जगन्नाथ रथ यात्रा के अवसर पर कला मण्डल के कलाकरो ने कठपुतली नाटिका रामायण का मंचन किया

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Published on : 19 Jul, 26 16:07

जगन्नाथ रथ यात्रा के अवसर पर कला मण्डल के कलाकरो ने कठपुतली नाटिका रामायण का मंचन किया

उदयपुर |  भारतीय लोक कला मण्डल, उदयपुर द्वारा  दिनांक 18 जुलाई 2026 को भारतीय लोक कला मण्डल के कलाकारों ने इसकॉन मंदिर अत्तापुर,  हैदराबाद द्वारा आयोजित जग्गन्नाथ भगवान की रथ यात्रा के अवसर पर कठपुतली नाटिका रामायण का मंचन किया l राजस्थान की धागा पुतली ने हैदराबाद मे अपनी अदभुत प्रस्तुति से दर्शकों को  भाव विभोर किया ।
भारतीय लोक कला मण्डल उदयपुर के
निदेशक डॉ. लईक हुसैन ने बताया की भारतीय लोक कला मण्डल के संस्थापक पद्मश्री स्व. देवीलाल जी सामर द्वारा 60 के दशक में कठपुतली नाटिका रामायण का निमार्ण किया गया और इसके देश-विदेशों में कई प्रदर्शन किए गए। वर्ष 2019 में संगीत नाटक अकादमी नई दिल्ली के सहयोग से रामायण पुतली नाटिका का पुनः निमार्ण किया गया और वर्ष 2019 में अयोध्या में आयोजित दीपोत्सव-2019 की शुरूआत रामायण कठपुतली नाटिका से हुई जिसका पुनः लेखन एवं निर्देशन संस्था के निदेशक डॉ. लईक हुसैन द्वारा किया गया है।

उन्होंने बताया कि रामायण कठपुतली नाटिका धार्मिक ग्रंथ पर आधारित घटनाओं का संक्षिप्त कथासार है। नाटिका मे भगवान श्री राम के द्वारा राजाजनक द्वारा रचे गये स्वंयवर में माता सीता से विवाह हेतु अयोद्धया जाना । अयोद्धया की जनता द्वारा राम के राज्याभिषेक में खुशी मनाना । उक्त घोषणा की सूचना पर कैकयी मंथरा संवाद और उसके बाद कैकयी द्वारा राजा दशरथ से भगवान श्री राम के लिए 14 वर्षो का वनवास और भरत के लिए राज्य का वचन मांगना। उक्त वचन को पूर्ण करने के लिये भगवान श्री राम, लक्ष्मण और सीता माता 14 वर्ष के वनवास के लिए जाते है। वनवास के दोरान लंका के राजा रावण की बहन सुरपणखंा ने जब राम और लक्ष्मण दोनों भाईयों को देखा तो उसने शादी करने की ठान ली और शादी का प्रस्ताव लेकर व सर्वप्रथम श्री राम के पास गयी तो राम ने आदर पूर्वक निवेदन किया कि मैं तो शादी-शुदा हूॅ तूम मेरे भाई लक्ष्मण से शादी का प्रस्ताव रखों, जब सूरपणखंा लक्ष्मण के सम्मुख शादी का प्रस्ताव रखती है तो लक्ष्मण उसे अस्वीकार कर चला जाता है तो सूरपणखा द्वारा पुनः प्रयास किया जाता है इस पर क्रोध में आकर लक्ष्मण द्वारा सूरपणखां की नाक काट दि जाती है। इस घटना का जब लंका के राजा रावण को पता लगा तो उसने छल पूवर्क सीता माता का अपहरण कर शादी का प्रस्ताव रखा जिसे माता सीता ने अस्वीकार कर दिया । सीता माता के अपहरण से श्री राम और लक्ष्मण काफी दुखीः हो जाते है वह सीता माता को वन- वन ढूंढते है परन्तु अन्त में हनुमान द्वारा सीता माता का पता लगाया जाता है। उसके पश्चात भगवान श्री राम और रावण के बीच युद्ध होता है ओर रावण का वध कर भगवान श्री राम विजयी होते है।

उक्त नाटिका का मंच प्रबंधन रोहित मेनारिया  ने किया  तो संस्था के कठपुतली कलाकार भगवती माली, मोहन डांगी, राकेश देवड़ा, लुम्बाराम, खुमाण सिंह, दूर्गा शंकर, गणेश गिरी, भवंर सिंह, किशन, हरि सिंह, धर्मेन्द्र वर्मा  आदि ने अपनी कला का प्रदर्शन किया।


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