95वें स्थापना दिवस पर विविध कार्यक्रम आयोजित करेगा विद्या भवन, शताब्दी की ओर बढ़ते संस्थान ने शिक्षा-दर्शन की विरासत को किया रेखांकित

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Published on : 20 Jul, 26 12:07

95वें स्थापना दिवस पर विविध कार्यक्रम आयोजित करेगा विद्या भवन, शताब्दी की ओर बढ़ते संस्थान ने शिक्षा-दर्शन की विरासत को किया रेखांकित

उदयपुर,  शिक्षा और सामाजिक परिवर्तन के क्षेत्र में कार्यरत विद्या भवन मंगलवार (21 जुलाई) को अपना 95वाँ स्थापना दिवस मनाएगा। इस अवसर पर जन-जागरूकता रैली, मुख्य समारोह, पौध नर्सरी का उद्घाटन तथा अन्य कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस वर्ष विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि वर्ष 1926 में जन्मे विद्या भवन के मूल विचार ने अपने 100 वर्ष पूरे कर लिए हैं, जबकि संस्था अपनी स्थापना के 100 वर्ष वर्ष 2031 में पूर्ण करेगी।

स्थापना दिवस के अवसर पर प्रकाशित अपने आलेख में डॉ. अनिल मेहता ने कहा है कि विद्या भवन की यात्रा किसी भवन से नहीं, बल्कि एक विचार से शुरू हुई थी। वर्ष 1926 में यूरोप के एक रेलवे स्टेशन के प्रतीक्षालय में बैठे डॉ. मोहन सिंह मेहता (भाईसाहब) के मन में ऐसे शिक्षण संस्थान की परिकल्पना जन्मी, जो अपने समय से आगे हो। उनका उद्देश्य ऐसी शिक्षा व्यवस्था विकसित करना था जो सह-शिक्षा, चरित्र निर्माण, स्वावलंबन, लोकतांत्रिक एवं पंथनिरपेक्ष मूल्यों, सामाजिक उत्तरदायित्व तथा प्रकृति के प्रति संवेदनशील नागरिक तैयार करे।

इस विचार को वर्ष 1931 में डॉ. मोहन सिंह मेहता ने डॉ. के.एल. श्रीमाली, सादिक अली, फतेहलाल वर्डिया और केसरीलाल बोरदिया के सहयोग से मूर्त रूप दिया। महात्मा गांधी, रवीन्द्रनाथ टैगोर और स्काउट आंदोलन से प्रेरित इन शिक्षाविदों ने शिक्षा को केवल ज्ञानार्जन नहीं, बल्कि समाज निर्माण का माध्यम माना।

वर्षों के दौरान विद्या भवन से देश की अनेक प्रमुख हस्तियां जुड़ीं। पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू, अटल बिहारी वाजपेयी और डॉ. मनमोहन सिंह, पूर्व राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद और प्रतिभा पाटिल, पूर्व राष्ट्रपति डॉ. जाकिर हुसैन तथा लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने संस्था का दौरा कर विद्यार्थियों और शिक्षकों से संवाद किया। विद्या भवन की शिक्षिका सरला बेन (मेरी कैथरीन हाइलमन) महात्मा गांधी की प्रमुख सहयोगियों में शामिल रहीं।

संस्था ने अनेक प्रतिष्ठित व्यक्तित्व भी दिए हैं। विद्या भवन के पूर्व हेडमास्टर एवं अध्यक्ष डॉ. कालूलाल श्रीमाली भारत के शिक्षा मंत्री बने, जबकि विद्या भवन पॉलिटेक्निक के पूर्व प्राचार्य वासुदेव देवनानी राजस्थान के शिक्षा मंत्री रहे और वर्तमान में राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष हैं। पूर्व विद्यार्थियों में राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया, पूर्व मंत्री बीना काक, पूर्व विदेश सचिव जगत मेहता एवं जे.एन. दीक्षित, वैज्ञानिक डी.एस. कोठारी और गोवर्धन मेहता, उद्योगपति अरविंद सिंघल तथा न्यायमूर्ति गोविंद माथुर सहित अनेक प्रमुख नाम शामिल हैं।

डॉ. मेहता के अनुसार समय के साथ संस्थान का विस्तार शिक्षक शिक्षा, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा, कृषि विज्ञान, शैक्षिक अनुसंधान, ग्रामीण विकास और पर्यावरण संरक्षण तक हुआ, लेकिन उसका मूल शिक्षा-दर्शन नहीं बदला। विद्या भवन ने खेल, कला, संस्कृति, श्रम, सामुदायिक सहभागिता और अनुभव आधारित शिक्षण को शिक्षा का अभिन्न हिस्सा बनाया तथा कक्षा से बाहर भी सीखने की अवधारणा को विकसित किया।

आज विद्या भवन स्कूल एवं कॉलेजों के समूह भर नहीं, बल्कि शिक्षा और सामाजिक विकास के व्यापक तंत्र के रूप में कार्य कर रहा है। मारवी परियोजना के माध्यम से भूजल पुनर्भरण एवं सामुदायिक जल प्रबंधन, आयड़ बेसिन में जल संसाधन प्रबंधन, स्वच्छता संबंधी शोध, कृषि एवं ग्रामीण विकास कार्यक्रम तथा यूनिवर्सिटी ऑफ लीड्स, यूनिवर्सिटी ऑफ कोपेनहेगन, यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी और अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी जैसे संस्थानों के साथ शैक्षिक एवं शोध सहयोग इसकी प्रमुख गतिविधियों में शामिल हैं। शिक्षा संबल, अपना सपना और ऊंची उड़ान जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों की शैक्षणिक गुणवत्ता और उच्च शिक्षा तक पहुंच बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

डॉ. मेहता ने कहा है कि अनुभव आधारित शिक्षा, बहुविषयी दृष्टिकोण, विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षण, कौशल विकास और सामाजिक सरोकार जैसे जिन सिद्धांतों पर विद्या भवन दशकों से कार्य कर रहा है, वे आज राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी परिलक्षित होते हैं। जलवायु परिवर्तन, जल संकट, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और बदलते रोजगार परिदृश्य जैसी चुनौतियों के बीच संस्था तकनीक और मानवीय मूल्यों के संतुलन पर आधारित शिक्षा मॉडल विकसित करने की दिशा में कार्यरत है।

स्थापना दिवस के कार्यक्रम

स्थापना दिवस के कार्यक्रमों की शुरुआत प्रातः 7 बजे जन-जागरूकता रैली से होगी। रैली को उदयपुर जिला कलक्टर गौरव अग्रवाल विद्या भवन स्कूल के नर्सरी गेट से हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। रैली फतहसागर झील तक जाएगी और वहां से पुनः विद्या भवन परिसर लौटेगी।

इसके बाद प्रातः 9.15 बजे विद्या भवन पब्लिक स्कूल, फतेहपुरा स्थित ओपन एयर थिएटर में मुख्य समारोह आयोजित होगा। समारोह के मुख्य अतिथि राजस्थान स्टेट माइंस एंड मिनरल्स लिमिटेड (आरएसएमएमएल), उदयपुर के प्रबंध निदेशक पी. रमेश होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्या बंधु चंद्र सिंह के. मेहता करेंगे।

समारोह में विद्या भवन सोसायटी के अध्यक्ष डॉ. जितेंद्र कुमार तायलिया, भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की कोयला एवं ताप विद्युत संबंधी विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति के अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त भारतीय वन सेवा अधिकारी इंदर पाल सिंह मथारू, तथा विद्या भवन के मुख्य संचालक एवं पूर्व संभागीय आयुक्त राजेंद्र भट्ट विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।

प्रातः 11.15 बजे नवस्थापित पौध नर्सरी का उद्घाटन इंदर पाल सिंह मथारू, डॉ. जितेंद्र कुमार तायलिया, विद्या भवन के उपाध्यक्ष भगवत बाबेल तथा मुख्य संचालक राजेंद्र भट्ट द्वारा किया जाएगा।

संस्था के अनुसार स्थापना दिवस समारोह शिक्षा, संस्कृति, नागरिक चेतना और पर्यावरणीय उत्तरदायित्व की उस विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प है, जिसने लगभग एक शताब्दी से विद्या भवन की पहचान बनाई है और जो उसे वर्ष 2031 में अपने शताब्दी वर्ष की ओर अग्रसर कर रही है।


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