अंगदान बने जन अभियान के सारथी बने श्री कृष्ण शाइन इंडिया की अनूठी पहल, मंदिरों में ईश्वर के समक्ष लें अंगदान संकल्प

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Published on : 21 Jul, 26 09:07

अंगदान बने जन अभियान के सारथी बने श्री कृष्ण शाइन इंडिया की अनूठी पहल, मंदिरों में ईश्वर के समक्ष लें अंगदान संकल्प

कोटा। धार्मिक आस्था और मानव सेवा के संदेश को एक साथ जोड़ते हुए सामाजिक संस्था शाइन इंडिया फाउंडेशन, कोटा ने अंगदान जागरूकता को जन-अभियान बनाने की दिशा में एक अनूठी पहल शुरू की है। इस पहल के अंतर्गत मंदिरों के बाहर ऐसे जागरूकता बैनर लगाए जा रहे हैं, जिनमें भगवान श्रीकृष्ण के माध्यम से श्रद्धालुओं को नेत्रदान, अंगदान और देहदान का संकल्प लेने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

संस्था का उद्देश्य किसी भी धार्मिक भावना को प्रभावित करना नहीं, बल्कि हमारी भारतीय संस्कृति में निहित दान, सेवा और परोपकार की भावना को मानव जीवन बचाने के महान कार्य से जोड़ना है। मंदिरों में श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार भगवान को धन, प्रसाद और अन्य सामग्री अर्पित करते हैं। इसी भाव को एक सकारात्मक संदेश के रूप में प्रस्तुत करते हुए संस्था लोगों से अपील कर रही है कि—
“मुझे धन अर्पित करना आपकी श्रद्धा है… लेकिन किसी ज़रूरतमंद को नया जीवन देना मेरी सबसे बड़ी पूजा है।”

शाइन इंडिया फाउंडेशन के संस्थापक डॉ. कुलवंत गौर ने बताया कि भारतीय समाज में भगवान श्रीकृष्ण केवल आस्था के केंद्र नहीं, बल्कि धर्म, कर्म, सेवा और मानवता के मार्गदर्शक भी हैं। इसलिए संस्था ने श्रीकृष्ण को अंगदान जागरूकता अभियान का “सारथी” बनाया है।

“श्रीकृष्ण ने गीता में कहा—आत्मा अमर है, शरीर नश्वर है। जब यह शरीर एक दिन पंचतत्व में विलीन होना ही है, तो क्यों न इसके अंग किसी जरूरतमंद को नया जीवन दे जाएँ?” भारत में प्रतिवर्ष 5 लाख से अधिक लोग, अंग अभाव के कारण मृत्यु को प्राप्त होते हैं, जिनका जीवन अंगदान के माध्यम से आसानी से बचाया जा सकता है ।

यह संदेश किसी धार्मिक मान्यता को बदलने का प्रयास नहीं, बल्कि उसी श्रद्धा और सेवा-भावना को मानव जीवन बचाने की दिशा में आगे बढ़ाने का एक विनम्र प्रयास है।

मंदिरों के बाहर लगाए जा रहे बैनरों में श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे NOTTO के QR Code को स्कैन कर अंगदान का संकल्प पत्र भरें और अपने जीवन को एक ऐसे संकल्प से सार्थक बनाएं, जो मृत्यु के बाद भी कई लोगों के जीवन में प्रकाश ला सकता है।

अंगदान के माध्यम से किसी जरूरतमंद को नया जीवन मिल सकता है, नेत्रदान से किसी व्यक्ति को फिर से दुनिया देखने का अवसर मिल सकता है और देहदान चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।


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