मंत्री का इस्तीफा विकल्प नहीं, पेपर लीक का स्थायी समाधान ढूंढे सरकार — नेशन फर्स्ट

( 357 बार पढ़ी गयी)
Published on : 23 Jul, 26 16:07

उदयपुर। नेशन फर्स्ट के कार्यकर्ताओं ने प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही पेपर लीक की घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि किसी मंत्री का इस्तीफा इस समस्या का समाधान नहीं है। नेशन फर्स्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजकर परीक्षा प्रणाली में स्थायी, तकनीक आधारित और पारदर्शी व्यवस्था लागू करने की मांग की है, ताकि करोड़ों विद्यार्थियों के भविष्य के साथ होने वाले खिलवाड़ पर हमेशा के लिए रोक लगाई जा सके।

नेशन फर्स्ट के संयोजक वरिष्ठ अधिवक्ता एडवोकेट अशोक सिंघवी ने पत्र में कहा कि देश में प्रतिवर्ष करोड़ों विद्यार्थी नीट, जेईई, यूपीएससी, एसएससी, रेलवे, बैंकिंग तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होते हैं। ऐसे में परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता केवल प्रशासनिक विषय नहीं, बल्कि युवाओं के विश्वास और राष्ट्र की प्रतिभा चयन प्रक्रिया का आधार है। बार-बार हो रहे पेपर लीक और प्रतिरूपण के मामलों ने इस विश्वास को गंभीर आघात पहुंचाया है।

नेशन फर्स्ट के कार्यकर्ता वरिष्ठ अधिवक्ता एडवोकेट विजय ओस्तवाल ने सुझाव दिया कि जिस प्रकार केंद्रीय व राज्यों के बजट निर्माण की प्रक्रिया को अत्यंत गोपनीय और बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था के तहत संचालित किया जाता है, उसी प्रकार प्रश्नपत्रों की तैयारी, छपाई, पैकिंग, भंडारण और परिवहन की संपूर्ण प्रक्रिया को भी उच्च सुरक्षा मानकों के अंतर्गत लाया जाए। डिजिटल ट्रैकिंग, नियंत्रित प्रवेश, सुरक्षित प्रिंटिंग जोन, जीपीएस निगरानी तथा बहुस्तरीय सुरक्षा प्रणाली को अनिवार्य बनाया जाए।

पत्र में सभी राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय परीक्षाओं में बायोमेट्रिक सत्यापन, फेस रिकग्निशन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सीसीटीवी निगरानी, केंद्रीय कमांड एवं कंट्रोल सेंटर तथा राष्ट्रीय परीक्षा सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू करने की भी मांग की गई है।

नेशन फर्स्ट के कार्यकर्ता एडवोकेट निमेष भट्ट ने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाओं का समाधान केवल राजनीतिक जवाबदेही तय करने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि परीक्षा माफियाओं के पूरे नेटवर्क की पहचान कर उनके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई, आय से अधिक कमाई पर जेल, बेनामी व अवैध संपत्तियों की जब्ती, फास्ट ट्रैक न्यायालयों में समयबद्ध सुनवाई तथा दोषियों को भविष्य में किसी भी सरकारी सेवा, सार्वजनिक पद या परीक्षा संचालन से जुड़े कार्यों से स्थायी रूप से प्रतिबंधित करने जैसे प्रावधान किए जाने चाहिए।

नेशन फर्स्ट छात्र कार्यकर्ता लक्ष्यराज मूंदड़ा ने यह आग्रह किया कि छात्रहित के नाम पर आंदोलन को अराजक रूप देने, हिंसा फैलाने अथवा सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों की पहचान कर उनके विरुद्ध भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि वास्तविक मुद्दे से ध्यान न भटके और ईमानदार विद्यार्थियों के हित सुरक्षित रह सकें। नेशन फर्स्ट ने छात्रों से भी आग्रह किया कि आंदोलन अराजक न हो, आज का छात्र कल देश का नागरिक होगा, ऐसे में देश की सम्पत्ति का नुकसान करना, लोगों को तकलीफ पहुंचाना कभी उचित नहीं हो सकता। आंदोलन हो, लेकिन शांतिपूर्ण तरीके से।


साभार :


© CopyRight Pressnote.in | A Avid Web Solutions Venture.