नो बैग डे बना जीवनदान का दिन: स्कूलों में गूंजा अंगदान का संदेश

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Published on : 26 Jul, 26 07:07

नो बैग डे बना जीवनदान का दिन: स्कूलों में गूंजा अंगदान का संदेश

राज्य सरकार के ‘अंगदान संजीवनी अभियान’ के तहत संभाग के विद्यालयों में जागरूकता कार्यशालाएं जारी

कोटा। राजस्थान सरकार द्वारा जुलाई माह को अंगदान जागरूकता माह के रूप में मनाते हुए प्रदेशभर में अंगदान के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के लिए विभिन्न विभागों के माध्यम से जागरूकता कार्यक्रम और कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं। इसी क्रम में ‘नो बैग डे’ को विद्यार्थियों के लिए ज्ञान और जीवनदान से जोड़ते हुए राजकीय विद्यालयों में अंगदान एवं नेत्रदान विषय पर विशेष जागरूकता कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं।

संभाग की सक्रिय सामाजिक संस्था शाइन इंडिया फाउंडेशन भी राज्य सरकार के अंगदान संजीवनी अभियान को सफल बनाने और अंगदान-नेत्रदान के संदेश को घर-घर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। अभियान के तहत बीते माह संयुक्त निदेशक प्रारंभिक शिक्षा आशा मंडावत द्वारा सभी राजकीय विद्यालयों में ‘नो बैग डे’ के अवसर पर अंगदान एवं नेत्रदान विषय पर जागरूकता कार्यशालाएं आयोजित करने के निर्देश जारी किए गए थे।

इसी क्रम में ग्राम मूंडला, तहसील दीगोद स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में प्रधानाचार्य रेखा शर्मा के नेतृत्व में अंगदान-नेत्रदान जागरूकता कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में प्रमुख वक्ता डॉ. संगीता गौड़ ने विद्यार्थियों को सरल और सहज भाषा में नेत्रदान एवं अंगदान की पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों से जुड़े सवालों के जवाब देते हुए अंगदान को लेकर समाज में फैली विभिन्न भ्रांतियों और गलत धारणाओं का भी समाधान किया।

इसके पश्चात समीपस्थ ग्राम कोटसुवां के पीएम श्री राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में प्रधानाचार्य अनुराधा खंडेलवाल के नेतृत्व में कक्षा 8 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए जागरूकता कार्यशाला आयोजित की गई। इस अवसर पर डॉ. कुलवंत गौड़ ने विद्यार्थियों को ब्रेन डेड अवस्था के बारे में विस्तार से समझाया और बताया कि ऐसी स्थिति में अंगदान का निर्णय कई जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन दे सकता है।

डॉ. गौड़ ने विद्यार्थियों से कहा कि “अंगदान केवल मृत्यु के बाद किया जाने वाला दान नहीं, बल्कि यह जीवन के बाद भी किसी के जीवन में रोशनी, सांस और उम्मीद छोड़ जाने का संकल्प है।” उन्होंने विद्यार्थियों से स्वयं जागरूक बनने और अपने परिवार एवं समाज में अंगदान का संदेश पहुंचाने का आह्वान किया।

शाइन इंडिया फाउंडेशन वर्ष 2016 से संभाग स्तर पर विद्यालयों, महाविद्यालयों और विभिन्न संस्थानों में नेत्रदान एवं अंगदान जागरूकता कार्यशालाओं का आयोजन कर रही है। संस्था का उद्देश्य है कि बच्चों और युवाओं को अंगदान के प्रति वैज्ञानिक जानकारी देकर उन्हें समाज में जागरूकता के दूत के रूप में तैयार किया जाए।

आज ‘नो बैग डे’ पर बच्चे किताबों का बोझ लेकर नहीं, बल्कि जीवन बचाने का संदेश लेकर अपने घर लौटे।


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