिमामय संचालन डॉ. अशोक तंवर ने किया, जबकि अंत में ट्रस्टी जुगल किशोर भाटिया ने सभी अतिथियों एवं आगंतुकों का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर चंद्र प्रकाश भाटिया, ओमप्रकाश बिस्सा, अशोक कुमार, मोहनलाल खत्री, जयनारायण भाटिया, रतन सिंह भाटी, भंवरलाल बलानी, श्यामवीर सिंह, विक्रम सिंह, रमेश कुमार, सुमेर सिंह सोढ़ा, चंद्र प्रकाश, लक्ष्मी नारायण श्रीमाली, अरुण बलानी, रामचंद्र खत्री, कैलाश, मनीष गज्जा, घनश्याम खत्री, रतन भार्गव सहित बड़ी संख्या में कला, संस्कृति एवं साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे।