उदयुपर। राज्यसभा सांसद श्री चुन्नीलाल गरासिया द्वारा राज्यसभा में पूछे गए दो अलग-अलग अतारांकित प्रश्नों के उत्तर में केंद्र सरकार ने ग्रामीण पेयजल व्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों से सम्बंधित जानकारी दी है। जल शक्ति मंत्रालय तथा कोयला मंत्रालय की ओर से दिए गए लिखित उत्तरों में सरकार ने जल जीवन मिशन 2.0 के विस्तार तथा स्वच्छ कोयला तकनीकों को प्रोत्साहित करने के लिए बड़े वित्तीय प्रावधानों की घोषणा की है।
राज्यसभा सांसद श्री गरासिया द्वारा अतारांकित प्रश्न संख्या 88 के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक परिवार तक नल से जल पहुंचाने संबंधी जानकारी मांगी गई थी। इसके उत्तर में जल शक्ति राज्य मंत्री श्री वी. सोमण्णा ने बताया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने श्जल जीवन मिशन 2.0श् को दिसंबर 2028 तक बढ़ाने की मंजूरी प्रदान कर दी है। मिशन का कुल परिव्यय बढ़ाकर 8.69 लाख करोड़ कर दिया गया है, इसमें केंद्रीय सहायता 3.59 लाख करोड़ होगी।
उन्होंने बताया कि मिशन के तहत दिसंबर 2028 तक देश के सभी 19.36 करोड़ ग्रामीण परिवारों को नल से जल कनेक्शन उपलब्ध कराने तथा सभी ग्राम पंचायतों को श्हर घर जलश् के रूप में प्रमाणित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए श्सुजलाम भारतश् नामक राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किया जा रहा है, जिसके माध्यम से स्रोत से लेकर नल तक पूरी पेयजल आपूर्ति प्रणाली का डिजिटल मानचित्रण होगा और प्रत्येक गांव को एक विशिष्ट आईडी प्रदान की जाएगी। साथ ही राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के साथ एमओयू किए जाएंगे, पूर्ण हो चुकी जल योजनाओं को श्जल अर्पणश् कार्यक्रम के माध्यम से ग्राम पंचायतों को सौंपा जाएगा तथा केंद्रीय सहायता का भुगतान एसएनए-स्पर्श फ्रेमवर्क के जरिए पारदर्शी तरीके से किया जाएगा।
इसी प्रकार अतारांकित प्रश्न संख्या 45 के माध्यम से देश में घरेलू ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ कोयला तकनीकों को बढ़ावा देने के संबंध में जानकारी मांगी गई। इसके उत्तर में कोयला एवं खान राज्य मंत्री श्री सतीश चन्द्र दुबे ने बताया कि केंद्र सरकार ने 13 मई, 2026 को सतही कोयला एवं लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं के लिए 37 हजार 500 करोड़ की नई वित्तीय प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दी है। इसके तहत पात्र संयंत्रों एवं मशीनरी की लागत का 20 प्रतिशत तक वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान किया जाएगा। यह योजना पूरे देश में लागू होगी।
मंत्री श्री दुबे ने बताया कि इससे पहले की 8 हजार 500 करोड़ की योजना के तहत आठ कोयला गैसीकरण परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है, जिनमें सरकारी, निजी और लघु स्तर की परियोजनियां शामिल हैं। उन्होंने कहा कि कोयला गैसीकरण तकनीक के माध्यम से कोयले और लिग्नाइट को सिनगैस में परिवर्तित किया जाएगा, जिससे रसायन, उर्वरक, सिंथेटिक प्राकृतिक गैस तथा हाइड्रोजन जैसे उत्पाद तैयार किए जा सकेंगे। यह तकनीक पारंपरिक कोयला उपयोग की तुलना में कार्बन उत्सर्जन कम करने के साथ-साथ देश की ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूत करेगी।