उदयपुर। बढ़ते ट्रैफिक जाम, तेज़ी से फैलते शहरीकरण और सड़क अवसंरचना पर लगातार बढ़ते दबाव के बीच राजस्थान के पूर्व अतिरिक्त मुख्य नगर नियोजक (Additional Chief Town Planner) एवं प्रख्यात टाउन प्लानिंग विशेषज्ञ सतीश श्रीमाली का कहना है कि उदयपुर की अधिकांश यातायात समस्याओं का समाधान वर्षों पहले तैयार किया जा चुका है। आवश्यकता केवल उस रोड नेटवर्क योजना को लागू करने की है।
श्रीमाली ने वर्ष 2011 में तत्कालीन शहरी सुधार न्यास (यूआईटी) के लिए उदयपुर का व्यापक सड़क नेटवर्क तैयार किया था। इस मास्टर प्लान में लगभग 35 नई सड़कों, मिसिंग लिंक, सड़क चौड़ीकरण और दो आउटर रिंग रोड का प्रस्ताव शामिल था, जिनका उद्देश्य भविष्य की आबादी, पर्यटन और बढ़ते यातायात को ध्यान में रखते हुए शहर को एक सुव्यवस्थित एवं आधुनिक परिवहन नेटवर्क उपलब्ध कराना था।
करीब 15 वर्ष बाद भी योजना के अधिकांश प्रस्ताव अधूरे हैं, जबकि शहर की आबादी, वाहनों की संख्या और पर्यटकों का दबाव कई गुना बढ़ चुका है।
एक साक्षात्कार में श्रीमाली ने कहा, "उदयपुर की ट्रैफिक समस्या का कारण समाधान का अभाव नहीं है। समाधान वर्षों पहले तैयार कर दिए गए थे, अब आवश्यकता केवल उन्हें जमीन पर उतारने की है।"
उन्होंने बताया कि पूरी योजना का मूल उद्देश्य शहर के भीतर से गुजरने वाले बाहरी यातायात को शहर से बाहर निकालना तथा स्थानीय नागरिकों के लिए वैकल्पिक सड़क नेटवर्क विकसित करना था, ताकि कुछ सीमित मार्गों पर अत्यधिक दबाव समाप्त किया जा सके।
योजना के सबसे महत्वपूर्ण प्रस्तावों में दो आउटर रिंग रोड शामिल थे, जिनके माध्यम से भारी वाहन और लंबी दूरी का यातायात बिना शहर में प्रवेश किए अपने गंतव्य तक पहुंच सके। श्रीमाली का कहना है कि इससे शहर के भीतर यातायात का दबाव उल्लेखनीय रूप से कम हो सकता है।
मास्टर प्लान में शहर के भीतर लगभग 35 नई सड़कें, मिसिंग लिंक और सड़क चौड़ीकरण परियोजनाएं प्रस्तावित की गई थीं, ताकि विभिन्न आवासीय क्षेत्रों, व्यावसायिक केंद्रों, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, एयरपोर्ट मार्ग तथा शैक्षणिक संस्थानों के बीच वैकल्पिक संपर्क विकसित किया जा सके।
प्रमुख प्रस्तावों में रोडवेज बस स्टैंड के पीछे नया मार्ग बनाकर सूरजपोल क्षेत्र का दबाव कम करना, सेक्टर-3, 4, 5 एवं 6 को रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड से सीधे जोड़ना, प्रतापनगर से सेंट्रल स्कूल एवं बोहरा गणेशजी होते हुए यूनिवर्सिटी रोड तक वैकल्पिक एयरपोर्ट कॉरिडोर विकसित करना तथा बोहरा गणेशजी से रेलवे स्टेशन तक 60 फीट चौड़ी सड़क का निर्माण शामिल था।
इसके अतिरिक्त यूनिवर्सिटी रोड, सुभाष नगर और रूपसागर क्षेत्र को जोड़ने वाली 60 और 80 फीट चौड़ी नई सड़कों का भी प्रस्ताव रखा गया था। इन सड़कों का उद्देश्य केवल यातायात सुगम बनाना नहीं था, बल्कि वर्षा जल निकासी, पैदल यात्रियों की सुविधा और सुनियोजित शहरी विकास को भी बढ़ावा देना था।
श्रीमाली ने विशेष रूप से अंबेरी–नगदा रोड कॉरिडोर (राष्ट्रीय राजमार्ग-27) को उदयपुर का सबसे तेजी से विकसित होता शहरी क्षेत्र बताया। उन्होंने कहा कि अंबेरी, वाड़ा और आसपास की नई आवासीय कॉलोनियों, विश्वविद्यालयों तथा संस्थानों के तेजी से विकसित होने के बावजूद वहां पर्याप्त आंतरिक सड़क नेटवर्क विकसित नहीं किया गया है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में इन क्षेत्रों के लोगों को छोटी दूरी की स्थानीय आवाजाही के लिए भी राष्ट्रीय राजमार्ग का उपयोग करना पड़ता है, जिससे ट्रैफिक जाम और सड़क दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बढ़ रहा है।
इसी समस्या के समाधान के लिए वर्ष 2011 की योजना में 60 और 80 फीट चौड़ी कई आंतरिक संपर्क सड़कें प्रस्तावित की गई थीं, जो अंबेरी, नगदा रोड, कृषि विश्वविद्यालय, विभिन्न शिक्षण संस्थानों और नई विकसित हो रही कॉलोनियों को आपस में जोड़तीं। इन पूर्व-पश्चिम संपर्क मार्गों का उद्देश्य स्थानीय यातायात को हाईवे पर आए बिना एक कॉलोनी से दूसरी कॉलोनी तक पहुंचाना था।
श्रीमाली के अनुसार यदि इन सड़कों का निर्माण किया जाता है तो राष्ट्रीय राजमार्ग पर दबाव कम होगा, यात्रा समय घटेगा, आपातकालीन सेवाओं की पहुंच बेहतर होगी और दुर्घटनाओं में भी कमी आएगी।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इन आंतरिक संपर्क मार्गों का शीघ्र निर्माण नहीं किया गया तो अंबेरी–नगदा रोड क्षेत्र भी भविष्य में देबारी कॉरिडोर जैसी गंभीर यातायात और सड़क सुरक्षा समस्याओं का सामना करेगा।
उन्होंने प्रतापनगर क्षेत्र में प्रस्तावित फ्लाईओवर की मूल योजना में किए गए बदलावों पर भी चिंता व्यक्त की। उनके अनुसार मूल योजना एयरपोर्ट मार्ग के यातायात को सीधे शहर की ओर ले जाने वाली थी, लेकिन बाद में बदले गए डिज़ाइन के कारण आज भी प्रमुख चौराहों पर यातायात का दबाव बना हुआ है।
श्रीमाली ने कहा कि कई महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाएं भूमि अधिग्रहण और न्यायालयीन विवादों के कारण लंबित हैं। उनका मानना है कि प्रशासनिक समन्वय, भूमि विनिमय और समयबद्ध निर्णयों के माध्यम से इन बाधाओं को दूर कर शहर के महत्वपूर्ण मिसिंग लिंक पूरे किए जा सकते हैं।
उन्होंने बलीचा स्थित ठोस कचरा निस्तारण स्थल को भी शहर के विस्तार के मद्देनजर अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने की आवश्यकता दोहराई। उनका कहना है कि आसपास तेजी से विकसित हो रहे आवासीय क्षेत्रों के कारण वायु प्रदूषण, पर्यावरणीय प्रभाव और जनस्वास्थ्य संबंधी चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं।
पर्यटन, शिक्षा और निवेश के प्रमुख केंद्र के रूप में तेजी से विकसित हो रहे उदयपुर के लिए श्रीमाली का मानना है कि शहर के पास अभी भी अवसर है कि वह वर्षों पहले तैयार किए गए इस रोड नेटवर्क को लागू कर भविष्य की यातायात समस्याओं से बच सके।
उन्होंने कहा कि यदि प्रस्तावित सड़क नेटवर्क को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाता है तो इससे यातायात व्यवस्था में सुधार होगा, सड़क सुरक्षा मजबूत होगी, नियोजित शहरी विकास को गति मिलेगी और आने वाले दशकों के लिए उदयपुर को एक अधिक सक्षम एवं टिकाऊ परिवहन व्यवस्था प्राप्त होगी।