सहारा 

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Published on : 19 Jul, 26 10:07

डॉ.प्रेरणा गौड़  लेखिका

सहारा 


आंगन सुना हो गया रितु । महेश फिर से 
 हम सब कब एक साथ होंगे । जब वे थे कितना अच्छा था रितु अब उनका खुद का परिवार है । महेश माना कि उनका खुद का अब परिवार है लेकिन कभी-कभी तो हमसे मिलने आ ही सकते हैं जब से गए हैं तब से हमसे मिलने आए तक नहीं और ना ही फोन करते हैं यहां तक कि हमारे द्वारा किए गए कॉल को भी रिसीव नहीं करते हैं । रितु समय बदल गया है अब वह हमारे छोटे बच्चे नहीं रहे अब उनके खुद के भी बच्चे हैं ।
महेश रितु तुम्हारी बात सही है लेकिन उम्र के इस पड़ाव में हमें सहारे की जरूरत है
 अब हम वृद्ध हो चुके है सहसा रितु की आंखों से आंसू बहने लगते हैं।


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