‘जीवन की दुकान’ नाटक ने दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

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Published on : 24 Jul, 26 10:07

‘जीवन की दुकान’ नाटक ने दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

उदयपुर, नाट्यांश सोसायटी ऑफ ड्रामेटिक एंड परफॉर्मिंग आर्ट्स, उदयपुर की ओर से देवाली स्थित राजकीय विद्यालय में आयोजित 15 दिवसीय प्रस्तुति-परक नाट्य कार्यशाला का समापन विद्यार्थियों द्वारा नाटक ‘जीवन की दुकान’ के प्रभावशाली मंचन के साथ हुआ। नाटक के माध्यम से विकास की अंधी दौड़, पर्यावरण दोहन और व्यक्तिगत स्वार्थ से प्रकृति को हो रहे नुकसान को रेखांकित करते हुए वृक्ष संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन का संदेश दिया गया।


कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों को रंगकर्मी रेखा सिसोदिया और अमित श्रीमाली ने अभिनय एवं रंगमंच का प्रशिक्षण दिया। समापन समारोह में विद्यार्थियों ने अमित श्रीमाली द्वारा लिखित नाटक ‘जीवन की दुकान’ प्रस्तुत किया, जिसमें दिखाया गया कि किस प्रकार विकास और लालच की होड़ में प्राकृतिक संसाधनों का लगातार दोहन किया जा रहा है और इसके दुष्परिणामों के प्रति समाज उदासीन बना हुआ है।

नाटक का संदेश था कि प्रकृति के साथ संतुलन बनाए बिना विकास संभव नहीं है। प्रस्तुति के माध्यम से लोगों को पेड़ों के संरक्षण और अधिक से अधिक वृक्षारोपण के लिए प्रेरित किया गया।

कार्यशाला संयोजक एवं नाटक की निर्देशिका रेखा सिसोदिया ने बताया कि उनकी टीम अब तक इस नाटक के 50 मंचन कर चुकी है। उन्होंने कहा कि कार्यशाला में शामिल सभी विद्यार्थियों ने पहली बार रंगमंच पर अभिनय किया, लेकिन उन्होंने पूरे आत्मविश्वास और उत्साह के साथ अपनी प्रस्तुति दी। कार्यशाला में लवेश प्रजापति ने सहायक के रूप में सहयोग किया।

नाटक में बाबूलाल मेघवाल, लीला मेघवाल, ललिता कुमारी, निशा कुमावत, साहिल जानी, तेजपाल सिंह कुमावत और चेष्टा जादौन ने अभिनय किया।

समापन समारोह में विद्यालय के प्राचार्य दुष्यंत कुमार नागदा ने कार्यशाला के आयोजकों को प्रशस्ति-पत्र एवं स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया। विद्यालय की अध्यापिकाओं पुष्पलता सोलंकी, कल्पना श्रीमाली और विमलेश कुमावत ने प्रतिभागी छात्र-छात्राओं को प्रमाण-पत्र वितरित किए।

नाटक की कहानी कुछ मित्रों के इर्द-गिर्द घूमती है, जो ऑक्सीजन निर्माण के व्यवसाय के लिए जंगलों और पेड़ों को नष्ट करने की योजना बनाते हैं। बाद में एक मित्र उन्हें पेड़ों और पर्यावरण के महत्व का एहसास कराता है, जिसके बाद सभी प्रकृति संरक्षण का संकल्प लेते हैं।

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